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तबलीगी जमात मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कायदे से 'सुना' दिया

सुप्रीम कोर्ट ने तबलीगी जमात से जुड़े केस में केंद्र सरकार को कड़ी फटाकर लगाई है. चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने कहा कि आप अदालत के साथ ऐसा अपमानजनक बर्ताव नहीं कर सकते, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि सरकार का कदम निहायती निर्लज्ज है. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का ये गुस्सा केंद्र की ओर से दाखिल एक हलफनामे पर सामने आया. ये एफिडेविट तबलीगी जमात से जुड़ा था. वही जमात, जिसके निजामुद्दीन मरकज में हुए सम्मेलन के बाद देश के कई इलाकों में कोरोना फैलने के आरोप लगाए गए थे.

क्या है पूरा मामला

मार्च महीने में जब कोरोना महामारी फैलने की शुरुआती खबरें सामने आनी शुरू हुई थीं, तब तबलीगी जमात की ओर से दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में सम्मेलन का आयोजन किया गया था. इसमें देश-विदेश से हजारों लोग शामिल हुए थे. कोरोना की पाबंदियों के बीच मरकज से 2600 से ज्यादा लोगों को निकाला गया था. इनमें से बहुत से लोग कोरोना पॉजिटिव मिले. मरकज से तमाम लोग चोरी-छिपे देश के कई हिस्सों में चले गए. उन्हें ढूंढ-ढूंढकर पकड़ा गया. उस दौरान कई नेताओं की ओर से और मीडिया खबरों में तबलीगी जमात पर कोरोना फैलाने के आरोप लगाए गए.

मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद और कई संगठनों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. आरोप लगाया कि तबलीगी जमात के कार्यक्रम को लेकर मीडिया का एक वर्ग फर्जी खबरें चला रहा था. कोरोना महामारी के बीच जमात के नाम पर सांप्रदायिक नफरत फैला रहा था. याचिका में मांग की गई कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जमात के आयोजन के बारे में ‘झूठी खबरों’ का प्रसारण रोकने का केंद्र को निर्देश दिया जाए. इस पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था.

सरकार की ओर से हलफनामा (Affidavit) दायर किया गया. हलफनामे में मीडिया की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रेस को जमात के मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने से नहीं रोका जा सकता था. केंद्र के मुताबिक, मरकज के बारे में अधिकांश रिपोर्ट सही थीं. केंद्र ने सुझाव दिया कि इस मामले को न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBSA) के पास भेज दिया जाना चाहिए.

Tabligi
तबलीगी जमात पर लगे थे गंभीर आरोप

चीफ जस्टिस ने केंद्र से क्या कहा

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी. रामासुब्रह्मण्यम की बेंच ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को इस मामले में सुनवाई की. सरकार के हलफनामे को ‘जवाब देने से बचने वाला’ और ‘निर्लज्ज’ करार दिया. कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कुछ टीवी चैनलों पर जो आरोप लगाए थे, उसका इसमें कोई जिक्र नहीं है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा-

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव की बजाय अतिरिक्त सचिव ने यह हलफनामा दाखिल किया है. इसमें जमात के मुद्दे पर अनावश्यक और बेतुकी बातें कही गई हैं. आप कोर्ट के साथ इस तरह से व्यवहार नहीं कर सकते. यह बहुत अपमानजनक है. इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

सबसे ज्यादा दुरुपयोग इसी अधिकार का

सुनवाई के दौरान जमात की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि याचिकाकर्ता बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी का हनन करने की कोशिश कर रहे हैं. इस पर चीफ जस्टिस ने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा-

आप लोगों (सरकार) की तरह हर किसी को बोलने का अधिकार है. वैसे भी हाल के दिनों में बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस अधिकार का सबसे अधिक दुरुपयोग हुआ है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को दोबारा हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है. प्रेरित रिपोर्टिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है. अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.

(ये कॉपी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे बृज द्विवेदी ने लिखी है)


विडियो: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- तबलीगी के मामले को बार-बार उठाते हुए बुरा लगता है

 

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