Submit your post

Follow Us

BJP ने किसानों को 'मवाली' बता दिया, राकेश टिकैत ने दिया ये जवाब

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहा किसानों का आंदोलन (Farmer Protest) एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है. गुरुवार 22 जुलाई से दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 200 किसानों को प्रदर्शन करने की इज़ाजत मिल गई है. इस प्रदर्शन को किसान संसद का नाम दिया गया है. दिल्ली पुलिस ने किसानों को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन करने की इजाजत दी है. इसके पहले दिन गुरुवार को राकेश टिकैत की अगुआई में करीब 200 किसान सिंघु बॉर्डर से चलकर जंतर मंतर पहुंचे. यहां आकर किसानों ने कृषि कानून वापस लेने की अपनी मांग दोहराई. इस मुद्दे को लेकर संसद में भी प्रदर्शन, नारेबाजी हुई. वहीं, सरकार की और प्रदर्शन कर रहे किसानों को एक तरफ बातचीत का न्योता दिया गया, वहीं दूसरी तरफ तीखा हमला भी किया गया.

किसानों ने क्या कहा?

किसान नेता राकेश टिकैत ने जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत दिए जाने पर कहा कि आठ महीने बाद सरकार ने हमें किसान माना है. किसान खेती करना भी जानता है और संसद चलाना भी जानता है. संसद में किसानों की आवाज दबाई जा रही है. जो सांसद किसानों की आवाज नहीं उठाएगा, हम उसका विरोध करेंगे. ‘किसान संसद’ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि संसद किसानों की बात नहीं सुन रही है. इसीलिए सभी सांसदों को हमने चिट्ठी लिखी है कि हमारे वोट से जीते हैं तो कुछ ऐसा करें कि हम वोट देते समय याद रखें. ईमानदार हैं तो हमारे सवाल उठाएं.

योगेंद्र यादव ने कहा कि यूके की संसद में किसानों के मुद्दे पर बहस हो रही है, लेकिन हमारी संसद हमारे मसलों पर बात करने को तैयार नहीं. हन्नान मोल्लाह ने बताया कि जंतर मंतर पर किसान संसद 13 अगस्त तक लगातार चलेगी. प्रतिदिन 200 किसान सिंघु बॉर्डर से आएंगे और किसानों के मुद्दे पर चर्चा होगी. गुरुवार को 3 कानूनों के पहले कानून APMC पर चर्चा हुई. इसके बाद संसद से अपील करेंगे कि ‘किसान संसद’ की बात मानकर कानून को खारिज किया जाए.

Farmerpolice
प्रदर्शन से पहले एक किसान ने पुलिसकर्मी के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद भी दिया. फोटो पीटीआई

संसद के साथ चलेगी किसान संसद

किसान नेता राकेश टिकैत गुरुवार की सुबह गाजीपुर बॉर्डर से सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हुए. राकेश टिकैत ने कहा कि हमारा संघर्ष पिछले 8 महीने से चल रहा है. हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बातों को सरकार के सामने रखना चाहते हैं. जब तक संसद का सत्र चलेगा, हम लोग जंतर-मंतर पर ही अपनी किसान संसद चलाएंगे.

जब राकेश टिकैत से 26 जनवरी को किसान यात्रा के दौरान लाल किले पर हुए हंगामे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि

“जंतर मंतर से संसद कुछ ही दूरी पर है. हम जंतर-मंतर पर अपना खुद का संसद सत्र आयोजित करेंगे. हमें हंगामे से क्या करना है? हम कोई शरारती तत्व हैं क्या?”

किसान नेताओं ने अपनी आगे की योजना भी बताई. किसान नेता प्रेम सिंह भांगू ने कहा कि

“हमारा अगला लक्ष्य यूपी है. 5 सितंबर से इसकी शुरुआत होगी. हम बीजेपी को अलग-थलग करना चाहते हैं. तीनों कृषि कानूनों को वापस करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.”

