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नेपाल सरकार ने संशोधित नक्शे का प्रस्ताव क्यों टाल दिया?

भारत और नेपाल के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र को लेकर विवाद जारी है. मसले पर नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत पर तीखे कमेंट्स किए हैं. नेपाल ने नया नक्शा भी जारी किया है. मामले को लेकर अब अपडेट ये है कि नए नक्शे को कानूनी मान्यता देने के लिए नेपाल सरकार संविधान संशोधन विधेयक लाने वाली थी जिसे अब टाल दिया गया है. 27 मई को ओली सरकार के भीतर मतभेद और मुख्य विपक्षी दल द्वारा और वक्त मांगे जाने के बाद विधेयक को संसद में नहीं पेश किया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक़, भारत सरकार नेपाल के हर कदम पर गौर कर रही है. सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि बॉर्डर के मसले बहुत संवेदनशील होते हैं. इन्हें सुलझाने के लिए भरोसा चाहिए होता है. हमें ध्यान देना चाहिए कि मामले को लेकर नेपाल में बहस हो रही है. इससे मुद्दे की गंभीरता का पता चलता है. यह भारत-नेपाल संबंधों को भी दर्शाता है.

लेकिन मामला टला क्यों?

नेपाल में संविधान में संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. नेपाल में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है. ओली सरकार के 275 सांसद हैं जो दो तिहाई से 9 कम हैं. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता और पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड ने पीएम ओली को सलाह दी है कि इस मामले पर आराम से सोचकर काम करें.

मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने सरकार ने मसले पर विचार करने के लिए और समय मांगा है. नेपाली कांग्रेस के 63 सदस्य हैं. पार्टी के प्रवक्ता बिश्वमोहन शर्मा ने कहा है कि पार्टी, सरकार का समर्थन करने को तैयार है.

तराई मधेश की समाजवादी जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता पार्टी सरकार से नागरिकता के लिए और अधिक उदार दृष्टिकोण जैसे मसले पर बातचीत कर रहे हैं. मधेसी दलों के पास 34 सदस्य हैं, जो अपनी मांगों को पूरा करवाना चाहते हैं.

मामले को लेकर इंडिया टुडे से बात करते हुए नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्याली ने कहा है कि यह बिल जल्द ही पारित हो जाएगा. मुझे पूरा यकीन है कि बहुत जल्द इस बिल को नेपाल में सभी दलों का समर्थन मिल जाएगा.

भारत ने क्या कहा था?

नेपाल के द्वारा नया नक्शा रिलीज़ करने से भारत की चिंता बढ़ गई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मामले पर कहा था-

नेपाल सरकार ने नेपाल का एक संशोधित आधिकारिक नक्शा जारी किया है जिसमें भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्से शामिल हैं. यह एकतरफा कारवाई ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है. इस तरह के आर्टिफिशियल विस्तार के दावों को भारत द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा. नेपाल को इस मामले पर भारत का स्टैंड अच्छे से पता है. हम नेपाल से इस तरह के दावे से परहेज और भारत की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान करने का आग्रह करते हैं.उम्मीद है कि नेपाली नेतृत्व बॉर्डर मसले को सुलझाने के लिए राजनयिक बातचीत के लिए सकारात्मक माहौल बनाएगा.


विडियो- नेपाल को ‘लिपुलेख दर्रे’ के पास भारतीय सड़क पर आपत्ति क्यों?

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