31 दिसंबर 2017 को यूपी के डीजीपी सुलखान सिंह के आगे पूर्व लग गया था. फिर लंबीकयासबाजी के बाद उत्तर प्रदेश के नए डीजीपी के तौर पर नाम सामने आया ओमप्रकाश सिंहका. वो केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर थे. बतौर सीआईएसएफ डीजी काम कर रहे थे. मगर 21दिन से उन्हें रिलीव ही नहीं किया जा रहा था. तब से यूपी बिनी डीजीपी के ही था.पुलिस बिना अपने मुखिया के काम कर रही थी. एक बार फिर कयासबाजी होने लगी कि क्याओपी सिंह का नाम अभी फाइनल नहीं है. मगर अब इंतजार खत्म हो गया है. गृह मंत्रालय नेउन्हें रिलीव कर दिया है. वो अब यूपी डीजीपी का चार्ज संभालेंगे.उनके नाम पर मुहर लगने का एक बड़ा कारण उनका कार्यकाल माना जा रहा है. उनकारिटायरमेंट जनवरी 2020 में होना है. माने वो दो साल से ज्यादा वक्त तक यूपी केडीजीपी रह सकते हैं. इसी वक्त में लोकसभा चुनाव भी होने हैं, सो इसके लिए तैयारियांकरने का भी इनको वक्त मिल जाएगा. यही वजह है कि सीनियॉरियी लिस्ट में उनसे ऊपर 6अधिकारी होने के बावजूद उन्हें तरजीह दी गई. अब वो ये जिम्मेदारी कैसे निभाते हैंये तो बाद की बात है, मगर उनकी अब तक की सर्विस की 6 खास बातें हम आपको बताते हैं -1. 2 जून, 1995. ये तारीख यूपी के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है. बात गेस्टहाउस कांड की हो रही है. इस दिन मायावती लखनऊ में स्टेट गेस्ट हाउस में ठहरी हुईथीं. उन्होंने मुलायम सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. नाराज़ सपा विधायक औरकार्यकर्ताओं ने वहां हंगामा काट दिया. मायावती के साथ हाथापाई और बदसलूकी हुई.उनकी आबरू पर हमला हुआ. और जिस वक्त ये सब हो रहा था, ओपी सिंह लखनऊ के एसएसपी थे.स्थिति पर समय रहते कंट्रोल ना कर पाने के कारण उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.सीआईएसएफ के डीजी थे ओपी सिंह. (फोटो- ट्विटर)2. ओपी सिंह को यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता रहा है.बताते हैं मुलायम सिंह के सीएम रहते एनसीआर में ओपी सिंह के लिए खास एडीजी की पोस्टबनाई गई थी. मायावती के कार्यकाल में उनको साइडलाइन कर दिया जाता था. फिर अखिलेशयादव सीएम बने तो उनसे भी उनकी जमी नहीं. और वो केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर चलेगए. 3. 1983 बैच के आईपीएस अफसर ओपी सिंह रहने वाले बिहार के गया जिले के हैं. उनकेपास यूपी में काम करने का लंबा एक्सपीरियंस है. वह अल्मोड़ा, खीरी, बुलंदशहर, लखनऊ,इलाहाबाद, मुरादाबाद में बतौर एसएसपी काम कर चुके हैं. 3 बार लखनऊ के एसएसपी रहचुके हैं. आजमगढ़ और मुरादाबाद के डीआईजी व मेरठ जोन के आईजी भी रह चुके हैं.रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम में हिस्सा लेते ओपी सिंह.(फोटो- ट्विटर)4. 1992-1993 में लखीमपुर खीरी में तैनाती के दौरान इन्होंने नेपाल बॉर्डर से होनेवाली अवैध तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम कसी थी. लखनऊ में तैनाती के दौरानइन्होंने शिया-सुन्नी समुदायों के बीच आएदिन होने वाले दंगों पर भी बातचीत के जरिएरोक लगाई थी. इसके लिए इन्हें यूपी सरकार ने सम्मानित भी किया था. इलाहाबाद मेंकुंभ मेले का मैनेजमेंट भी वो संभाल चुके हैं. 5. ओपी सिंह अपने काम के लिएराष्ट्रपति से पदक पाने वाले इकलौते डीजी हैं. एनडीआरएफ में बतौर डीजी काम करते हुएउन्होंने जम्मू कश्मीर में आई बाढ़, चेन्नै में हुदहुद तूफान के दौरान राहत कार्यपहुंचाने में बेहतरीन काम किया था. 2015 में नेपाल में भूकंप के दौरान उन्होंनेराहत कार्यों के लिए गई टीम को लीड किया था. इसकी तारीफ नेपाल सरकार के साथ हीयूनाइटेड नेशंस में हुई थी. आईआईटी दिल्ली ने तो ओपी सिंह की इसी लीडरशिप क्षमता पर2016 में एक केस स्टडी पब्लिश की थी.ओपी सिंह को राष्ट्रपति पदक भी मिल चुका है.6. ओपी सिंह ने नेपाल भूकंप पर अपने अनुभवों के आधार पर एक किताब भी लिखी है. लिखनेके अलावा इन्हें साइक्लिंग करने का भी शौक है. सीआईएसएफ में डीजी रहते हुए भीइन्होंने कई चेंज करवाए. इसका नतीजा ये रहा कि 2017 में वर्ल्ड क्वॉलिटी कांग्रेसमें साआईएसएफ को बेस्ट एयरपोर्ट सिक्युरिटी के लिए क्वॉलिटी एक्सिलेंस अवॉर्ड मिला.--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप वीडियो देखें-ये भी पढ़ें-2017 के वो 5 धाकड़ पुलिस अधिकारी जिन्होंने अपराधियों का बाजा बजा दियाआलू को सच में सोना बनाने की ये है तरकीबक्या है यूपीकोका, जिसकी वजह से यूपी में विपक्ष ने भसड़ मचा रखी हैवो आध्यात्मिक बाबा, जो कथित रूप से रोज 10 रेप करता हैदेश के सबसे कम उम्र के IPS अफसर को लेकर गलत खबर वायरल हो रही है