Farmerprotest
जंतर मंतर पर किसान संसद के दौरान MSP को लेकर भी प्रदर्शन किया गया. फोटो पीटीआई

संसद में भी किसानों का मुद्दा गरमाया रहा. मानसून सत्र के तीसरे दिन विपक्ष की नारेबाजी की बीच भारी हंगामा हुआ. लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों ने काले कानून वापस लो के नारे लगाए. हाथों में तख्तियां लेकर विरोध जताया. इस पर 10 मिनट बाद ही सदन 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा. राज्यसभा में भी हंगामे और शोरगुल के कारण सदन की कार्यवाही टालनी पड़ी. उसके बाद 12 बजे सदन बैठा, लेकिन हंगामा नहीं रुका. उसके बाद कार्यवाही पहले 2 बजे तक, फिर दोनों सदनों में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई. इससे पहले राहुल गांधी की अगुआई में पार्टी सांसदों नें नए कृषि कानूनों के विरोध में संसद परिसर में प्रदर्शन किया.

कृषि मंत्री बोले- हम चर्चा को तैयार

एक तरफ किसान जंतर-मंतर पर किसान संसद का आयोजन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने फिर से बातचीत करने की पेशकश की है. कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि

“देश ने देखा है कि कृषि कानूनों का कितना फायदा देश को मिला है. ये कानून किसानों के हक में हैं. हमने इन कानूनों को लेकर पहले भी चर्चा की है. अगर किसी की कोई चिंता है तो वह उसे बिंदुवार तरीके से रख सकता है. हम चर्चा करने को तैयार हैं.”

नरेंद्र सिंह तोमर एक वक्त शिवराज के करीबी माने जाते थे.
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 7 दौर तक बातचीत होने के बाद फिर कहा है कि वो किसान कानूनों पर चर्चा को तैयार हैं.

लेखी ने कहा, ये लोग किसान नहीं हैं

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बातें कहीं. विदेश राज्य मंत्री लेखी ने बीजेपी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा कि आंदोलन के नाम पर जंतर मंतर पर जो जमा हुए हैं, वो किसान नहीं हैं. ये लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम कर रहे हैं, जिसका किसानों से कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा –

“आप बार-बाप उन्हें किसान मत कहिए. ये लोग मवाली हैं. 26 जनवरी को जो हुआ था, वो आपको याद नहीं है क्या? ये लोग आढ़ती हैं, जो अपने स्वार्थ के लिए यहां इकट्ठा हुए हैं. ये दूसरों के लिए नरैटिव सेट कर रहे हैं. एक सवाल के जवाब में लेखी ने कहा कि इन लोगों को किसान कहना मीडिया को बंद कर देना चाहिए. जो देश के किसान हैं, उनके पास इतना समय नहीं कि जंतर मंतर पर आकर बैठें. दिल्ली की सीमाओं पर महीनों बैठे रहें.”

मवाली वाली बात पर बाद में राकेश टिकैत ने भी जवाब दिया. कहा-

“मवाली वो हैं, जो कुछ नहीं करते. हम मवाली नहीं, अन्नदाता हैं.”

किसानों के हल्लाबोल के बीच दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के टिकरी, सिंघु, गाजीपुर बॉर्डरों और जंतर-मंतर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई. रास्ते में कुछ जगहों पर राकेश टिकैत और किसानों को पुलिस ने रोका, लेकिन चेकिंग करने के बाद आगे जाने दिया. इस पर तंज कसते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि मैं किसी दूसरे देश जा रहा हूं.

किसानों ने संसद के मानसून सत्र की तारीख की घोषणा के बाद ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान कर दिया था. इसे लेकर दिल्ली पुलिस के साथ उनकी चर्चा हुई. सहमति बनने पर 200 किसानों को प्रदर्शन की इजाजत दी गई है. ये किसान रोज 5 बसों में जंतर मंतर पहुंचेंगे. शाम 5 बजे तक वहां पर रुकेंगे. शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे. हर किसान के गले में आईडी कार्ड होगा, हर पांच लोगों की टोली के साथ एक प्रमुख तैनात रहेगा.

