Submit your post

Follow Us

30 साल आर्मी में रहने वाले को विदेशी बताकर जेल भेजा, तो वह बस रोए और खूब रोए

5
शेयर्स

असम में इन दिनों नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस यानी NRC बनाने का काम चल रहा है. ये रजिस्टर इसलिए बनाया जा रहा है ताकि असम में रह रहे ऐसे विदेशी लोगों का पता लगाया जा सके जो मूल रूप से राज्य के बाहर के हैं. इसके लिए एक तारीख तय की गई है. ये तारीख है 25 मार्च, 1971. ये तारीख असम के सिटिजनशिप एक्ट के कटऑफ की तारीख है. मतलब ये कि असम के निवासियों को ये सबूत देना है कि वे 25 मार्च, 1971 के पहले से राज्य के निवासी हैं और जन्म से भारतीय नागरिक हैं.

लेकिन भारतीय सेना के पूर्व सूबेदार और करगिल युद्ध में शामिल हो चुके मोहम्मद सनाउल्लाह ये सबूत नहीं दे पाए. लिहाजा 29 मई, 2019 की शाम को उन्हें गिरफ्तार कर असम के गोलपारा के हिरासत शिविर में बंद कर दिया गया. 8 जून को गुवाहाटी हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. रिहा होने के बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात की. मोहम्मद सनाउल्लाह ने बताया:

जेल के गेट से अंदर जाते हुए मैं बहुत रोया, बहुत रोया. मैंने खुद से पूछा कि तीन दशकों तक अपनी मातृभूमि की सेवा करने के बाद मुझसे कौन सा ऐसा पाप हो गया, जिसकी वजह से मुझे एक विदेशी बताकर हिरासत में रखा जा रहा है.

52 साल के सनाउल्लाह पहले आर्मी में थे. वो करगिल की लड़ाई में भी शामिल हुए थे. 2014 में उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से पदक भी मिल चुका है. आर्मी से रिटायर होने के बाद वो असम सीमा पुलिस में सब-इंस्पेक्टर भी रहे. उसके बाद वो मैकेनिकल इंजीनियर विभाग में सूबेदार बन गए थे. अगस्त 2017 में वो रिटायर हुए थे. हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद सनाउल्लाह ने कहा:

मैंने आर्मी की 30 सालों तक सेवा की. मेरी पोस्टिंग मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, असम और मणिपुर जैसे राज्यों में हुईं. मैंने सीमा पर अपने देश की रक्षा की है और अपने देश से बेहद प्यार करता हूं. मैं एक भारतीय हूं और मुझे विश्वास है कि न्याय ज़रूर मिलेगा. रिटायरमेंट के बाद मैं ऐसे मौके तलाश कर रहा था जिसमें मैं अपने राज्य और देश की सेवा कर सकूं. मेरा चयन बॉर्डर विंग में हो गया और मैंने नौकरी जॉइन कर ली. जिन अधिकारियों ने मुझे गिरफ्तार किया, वह मेरे सहकर्मी थे. वे न्यायाधिकरण के आदेश के बाद जरूरी प्रक्रिया का पालन कर रहे थे.

हिरासत में लिए जाने वाले दिन की बात बताते हुए सनाउल्लाह ने कहा:

28 मई की शाम को मुझे उत्तरी गुवाहाटी पुलिस स्टेशन के डीएसपी ने बुलाया था. मुझे लग गया था  ये मेरी हिरासत से जुड़ा हो सकता है. स्टेशन पहुंचने के बाद मुझे पूरी रात बैठे रहना पड़ा, वहां पर सोने तक के लिए कोई जगह नहीं थी. अगले दिन शाम 7 बजे, मैं गोलपारा के हिरासत शिविर में पहुंचा. जिस जेल में मुझे रखा गया वहां करीब 40 लोग थे. उन्होंने मुझे दो कंबल, एक मच्छरदानी और एक प्लेट-ग्लास दिए गए.

सनाउल्लाह ने जेल के बारे में बात करते हुए बताया :

जब मैंने जेल में अपने साथियों से बात की तो मेरा दिल टूट गया. अधिकतर लोग कभी स्कूल भी नहीं गए थे और बहुत गरीब थे. कुछ लोग तो वहां 8-9 साल हिरासत में बिता चुके हैं. मैं नालबारी जिले के एक 65 वर्षीय शख्स से भी मिला जो नौ सालों से जेल में बंद है. लोग मुझे बता रहे थे कि नाम में स्पेलिंग की गलती की वजह से या दस्तावेज में उम्र में हेर-फेर की वजह से उन्हें ‘विदेशी’ घोषित कर दिया गया.

