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महाराष्ट्र में नहीं बनी शिवसेना-एनसीपी की सरकार, अब लगेगा राष्ट्रपति शासन

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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगेगा. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की थी. उनकी सिफारिश को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. सूत्रों के हवाले से ये खबर आ रही है. 24 अक्टूबर को नतीजे आने के बाद से राज्य में किसी की सरकार नहीं बन पाई थी. बीजेपी और शिवसेना ने एक साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन सीएम पोस्ट को लेकर दोनों के बीच बात बिगड़ गई और दोनों पार्टियों की राह अलग हो गई.

इसके बाद राज्यपाल ने 9 नवंबर को सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. नंबर न होने की वजह से बीजेपी ने सरकार बनाने से इनकार कर दिया. 10 नवंबर की शाम गवर्नर ने शिवसेना को सरकार बनाने का न्योता भेजा. लेकिन शिवसेना और समय चाहती थी, क्योंकि एनसीपी और कांग्रेस की ओर से समर्थन का लेटर नहीं मिला था. लेकिन राज्यपाल ने और समय देने से इनकार कर दिया. इसके बाद सीटों के लिहाज से तीसरी बड़ी पार्टी एनसीपी को राज्यपाल ने न्योता दिया. 12 नवंबर की शाम साढ़े आठ बजे तक का एनसीपी के पास सरकार बनाने का वक्त था.  

ये समय बीतता उससे पहले ही राज्यपाल का एक ट्वीट आया. इसमें राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई थी. इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी. जैसे ही खबर आई कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश की, शिवसेना का बयान आ गया. सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही. सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अहमद पटेल से बातचीत की. बताया जा रहा है कि सिब्बल शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर सकते हैं.

लेकिन इससे पहले भी बहुत कुछ हुआ

एनसीपी के नेता और शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने 12 नवंबर की सुबह मीडिया से बात की. कहा-

”एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. कोई भी फैसला लेना होगा तो दोनों पार्टियां मिलकर लेंगी. हम कांग्रेस के जवाब का इंतजार कर रहे हैं.”

कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अजीत पवार की बात दोहराई. उन्होंने कहा कि कोई भी फैसला दोनों पार्टियां मिलकर ही लेंगी. शरद पवार और सोनिया गांधी की मीटिंग के बाद कोई फैसला लिया जाएगा. हालांकि ये 12 नवंबर की सुबह की बातें थीं. दोपहर तीन बजे एनसीपी नेता नवाब मलिक ने पार्टी विधायकों की बैठक के बाद मीडिया से कहा-

”एनसीपी विधायक दल की बैठक हुई. 54 विधायक मौजूद रहे. यह प्रस्ताव पारित किया गया कि इस बारे में फैसला लेने का अधिकार शरद पवार को दिया गया. कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेता मुंबई आ रहे हैं. 5 बजे कांग्रेस के साथ बैठक के बाद अंतिम फैसला किया जाएगा.”

कांग्रेस नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ मुंबई में बात करने वाले थे. सरकार बनाने पर चर्चा करने वाले थे. अभी वो कुछ फैसला लेते, उससे पहले ही खबर आ गई कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगेगा.

हालांकि एक दिन पहले आदित्य की जगह उद्धव के सीएम बनने की बातें चल रही थी. एनसीपी सीधे तौर पर सरकार में शामिल होने को तैयार थी. कांग्रेस हां और ना वाले मोड में थी. अंदर की बातें निकल कर आई थीं कि कांग्रेस-एनसीपी दोनों एक एक डिप्टी सीएम चाहते हैं. दोनों पार्टियां 14-14 मंत्रिपद भी चाहती हैं. कांग्रेस स्पीकर का पद भी मांग रही थी. इन सब के बाद हर पार्टी को एक और चीज चाहिए थी और वो था समय. और समय बहुत क्रूर होता है. सबको नहीं मिलता है. और यहां समय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथ में था. उन्होंने ये समय किसी को भी नहीं दिया. और अब राष्ट्रपति शासन लगने की घोषणा औपचारिक भर रह गई है.


महाराष्ट्र में BJP का सरकार बनाने से इंकार

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