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NEET-SS 2021: सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने छात्रों को खुश कर देने वाली बात कह दी है

NEET सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा (NEET Superspeciality Exam 2021) के पैटर्न में इस साल कोई बदलाव नहीं होगा. ये परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही आयोजित की जाएगी. ये जानकारी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी है. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि NEET-SS एग्जाम 2021 मौजूदा पैटर्न के हिसाब से ही आयोजित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में केंद्र सरकार ने ये फैसला लिया है कि संशोधित योजना 2022 से लागू की जाएगी. इस साल की परीक्षा 2020 की योजना के आधार पर ही होगी.

पहले भी कोर्ट ने लगाई थी फटकार

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने NEET सुपर स्पेशियलिटी एग्जाम 2021 के पैटर्न में आखिरी समय में किए गए बदलाव पर नाराजगी जताई थी. 5 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया लगता है कि ऐसा केवल खाली पड़ी पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों को भरने के इरादा से किया गया है. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने कहा,

 इस कदम से ऐसा लग रहा है कि मेडिकल एजुकेशन भी बिजनेस बन गया है. 

DYC J: This sounds a very strong impression that medical education has become a business & even medical regulation has become a BUSINESS

परीक्षा टालने से किया इंकार

केंद्र सरकार ने परीक्षा दो महीने आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. कोर्ट ने फटकार लगाते हुए सरकार से कहा था कि या तो सरकार खुद पुराने पैटर्न पर परीक्षा कराए, वर्ना कानून के हाथ बहुत लंबे हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस नागरत्ना की बेंच ने सरकार से पूछा,

आखिरी वक्त में पैटर्न बदलने की जरूरत क्या है? सरकार नया पैटर्न ला सकती है. ये उनके डोमेन में है. लेकिन ये अगले साल से लागू हो. सरकार को छात्रों की कुछ चिंता करनी चाहिए. छात्रों ने इतने लंबे समय से तैयारी की है. MBBS में एडमिशन लेने के बाद उनका लक्ष्य सुपर स्पेशियलिटी में जाने का होता है. वे इसके लिए लगातार मेहनत करते हैं. अब आप कह रहे हैं कि परीक्षा दो महीने टाल दी जाए. क्यों दो महीने और बर्बाद होने दें जबकि ये छात्र इतने लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं.

सरकार की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि याचिका केवल 41 छात्रों ने दायर की है. जबकि परीक्षा में 5 हजार छात्र बैठते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा,

“ये मायने नहीं रखता कि कितने लोगों ने कोर्ट में अपील की. इन 41 लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है. ये उनके जीवन और करियर का मामला है.”

सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंची परीक्षा?

सबसे पहले तो समझिए NEET सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा क्या है? NEET यानी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा. ये 12वीं के बाद MBBS में एडमिशन लेने वालों के लिए होती है. जब MBBS पूरा हो जाता है तो फिर पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्सेज में एडमिशन के लिए NEET सुपर स्पेशियलिटी एग्जाम होता है. इसके जरिए DM (डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन), MCh (मास्टर्स इन सर्जरी) जैसे कोर्सेज में एडमिशन मिलता है.

तो हुआ ये कि इस साल सरकार ने परीक्षा का पैटर्न बदल दिया. इस बदलाव को चुनौती देते हुए 41 मेडिकल स्टूडेंट पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट. इन स्टूडेंट्स की दलील है कि परीक्षा से महज 2 महीने पहले पैटर्न बदल दिया गया. छात्रों समेत कई लोगों ने कहा कि ये ठीक नहीं है. मेडिकल स्टूडेंट्स की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.


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