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पंजाब में दो मुस्लिम लड़के बन गए गोरक्षक

गोरक्षा के मामलों में कई केस पिछले दिनों सामने आए. गोरक्षा के नाम पर कुछ गोरक्षक बेहद सीरियस हो जाते हैं. इतने कि अगले को मार-मार कर सीरियस कर देते हैं. पीएम मोदी ने भी कहा था कि ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जो फर्जी गोरक्षक बने घूमते हैं. गोरक्षा के नाम पर मारपीट करने लगते हैं और मदद का दिखावा. मदद सिर्फ गाय की ही नहीं दूसरे जानवरों की भी हो तो और अच्छा है.

पंजाब का मालेरकोटा. यहां दो मुस्लिम लड़कों शम्सुद्दीन चौधरी और उसके दोस्त मुबीन ने एक गाय की मदद की. ये काम तो कोई ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन उन हालात में बड़ा हो जाता है जब गोरक्षा का हल्ला मचा हो. शनिवार की सर्द रात में सड़क पर एक गाय पड़ी थी, जिसके शरीर से खून बह रहा था. तब मदद की इन दो मुस्लिम लड़कों ने.

शम्सुद्दीन मालेरकोटा का एक बिजनेसमैन है. शनिवार की रात वो अपने दोस्त मुबीन के साथ अपनी कार से घर लौट रहा था. तभी उसने सड़क पर एक गाय देखी, जिसके शरीर से खून बह रहा था.

शम्सुद्दीन ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, ”शायद गाय को किसी गाड़ी ने टक्कर मारी थी. मैंने मुबीन को बुलाया. हमने पुलिस को कॉल किया ताकि गाय की मदद की जा सके. लेकिन हमें तुरंत कोई जवाब नहीं मिला. फिर मैंने मालेरकोटा के एसडीएम शौकत अहमद को फ़ोन किया.”

”एसडीएम ने फ़ोन उठा लिया और हमसे पांच मिनट तक इंतज़ार करने को कहा. उन्होंने वहीं के म्युनिसिपैलिटी के एक अफसर को फ़ोन किया. अफसर ने कर्मचारियों को लुधियाना बाईपास पहुंचने को कहा, जहां गाय थी. हम कर्मचारियों के साथ मिलकर किसी तरह गाय को एक पास की गोशाला में ले गए. जब तक कोई नहीं पहुंचा तब तक सड़क पर गाय की रखवाली करते रहे. कि कोई और गाड़ी उसे टक्कर ना मार दे.”

2014 के IAS अफसर शौकत अहमद ने बताया कि मुझे 12.40 बजे इन लड़कों का फ़ोन आया. मैंने म्युनिसिपल के अफसरों से गाय को बचाने को कहा. PCR को भी फ़ोन किया. वो लोग आधे घंटे में पहुंचे जो गाय को गोशाला ले गए, जहां वेटेरिनरी हॉस्पिटल के स्टाफ ने उसे बचाया. मुबीन ने बताया कि इसमें करीब दो घंटे लगे. जब हमें लगा कि गाय अब सेफ है तो हम घर लौट आए.

पंजाब के मुक्तसर में ही जनवरी में 8 से 12 के बीच हुए आठवें नेशनल लाइवस्टॉक चैंपियनशिप में कई गोरक्षक दलों ने डर फैला दिया था. बहुत से जानवरों के मालिक इस इवेंट से दूर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने पर गोरक्षक उन्हें अपना निशाना बना सकते हैं.

गाय या किसी भी दूसरे जानवर को बचाने में कोई धार्मिक एंगल ना होता तो शायद ये उतनी बड़ी खबर ना होती. अगर लोग सिर्फ गोरक्षा ही नहीं ‘पशुरक्षा’ के लिए भी सचेत होते, तब भी इसमें कोई दूसरा एंगल नहीं खोजा जा सकता था. सिर्फ ये बात होती कि एक जानवर की मदद की गई फिर चाहे उसका नेम, सरनेम कुछ भी हो.


ये स्टोरी निशांत ने की है.

 

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