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बीच सुनवाई चीफ जस्टिस बोले- जरूरत पड़ी तो खुद श्रीनगर जाऊंगा

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जम्मू-कश्मीर से जुड़ी आठ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को सुनवाई की. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने मामले की सुनवाई की. इन याचिकाओं में आर्टिकल 370 खत्म करने, जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की वैधता और वहां लगाई गई पाबंदियों को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में जल्द से जल्द हालात सामान्य किए जाएं.

कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थिति सामान्य की जाए. वहीं एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए CJI रंजन गोगोई ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वो खुद श्रीनगर जाएंगे. कोर्ट ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद को भी अपने राज्य जाने की अनुमति दी.

सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर सुनवाई की. उन्होंने याचिका में कहा था कि वह श्रीनगर से अपने अखबार को प्रकाशित नहीं कर पा रही हैं. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कश्मीर से निकलने वाले अखबार प्रकाशित हो रहे हैं. सरकार पत्रकारों की सहायता कर रही है. प्रतिबंधित इलाकों में जाने के लिए मीडिया को पास दिए गए हैं. पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराई गई है. दूरदर्शन और अन्य प्राइवेट चैनल काम कर रहे हैं.

ये 5 अगस्त की तस्वीर है. जिस दिन भारत सरकार ने आर्टिकल 370 को निष्क्रिय करने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान किया. कश्मीर में तनाव बढ़ने और हिंसा भड़कने के मद्देनज़र इंटरनेट और फोन कनेक्शन बंद कर दिए गए (फोटो: रॉयटर्स)
ये 5 अगस्त की तस्वीर है. जिस दिन भारत सरकार ने आर्टिकल 370 को निष्क्रिय करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में बांटने का ऐलान किया. कश्मीर में तनाव बढ़ने और हिंसा भड़कने के मद्देनज़र इंटरनेट और फोन कनेक्शन बंद कर दिए गए (फोटो: रॉयटर्स)

5 अगस्त के बाद कश्मीर में नहीं चली एक भी गोली- सरकार

सुप्रीम कोर्ट को केंद्र की ओर से बताया गया कि 5 अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है. एक भी शख्स की जान नहीं गई है. कोर्ट को बताया गया कि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41,866 लोग जान गंवा चुके हैं, 71,038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं और सुरक्षाबलों के 15,292 जवानों को जान गंवानी पड़ी. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद भी राज्य सरकार ने 3 महीने के लिए इंटरनेट और फोन सुविधाओं को बंद कर दिया था. इस समय इंटरनेट और फोन बंद करने का फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया.

श्रीनगर जा सकते हैं CJI

CJI रंजन गोगोई ने कहा कि वह खुद श्रीनगर जाएंगे. और देखेंगे कि हाईकोर्ट काम कर रहा है कि नहीं. दरअसल, बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली ने जम्मू-कश्मीर में 18 साल से कम उम्र के बच्चों की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया था. उन्होंने उन केसों की जानकारी मांगी जिन्हें हाईकोर्ट की कमिटी देख रही है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इसके लिए जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट जाइए. इस पर इनाक्षी के वकील हुसेफा अहमदी ने कहा कि ऐसा करना मुश्किल है. इस समय हाईकोर्ट आम आदमी की पहुंच से दूर है. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर लोग हाईकोर्ट में अपनी अपील नहीं कर पा रहे हैं तो यह गंभीर स्थिति है. चीफ जस्टिस ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मांगी. पूछा है कि हाईकोर्ट अपीलकर्ताओं की पहुंच में है या नहीं? सीजेआई ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है कि लोग कोर्ट से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. अगर जरूरत पड़ी तो मैं खुद श्रीनगर जाउंगा. हालांकि गोगोई ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट इससे उलट मिली तो परिणाम के लिए तैयार रहें.

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई.

 

फारूख अब्दुल्ला को हिरासत में लेने पर केंद्र से मांगा जवाब

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री हैं फारूख अब्दुल्ला. हिरासत में हैं. अब्दुल्ला को हिरासत में लिए जाने पर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. इस मामले में तमिलनाडु के नेता और एमडीएमके के चीफ वाइको ने याचिका दाखिल की थी. याचिका में कहा गया कि फारूक अब्दुल्ला की नजरबंदी पर केंद्र सरकार अलग-अलग तर्क दे रही है. सरकार की ओर से कहा गया है कि पब्लिक सेफ्टी ऐक्ट के तहत नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता को नजरबंद किया गया है. इसके तहत 2 साल तक किसी शख्स को बिना सुनवाई के हिरासत में रखा जा सकता है.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री हैं फारूख अब्दुल्ला. हिरासत में हैं.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री हैं फारूख अब्दुल्ला. हिरासत में हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने आने-जाने और स्वतंत्रता की बात करते हुए केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है. इस पर सीजेआई रंजन गोगोई ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘क्या वो हिरासत में हैं?’ सॉलिसिटर जनरल ने कहा हम सरकार से निर्देश लेंगे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर दिया. केंद्र ने इसका विरोध किया और कहा कि नोटिस की जरूरत नहीं है. इस मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दे दी है. सुप्रीम कोर्ट में गुलाम नबी आजाद के वकील ने कहा था कि हमें अपने लोगों से मिलने श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जाना है. आजाद ने कहा कि हम वहां राजनीतिक रैली करने नहीं जा रहे हैं. हमें तीन बार एयरपोर्ट से वापस कर दिया गया. हमें अपने गृह जिले में भी नहीं जाने दिया गया. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को भी अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर वापस जाने की इजाजत दे दी.


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