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रेलवे की नौकरी के भरोसे न बैठें, रेलवे की जेबें खाली हैं!

अगर नौकरी के लिए रेलवे के भरोसे बैठे हैं, तो जाग जाइए. दुनिया की सबसे बड़ी नियोक्ताओं में से एक भारतीय रेलवे ने अगले कुछ बरस तक नई नौकरी देने को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं. रेलवे ऐसा कदम अपनी खाली जेबों के चलते कर सकता है. वैसे तो रेलवे पहले ही आर्थिक संकट से गुजर रहा था, लेकिन कोरोना ने इस संकट को और गहरा कर दिया. हालात इतने बुरे हैं कि रेलवे के कमाई-खर्चे का हिसाब-किताब रखने वाले वित्त आयुक्त ने पैसे बचाने के लिए चिट्ठी लिख डाली है.

वित्त आयुक्त ने कही बचत करने की बात

नौकरी कम करने की कवायद की शुरुआत रेलवे के वित्त आयुक्त की एक चिट्ठी से शुरू हुई है. वित्त आयुक्त ने 19 जून को यह चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में तफ्सील से बताया गया है कि कोरोना संकट के चलते रेलवे की कमाई में अभूतपूर्व कमी आई है, ऐसे में रेलवे में भर्ती पर लगाम लगाई जाए.

वित्त आयुक्त ने लिखा है कि लॉकडाइन की वजह से वित्त वर्ष 2019-20 के मुकाबले सामान की ढुलाई से होने वाली कमाई में अब तक 34 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. आपको बता दें कि रेलवे की 90 फीसदी कमाई सामान ढुलाई से ही होती है. इस कमाई से ही सरकार आम जनता को सस्ती रेल सेवा दे पाती है. यह भी बताया गया है कि रिजर्व टिकट से कमाई में 112 फीसदी और बिना रिजर्व यानी जनरल टिकट से कमाई में 90 फीसदी की कमी आई है.

नई वैकेंसी पर लटकी तलवार

वित्त आयुक्त ने हर जोन के जनरल मैनेजरों से कहा है कि वो पिछले दो साल में पैदा हुई नौकरियों का एक बार फिर से रिव्यू करें. उनमें से जो पद अब भी रिक्त हैं, उन पर भर्ती को रोककर उन्हें सरेंडर करें. चिट्ठी में वर्कशॉप में भी लोगों की संख्या को कम करने को कहा गया है. आयुक्त ने यह भी लिखा है-

‘जैसा कि सरकार का आदेश है कि रेलवे को पेंशन समेत अपने राजस्व खर्च खुद ही वहन करने होंगे. कोरोना संकट के चलते इस साल की कमाई पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में सभी जोन कर्मचारियों पर होने वाले खर्चों में कटौती करें. कॉन्ट्रैक्ट की समीक्षा, बिजली की बचत और प्रशासनिक तथा अन्य क्षेत्रों में खर्चों में कटौती करें.’

बता दें कि रेलवे में भर्ती के लिए रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड यानी आरआरबी बनाए गए हैं. देशभर में कुल 21 आरआरबी हैं. आरआरबी अपने-अपने जोन में खाली पदों के हिसाब से वैकेंसी निकालते हैं. परीक्षा कराते हैं और सफल कैंडिडेट को जोनल हेडक्वॉर्टर के हवाले कर देते हैं. भारतीय रेलवे में कुल 17 जोन और 73 डिवीजन हैं.

पहले भी कम होती गई हैं रेलवे में भर्तियां

रेलवे देशभर में 15 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरियां देता है. इस लिहाज से यह देश में सबसे बड़ा नौकरी प्रदाता संस्थान है. हालांकि पिछली सरकारों ने भी भारी-भरकम संस्थान में कटौती करने के कई उपाय किए हैं. फिर भी अमूमन हर साल चार-पांच लाख लोगों की नियुक्ति होती रही है. लेकिन कैग की रिपोर्ट ने रेलवे की चिंताएं ज्यादा बढ़ा दीं.

कैग की रिपोर्ट बताती है कि साल 2017-18 में भारतीय रेल को अपनी सेवाओं के बदले में 98.44 रुपए ख़र्च करके 100 रुपए मिले हैं. जबकि साल 2015-16 में रेलवे को 90.49 रुपए ख़र्च करके 100 रुपए की कमाई होती थी. जानकार कहते हैं कि रेलवे के इस हालात के लिए यात्री किराए में बरसों-बरस से न होने वाली बढ़ोतरी भी जिम्मेदार है. सरकारें जनता के गुस्से से बचने के लिए कई साल तक किराया नहीं बढ़ातीं, जिससे रेलवे पर लगातार बोझ बढ़ता गया है. इतना ही नहीं, फ्लैक्सी फेयर और प्राइवेट ट्रेन जैसी योजना का भी सरकार को बहुत फायदा नहीं हुआ है.

पिछले साल नौकरियां देने का वादा पूरा होना मुश्किल

सरकार पर रेलवे जैसे बड़े संस्थान में भर्ती करने का दबाव है. लेकिन इस हाल में पिछले साल तय किए गए भर्ती का टारगेट पूरा होना मुश्किल नजर आ रहा है. 2019 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि रेलवे में भर्ती का दूसरा चरण मई-जून 2020 में शुरू होगा. इसे जुलाई-अगस्त 2021 तक निपटा लिया जाएगा. इसमें रिटायरमेंट से रिक्त हुए 99,000 पद भी शामिल होंगे. रेलवे के वित्त आयुक्त की लिखी चिट्ठी को देखते हुए इन वैकेंसी का भरा जाना मुश्किल ही नजर आ रहा है.


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