दरअसल, साल 2008 में सनाउल्लाह के संदिग्ध अवैध विदेशी होने की जांच के बाद बॉर्डर विंग ने उनके खिलाफ विदेशी न्यायाधिकरण में रिफरेंस केस दर्ज करा दिया. 23 मई 2019 को सनाउल्लाह केस हार गए, जिसके बाद उन्हें 29 मई को गोलपारा जिले के हिरासत शिविर में ले जाया गया. असम में 100 के करीब ऐसी संस्था हैं जो तय करती हैं कि ‘फॉरेनर्स ऐक्ट 1946’ के तहत कोई व्यक्ति विदेशी है या नहीं. इसी संस्था के सामने सनाउल्लाह खुद को भारत का नहीं साबित कर पाए थे. जिसके बाद उन्हें गोलपारा के हिरासत कैंप भेज दिया गया था.

सनाउल्लाह के खिलाफ ‘रिफरेंस’ जारी करने का आधार असम पुलिस की बॉर्डर विंग के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर चंद्रमाल दास की जांच रिपोर्ट थी. हालांकि, इस रिपोर्ट के तीन गवाह अमजद अली, मोहम्मद कुरान अली और मोहम्मद सोबाहन अली ने पिछले सप्ताह दास के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई थी और इसे मनगढ़ंत बताया था.

असम में कई ऐसे हिरासत शिविर हैं जिनमें ‘अवैध विदेशी’ बंद थे. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने शर्त के साथ रिहाई की अनुमति दी थी. सनाउल्लाह ने कहा कि वे अगर काम करते हैं तो शायद वह रोजाना 200 रुपए तक कमा सकते हैं लेकिन इतने पैसों से वे अपने परिवार का खर्च कैसे चला पाएंगे. गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सनाउल्लाह के खिलाफ ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाले मामले में केंद्र सरकार, असम सरकार और NRC अधिकारियों, चुनाव आयोग और एक पूर्व असम पुलिस अधिकारी चंद्रमाल दास को नोटिस जारी किया है.


पायल तड़वी केस में कोर्ट का फैसला आया तो तीनों आरोपी डॉक्टर्स रोने लगीं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
Retire army officer mohammad sanaullah declared illegal foreigner in Assam tells his Jail Story

टॉप खबर

राजीव गांधी के हत्यारे ने संजय दत्त की मुश्किलें बढ़ा दी हैं

जेल में बंद पेरारिवलन ने संजय दत्त से जुड़ी बहुत सी जानकारी इकट्ठी की है.

कठुआ केस के छह दोषियों को क्या सज़ा मिली?

अदालत ने सात में से छह आरोपियों को दोषी माना था. मास्टरमाइंड सांजी राम का बेटा विशाल बरी हो गया.

कठुआ केस में फैसला आ गया है, एक बरी, छह दोषी करार

दोषियों में तीन पुलिसवाले भी शामिल हैं.

पांच साल की बच्ची से रेप किया और फिर ईंटों से कूंचकर मार डाला

उज्जैन में अलीगढ़ जैसा कांड, पड़ोसी ही निकला हत्यारा...

अफगानिस्तान किन गलतियों से श्रीलंका से जीता-जिताया मैच हार गया?

मलिंगा का तो जोड़ नहीं.

क्या चुनावी नतीजे आने के 10 दिनों के अंदर यूपी में 28 यादवों की हत्या हुई है?

28 नामों की एक लिस्ट वायरल हो रही है. लेकिन सच क्या है?

मायावती ने ऐसा क्या कह दिया कि फिलहाल गठबंधन को टूटा मान लेना चाहिए

प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने गठबंधन तोड़ने का सीधा ऐलान तो नहीं किया, लेकिन बहुत कुछ कह गयीं.

चुनाव नतीजे आए दस दिन हुए नहीं, मायावती ने गठबंधन पर सवाल उठा दिए

वो भी तब जब मायावती के पास जीरो से बढ़कर दस सांसद हो गए हैं

अरविंद केजरीवाल ने चुनाव में बंपर वोट खींचने वाला ऐलान कर दिया है

वो ऐसी स्कीम लेकर आए हैं कि दिल्ली-NCR की महिलाएं खुश हो गईं.

आखिर क्या सोचकर मोदी ने UP के इन नेताओं को कैबिनेट में जगह दी है?

इनमें कुछ से पिछली सरकार के दौरान बीच में ही मंत्रालय छीन लिया गया था.