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राम मंदिर ट्रस्ट : ऐलान होते ही इन तीन लोगों ने अड़ंगा लगा दिया

राम मंदिर. सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट. नरेंद्र मोदी ने ट्रस्ट का ऐलान कर दिया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र. ट्रस्ट में बैठने वालों की एक फौरी सूची भी आ चुकी है. लेकिन इस सूची के आने के साथ ही शुरू हुआ है जातियों को लेकर बवाल.

राम मंदिर आंदोलन के दो प्रमुख नेताओं ने खुलकर कहा है कि ट्रस्ट में किसी पिछड़ी जाति के नेता का न होना बड़े सवाल खड़े करता है. कौन-से दो नेताओं ने? BJP नेता उमा भारती, और उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह.

जिस समय बाबरी मस्जिद गिराई गयी, उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. उन पर विध्वंस के केस का मुक़दमा चल रहा है. कहते हैं कि उन्होंने पुलिस और सुरक्षाबलों को कारसेवकों पर कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे.
जिस समय बाबरी मस्जिद गिराई गयी, उस समय कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. उन पर विध्वंस का केस का चल रहा है. कहते हैं कि उन्होंने पुलिस और सुरक्षाबलों को कारसेवकों पर कार्रवाई न करने के निर्देश दिए थे.

केंद्र सरकार ने ट्रस्ट में जब पटना से कामेश्वर चौपाल को दलित सदस्य की तरह शामिल किया गया, उस समय BJP नेता और बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय यूपी के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने ट्रस्ट में ओबीसी से एक सदस्य शामिल करने की बात कही. कहा कि ओबीसी की संख्या सबसे ज्यादा है. उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के लिए अमित शाह और नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया. ओबीसी समुदाय को शामिल करने की बात पर उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियां भी दलितों जितनी ही रामभक्त हैं.

कल्याण सिंह की बात का उमा भारती ने भी समर्थन किया है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय उमा मौके पर मौजूद थीं. बाद में मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्रालय मिला. सांसद बनीं, सो अलग. (फोटो क्रेडिट: reuters)
कल्याण सिंह की बात का उमा भारती ने भी समर्थन किया है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय उमा मौके पर मौजूद थीं. बाद में मोदी सरकार में जगह भी मिली. (फोटो क्रेडिट: Reuters)

कल्याण सिंह की बात को समर्थन मिला उमा भारती का. भोपाल में उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,

“इस मसले पर मैं कल्याण सिंह जी के साथ हूं, क्योंकि मुझ जैसे कई सारे ओबीसी अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की पहली कतार में खड़े थे. ये बहुत ज़रूरी मसला है, क्योंकि उस समय बहुत सारे ओबीसी समाजवादियों से प्रभावित थे.

इतना बवाल कैसे?

केंद्र सरकार द्वारा जारी लिस्ट के सामने आने के बाद ही ऐसा हुआ. इस 15 सदस्यीय ट्रस्ट में कुल 9 सदस्यों के नामों की घोषणा हो चुकी है. पहली अर्हता कि ट्रस्ट का सदस्य होने के लिए हिन्दू होना ज़रूरी है. के पराशरण, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज, जगद्गुरु माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ महाराज, युगपुरुष परमानंद महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ. अनिल मिश्र, कामेश्वर चौपाल, महंत धीरेंद्र दास अगड़ी जातियों से आते हैं. उनके अलावा दलित सदस्य के रूप में कामेश्वर चौपाल का नाम सामने आता है. यानी अभी 9 नामित सदस्यों में 8 बनाम 1 का हिसाब बन रहा है.

कामेश्वर चौपाल लंबे समय से राम मंदिर मामले से जुड़े रहे. संघ के कार्यकर्ता रहे. और अब ट्रस्ट में शामिल. (Photo Twitter)
कामेश्वर चौपाल लंबे समय से राम मंदिर मामले से जुड़े रहे. संघ के कार्यकर्ता रहे और अब ट्रस्ट में शामिल. (Photo Twitter)

इन सभी लोगों के अलावा अयोध्या के कलेक्टर, केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि जो आईएएस होगा, राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर एक अधिकारी, एक राम मंदिर विकास और प्रशासन से जुड़े मामलों के चेयरमैन और दो और सदस्य होंगे, जिन्हें बोर्ड मनोनीत करेगा.

और भी है बवाल

ट्रस्ट का अनाउंसमेंट होने के 24 घंटे के अन्दर ही शुरू हुआ था बवाल. विश्व हिन्दू परिषद् से पोषित श्रीराम जन्मभूमि न्यास के नृत्यगोपाल दास का नाम इसमें शामिल नहीं किया गया. इसे लम्बे समय से राम मंदिर आंदोलन को हवा दे रहे विश्व हिन्दू परिषद् की ट्रस्ट में गिरती साख की तरह देखा गया. नृत्यगोपाल दास नाराज़ हो गए.

रामजन्मभूमि न्यास के मुखिया नृत्य गोपाल दास, जिन्हें इस बार ट्रस्ट में जगह नहीं मिली. बवाल हुआ. फिर आया अमित शाह का फोन. मामला सेट.
राम जन्मभूमि न्यास के मुखिया नृत्य गोपाल दास, जिन्हें इस बार ट्रस्ट में जगह नहीं मिली. बवाल हुआ. फिर आया अमित शाह का फोन. मामला सेट.

ऐसा इसलिए भी, क्योंकि जब ट्रस्ट के अनाउंसमेंट की सुगबुगाहट ही हो रही थी, तो स्थानीय स्तर पर ये कयास लगाए जा रहे थे कि विहिप को कमान दी जाएगी. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष को मिलेगा ट्रस्ट के अध्यक्ष का पद.

बीजेपी ने उन्हें मनाने की कोशिश की. अयोध्या से विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और अयोध्या महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा को मणि रामदास मंदिर भेजा. मणि रामदास मंदिर यानी नृत्य गोपाल दास का ठिकाना. संतों ने नेताओं को मंदिर में घुसने नहीं दिया. इसके बाद गुरुवार यानी 6 जनवरी को दोपहर 3 बजे संतों की आपात बैठक बुलाई गयी. कहा कि शाम 5 बजे पत्रकारों से बात करेंगे.

इसके बाद गृह मंत्री यानी अमित शाह के ऑफिस से फोन आया. प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल कर दी गयी. महंत कमलनयन नाथ – यानी नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी ने जानकारी दी. विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने ही महंत और अमित शाह के बीच बात करने की व्यवस्था की. अमित शाह का वादा आया. कहा कि ट्रस्ट में अभी भी पद खाली हैं. महंतजी को उसमें शामिल किया जाएगा. यानी महंतजी मान गए. और प्रेस कॉन्फ्रेंस कैंसिल.


लल्लनटॉप वीडियो : पीएम मोदी ने लोकसभा में राम मंदिर वाले ट्रस्ट से जुड़ा जो ऐलान किया उसकी खासियत शाह ने बताई

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