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NGO का दावा, चुनाव आयोग ने समय से पहले नष्ट कर दिये लोकसभा चुनाव के VVPAT रिकॉर्ड

Association for Democratic Reforms (ADR) और Common Cause. इन दो NGOs का दावा है कि चुनाव आयोग ने समय से पहले ही 2019 के लोकसभा चुनाव का वीवीपैट रिकॉर्ड नष्ट कर दिया है. नियम कहता है कि VVPAT रिकॉर्ड को नतीजे आने के एक साल बाद तक नहीं मिटाया जा सकता है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई, 2019 को आए थे. ऐसे में रिकॉर्ड 23 मई, 2020 तक मिटाए नहीं जा सकते हैं.

दोनों NGOs ने इस सिलसिले में चुनाव आयोग में RTI लगाई थी. जवाब मिला कि रिकॉर्ड नष्ट किये जा चुके हैं. इसके बाद ADR के वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई कि उसने नियमों का उल्लंघन किया है.

वहीं TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी चुनाव आयोग में RTI  लगाई थी. इस RTI के जवाब में सामने आया कि लोकसभा चुनाव 2019 में 347 सीटों पर मतदान प्रतिशत और गिने गए वोटों में 10 प्रतिशत का अंतर सामने आया है. इसके बाद मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी.

चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की बेंच ने ADR और TMC सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर जवाब के लिए चुनाव आयोग को चार सप्ताह का समय दिया है.

क्या है वीवीपैट
जब हम वोट करने जाते हैं तो EVM में बटन दबाते हैं. इसके बाद जिस मशीन में कुछ देर के लिए हमें पर्ची दिखती है कि हमने किसे वोट किया, वो VVPAT होती है. EVM में गड़बड़ी के कई आरोप लगने के बाद वीवीपैट लाया गया. ताकि वोट डालने के बाद वोटर को तुरंत पता चल सके कि उसने जिसे वोट दिया है, मशीन में वही फीड हुआ है या नहीं. इसका एक मकसद ये भी था कि किसी भी तरह का विवाद के होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ VVPAT की पर्ची का मिलान किया जा सके. इसका पहला पायलट प्रयोग नगालैंड चुनाव में 2013 में हुआ था.


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