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बाइक बोट घोटाले में लखनऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अब कौन सा बड़ा एक्शन लिया?

चर्चित बाइक बोट घोटाले के मामले में लखनऊ में तमाम ठिकानों पर छापेमारी करके 143 बाइक बरामद की गईं. ये ठिकाने बाइक बोट की फ्रेंचाइजी लेने वाले लोगों के हैं. सभी गाड़ियों को कब्जे में लेकर जांच एजेंसी AWO (आर्थिक अपराध शाखा) को सौंपकर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

सबसे पहले बाइक बोट घोटाले के बारे में जान लेते हैं. फिर आगे की बात करेंगे.

गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड. इस कंपनी के डायरेक्टर संजय भाटी को दिसंबर-2020 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था. संजय भाटी की इस कंपनी ने फरवरी 2018 में बाइक बोट नाम से स्टार्टअप शुरू किया था. ये ओला और उबर जैसी ऐप बेस्ड बाइक टैक्सी सर्विस थी. इन बाइकों को निवेशकों से पैसे लेकर खऱीदा गया था.

लोगों को बताया गया कि आप एक या एक से ज्यादा बाइक की कीमत का पैसा कंपनी में निवेश करें. बदले में कंपनी आपको हर महीने एक निश्चित रिटर्न देती रहेगी. एक प्लान के मुताबिक 62,100 रुपए के निवेश पर कंपनी हर महीने 9,756 रुपए का रिटर्न देने का वादा करती थी. यानी साल भर में 1,17,180 रुपए का रिटर्न. कंपनी के ऐसे कई प्लान थे. कंपनी ने साल 2019 में इलेक्ट्रिक बाइक योजना शुरू की. लोगों से ऐसी हर बाइक के लिए 1.24 लाख रुपये जमा करवा लिए. एक वर्ष तक 17 हजार रुपए हर महीने देने का वादा किया. कंपनी ने इस तरह से पैसा जुटाने के लिए देशभर में फ्रैंचाइजी बांट रखी थीं. जब लोगों को रिटर्न मिलना बंद हो गया, तो कंपनी के अलग-अलग ऑफिसों में लोग हंगामा करने लगे. शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचने लगे. तो पता चला कि ये घोटाला लगभग 42 हजार करोड़ रुपए का है.

अलग-अलग थानों में 15 मुकदमे

इसी मामले में अब लखनऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने ताबड़तोड़ छापेमारी करते हुए मोहनलालगंज कोतवाली के भावाखेड़ा गांव में स्थित कार्यालय के बेसमेंट से लगभग 117 और बेहनवां स्थित कुलदीप शुक्ला के घर से लगभग 28 बाइक बरामद की हैं. बाइकों पर ‘बाइक बोट’ के स्टीकर भी लगे हैं. लखनऊ में कंपनी की फ्रेंचाइजी लेने वाले दो लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है- अमित अग्रवाल और कुलदीप शुक्ला. इस मामले में लखनऊ में 15 मुकदमे अलग-अलग थानों में दर्ज हैं.

ढाई लाख लोगों से ठगी

ADSP  पूर्वी कासिम आब्दी ने बताया कि पुलिस ने पूरी कार्रवाई की सूचना आर्थिक अपराध शाखा को दे दी है. क्योंकि वो इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. अनुमान है कि संजय भाटी ने अपने गर्वित इन्नोवेटर्स प्रमोटर्स लिमिटेड के तहत ढाई लाख लोगों को ठगा था. संजय भाटी के जेल जाने के बाद उसकी पत्नी दीप्ति अंडर ग्राउंड हो चुकी है और दीप्ति पर 50 हजार रुपए का इनाम भी है.


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