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NEET UG Exam की डेट टालने की मांग कर रहे CBSE छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने क्या सलाह दी?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 6 सितंबर को CBSE और NEET एग्जाम से जुड़ी दो याचिकाओं की सुनवाई की. इनमें से एक याचिका में CBSE कंपार्टमेंट और इंप्रूवमेंट एग्जाम के शेड्यूल पर आपत्ति जताई गई है. वहीं, दूसरी याचिका NEET UG एग्जाम के नोटिफिकेशन को लेकर दायर की गई थी, जिसमें परीक्षा की तारीख 12 सितंबर बताई गई है. सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें CBSE के कुछ कंपार्टमेंट या इंप्रूवमेंट, प्राइवेट और पत्राचार स्टूडेंट्स ने NEET UG एग्जाम डेट टालने की अपील की थी.

याचिका में इन छात्रों का कहना था कि उनके सीबीएसई एग्जाम और NEET UG का समय एक ही है, लिहाजा नीट की परीक्षा टाल दी जाए. लेकिन जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने छात्रों से कहा कि वे ये मांग लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पास जाएं, जो NEET का संचालन करता है. इसके साथ ही कोर्ट ने NEET UG 2021 Date में बदलाव करने की मांग खारिज कर दी.

क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीशा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने CBSE छात्रों से कहा कि इस मुद्दे पर सक्षम अथॉरिटी को अपने विचार NTA के सामने रखने चाहिए. बेंच ने छात्रों से ये भी कहा कि उन्हें अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए कोर्ट जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा,

“हम 16 लाख छात्रों की मेहनत और केंद्र सरकार की तैयारियों को अनदेखा करते हुए परीक्षा नहीं टाल सकते. वो भी तब जब कैंडिडेट्स को उनके एडमिट कार्ड मिल गए हैं. हां, हम कंपार्टमेंट सूची वाले छात्रों को अस्थायी रूप से NEET एग्जाम देने की अनुमति दे सकते हैं.”

Sslc Exam In Bengaluru
प्रतीकात्मक तस्वीर. (साभार-पीटीआई)

वहीं, लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा है,

“इन छात्रों को दिन-रात पढ़ाई करके तैयारी करनी चाहिए. अदालत के तौर पर हम कितना हस्तक्षेप कर सकते हैं? हमारे हस्तक्षेप का मतलब है कि हम कई छात्रों के तनाव और तकलीफ का कारण बन रहे हैं. अगर अथॉरिटी अपने से कुछ करना चाहती है तो ये उसका फैसला है. कृपया उन पर दबाव बनाने के लिए हमारे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल ना करें.”

कोर्ट ने कहा कि केवल एक प्रतिशत सीबीएसई छात्र ही इंप्रूवमेंट या कंपार्टमेंट के लिए बैठेंगे. उनके लिए नीट का पूरा शेड्यूल नहीं बदला जा सकता. हालांकि कोर्ट ने छात्रों और उनके वकीलों को इस बात की अनुमति दी है कि वे अपनी मांग को लेकर किसी दूसरी अथॉरिटी के पास जा सकते हैं.

क्या बोले सॉलिसिटर जनरल?

याचिकाकर्ता छात्रों के वकील शोएब आलम ने अदालत को बताया कि पिछले साल JEE के एग्जाम पोस्टपोन किए गए थे. उन्होंने बताया कि तब सुप्रीम कोर्ट ने NTA को आदेश दिया था कि जो छात्र एग्जाम नहीं दे पाए थे, उनके लिए अलग से परीक्षाएं कराई जाएं. इस आधार पर शोएब आलम ने मांग की इस साल भी इसी तरह की व्यवस्था कर दी जाए.

लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि पिछले साल लॉकडाउन की वजह से अलग से परीक्षाएं कराने का फैसला लिया गया था. इस साल लॉकडाउन नहीं है, लिहाजा ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को NTA के पास जाने को कहा और इस साल के नीट यूजी एग्जाम की डेट टालने का आदेश देने से इन्कार कर दिया.

क्या कह रहे हैं छात्र?

सीबीएसई कंपार्टमेंट या इंप्रूवमेंट छात्र वे हैं, जो सीबीएसई परीक्षा में सभी विषयों में पास नहीं हो पाए हैं या जिनके कम नंबर आए हैं. इन छात्रों के लिए सीबीएसई फिर से परीक्षाएं करा रहा है ताकि वे उन सब्जेक्ट में पास हो सकें. लेकिन जिन दिनों ये एग्जाम होंगे, उसी दौरान 12 सितंबर को NEET UG का भी पेपर है. याचिकाकर्ता छात्रों ने कहा है कि सीबीएसई एग्जाम पास किए बिना कोई छात्रा NEET के पेपर में नहीं बैठ सकता. इसीलिए वे NEET की डेट आगे बढ़वाना चाहते हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर. (साभार- पीटीआई)

वहीं, CBSE कंपार्टमेंट और इंप्रूवमेंट एग्जाम के शेड्यूल के खिलाफ भी याचिका दायर की गई है. इसमें कहा गया है कि जिन छात्रों को CBSE इंप्रूवमेंट या पत्राचार का पेपर देना है, वे उसकी तैयारी के बीच में NEET UG की परीक्षा कैसे दे पाएंगे. इस याचिका को कोर्ट में रखने वाले वकील सुमंत नूकाला का कहना है कि CBSE के शेड्यूल की वजह से छात्रों का एक वर्ग निश्चित रूप से प्रभावित होगा.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि इस मामले में NTA पहले सुप्रीम कोर्ट से कह चुकी है कि CBSE के परिणाम घोषित नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि इससे छात्रों को NEET की परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा. एनटीए ने साफ किया था कि सीबीएसई के परिणामों की जरूरत केवल काउंसलिंग स्टेज में पड़ेगी, जो एग्जाम के बाद की प्रक्रिया है.

शुक्रवार 3 सितंबर को हुई सुनवाई में NTA के वकील ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच से कहा था कि सीबीएसई कंपार्टमेंट या इंप्रूवमेंट छात्रों को नीट का पेपर देने की अनुमति होगी. हालांकि इस पर छात्रों का कहना था कि नीट परीक्षा सीबीएसई परीक्षाओं के बीच ही ली जा रही है, ऐसे में उनका क्वालिफाई करना नामुमकिन हो गया है.


वीडियो- सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की प्राइवेट और कंपार्टमेंट परीक्षा से जुड़ी याचिका खारिज कर दी 

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