दिल्ली पुलिस ने इस पूरे प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. सीसीटीवी से नज़र रखी जा रही है. जंतर-मंतर पर भारी संख्या में महिला और पुरुष सुरक्षाबल तैनात हैं. जंतर-मंतर की तरफ के रूट पर जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं. सड़कों पर कीलें लगाकर बैरियर भी बनाए हैं. यह इंतजाम इसलिए किए गए हैं कि प्रदर्शनकारी बेकाबू न हो पाएं. 26 जनवरी 2021 को ट्रैक्टर रैली के दौरान बेकाबू भीड़ लाल किले तक पहुंच गई थी. जमकर हंगामा हुआ था.


वीडियो – पंजाब में बिजली संकट के खिलाफ किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

संसद: TMC सांसद ने मंत्री के हाथ से पेपर छीनकर फाड़े, लेकिन हरदीप पुरी पर क्या आरोप लगे?

संसद: TMC सांसद ने मंत्री के हाथ से पेपर छीनकर फाड़े, लेकिन हरदीप पुरी पर क्या आरोप लगे?

TMC सांसद पर क्या कार्रवाई की तैयारी कर रही सरकार?

बंगाल: क्या सुवेंदु अधिकारी ने जाने-अनजाने फोन टैपिंग का सच बता दिया है?

बंगाल: क्या सुवेंदु अधिकारी ने जाने-अनजाने फोन टैपिंग का सच बता दिया है?

बंगाल के IPS अधिकारी को चेतावनी देने के चक्कर में सुवेंदु अधिकारी बड़ी बात कह गए.

मुंबई में बारिश से बड़ा हादसा, चेंबूर में दीवार गिरने से 17 की मौत

मुंबई में बारिश से बड़ा हादसा, चेंबूर में दीवार गिरने से 17 की मौत

विक्रोली में भी 6 की मौत, पीएम ने दुख जताया, मुआवजे की घोषणा की.

टी-सीरीज़ वाले भूषण कुमार पर रेप का आरोप लगा, मुंबई में रिपोर्ट दर्ज

टी-सीरीज़ वाले भूषण कुमार पर रेप का आरोप लगा, मुंबई में रिपोर्ट दर्ज

मुंबई के डीएन थाने में तीस साल की महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई.

अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या, तालिबान ने किया था हमला

अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या, तालिबान ने किया था हमला

दानिश सिद्दीकी अपनी तस्वीरों के लिए फेमस थे, 2018 में Pulitzer अवार्ड भी मिला था.

MP के विदिशा में 30 से ज्यादा लोग कुएं में गिरे, 4 की मौत, 13 लापता, 19 बचाए गए

MP के विदिशा में 30 से ज्यादा लोग कुएं में गिरे, 4 की मौत, 13 लापता, 19 बचाए गए

बच्चा कुएं में गिरा, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण कुएं की छत पर चढ़ गए थे.

'नदिया के पार' जैसी बड़ी फ़िल्मों में काम कर चुकीं एक्ट्रेस सविता बजाज की हताशा,

'नदिया के पार' जैसी बड़ी फ़िल्मों में काम कर चुकीं एक्ट्रेस सविता बजाज की हताशा, "मेरा गला घोंट दो"

इलाज के लिए पैसे नहीं हैं.

PM मोदी ने वाराणसी में जिस रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया, वो है क्या?

PM मोदी ने वाराणसी में जिस रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया, वो है क्या?

योगी सरकार के लिए क्या बोले PM?

कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, लेकिन यूपी सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं?

कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, लेकिन यूपी सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं?

योगी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के बयान से तो कुछ ऐसा ही लग रहा.

पीएम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र बीजेपी में उथल-पुथल मच गई?

पीएम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र बीजेपी में उथल-पुथल मच गई?

क्या पंकजा मुंडे की नाराजगी महाराष्ट्र बीजेपी को भारी पड़ेगी?