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आखिर क्या सोचकर मोदी ने UP के इन नेताओं को कैबिनेट में जगह दी है?

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30 मई, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से PM पद की शपथ ली. उनके साथ-साथ 57 नेताओं ने कैबिनेट और राज्यमंत्री पद की शपथ ली. मंत्रिमंडल में शामिल नामों को लेकर मीडिया में ऐसी खबरें चलने लगीं कि मोदी ने भारत के लगभग हर हिस्से को मंत्रिमंडल में जगह दी है.

चुनाव की हैसियत से 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश को सबसे ज़रूरी राज्य माना जाता है. UP से आठ नेता इस बार मंत्रिमंडल में पहुंचे हैं. सवाल है कि इन्हीं नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह क्यों दी गई है? समीकरण देख-सुनकर लगता है कि कई मंत्री UP में कुछ सालों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए ज़मीन मजबूत करेंगे. कुछ ऐसे लोग मंत्री चुने गए हैं, जिन्होंने काम भी किया. कुछ से पिछली सरकार के दौरान बीच में ही मंत्रालय छीन लिया गया था. लेकिन इस बार फिर से दिया गया. क्यों हुआ ऐसा? जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

1. स्मृति ईरानी

क्या बनाया गया है- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय. कपड़ा मंत्रालय.

स्मृति ईरानी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा. हारकर भी सुर्खियों में रहीं. पिछली सरकार में उन्हें सबसे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय दिया गया. दो साल बाद 2016 में उनसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कार्यभार लेकर कपड़ा मंत्रालय का कार्यभार दे दिया गया. फिर 2017 में उन्हें सूचना प्रसारण मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया. बाद में ये मंत्रालय उनसे लेकर राज्यवर्धन सिंह राठौर को दे दिया गया. 2019 में स्मृति ने अमेठी में राहुल गांधी को हरा दिया. करीब 55 हज़ार वोटों से. अमेठी सीट पर स्मृति की जीत भाजपा के लिए बहुत मायने रखती है. अपने पिछले कार्यकाल में स्मृति ईरानी ने अमेठी हारने के बावजूद अमेठी के कई दौरे किये. कई दौरे उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों के साथ होते थे. लोग बताते हैं कि मंत्रियों को साथ रखने की वजह से ईरानी लोगों की समस्याओं का निदान तेज़ी से करती थीं.

स्मृति ईरानी 2014 में अमेठी से चुनाव हार गई थीं. इसके बावजूद उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया. वो मानव संसाधन विकास मंत्री रहीं. टेक्सटाइल मिनिस्ट्री भी रही उनके पास.
स्मृति ईरानी 2014 में अमेठी से चुनाव हार गई थीं. इसके बावजूद उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया. वो मानव संसाधन विकास मंत्री रहीं. टेक्सटाइल मिनिस्ट्री भी रही उनके पास.

एक असफल सांसद, लेकिन एक जनप्रिय नेता के तौर पर स्मृति ईरानी के पिछले कार्यकाल का और तेवर से भरे प्रचार सिस्टम का लाभ भाजपा को मिला है. जानकार बताते हैं कि उन्हें मंत्रिमंडल में रखकर भाजपा अमेठी को पूरी तरह कांग्रेस से हथियाना चाहती है. इसके अलावा स्मृति का एक बड़ा यूएसपी महिला वोटों पर उनकी पकड़ होना भी है, जिसे भाजपा आगामी विधानसभा उपचुनाव में फिर से आजमाना चाहेगी. इसलिए नए मंत्रिमंडल में उन्हें कपड़ा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, दोनों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है.

2. महेंद्र नाथ पाण्डेय

महेंद्र नाथ पाण्डेय को पिछली बार कैबिनेट से हटाकर यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. वो राज्य मंत्री थे तब. अखिलेश और मायावती के साथ आ जाने के बावजूद बीजेपी ने UP में 62 सीटें निकालीं.
महेंद्र नाथ पाण्डेय को पिछली बार कैबिनेट से हटाकर यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. वो राज्य मंत्री थे तब. अखिलेश और मायावती के साथ आ जाने के बावजूद बीजेपी ने UP में 62 सीटें निकालीं.

क्या बनाया गया है-  कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

पूर्वांचल में भाजपा के बड़े नेता माने जाते हैं. केशव प्रसाद मौर्य के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. लोकसभा सीट है चंदौली. 2014 में लगभग डेढ़ लाख वोटों के साथ जीत दर्ज की थी. लोग बता रहे थे कि इस बार उनकी चंदौली फंसी हुई है, मगर महेंद्र ने चुनाव निकाल लिया. जनता और मीडिया के बीच साफ़सुथरी छवि है. पूर्वांचल के सवर्ण वोटों पर महेंद्र नाथ पाण्डेय की अच्छी पकड़ मानी जाती है. पार्टी के लिए यूपी में एक ब्राह्मण चेहरा भी हैं. नए मंत्रिमंडल में उन्हें कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय दिया गया है. महेंद्र नाथ पाण्डेय भाजपा का मजबूत सिक्का माने जाते हैं. 2022 में होने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मददगार साबित हो सकते हैं. उनके मंत्रिमंडल में जाने को लेकर लोग मानते हैं कि खांटी ब्राह्मण चेहरा कैबिनेट में रहने से भाजपा को चुनाव में और फायदा मिल सकता है.

3. संतोष कुमार गंगवार

क्या बनाया गया है- श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

पिछले तीस सालों से संसदीय राजनीति का हिस्सा हैं. बरेली लोकसभा सीट से सांसद हैं. 2014 में बरेली से जीतने के बाद पहले वित्त राज्यमंत्री का पद मिला. उसके बाद कपड़ा राज्यमंत्री का पद मिला. जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, तब भी गंगवार पेट्रोलियम राज्यमंत्री और संसदीय कार्य राज्यमंत्री के पद पर थे. भाजपा का पुराना चेहरा हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्त्वपूर्ण सीट है बरेली, जहां गंगवार वोटर बहुतायत में हैं.

लगातार छः बार बरेली से भाजपा सांसद संतोष कुमार गंगवार इस बार भी चुनाव जीत गए हैं. कैबिनेट के साथ उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी बनाया गया है.
लगातार छह बार बरेली से भाजपा सांसद संतोष कुमार गंगवार इस बार भी चुनाव जीत गए हैं. कैबिनेट में जगह देने के साथ उन्हें प्रोटेम स्पीकर भी बनाया गया है.

लोग बताते भी हैं कि गंगवार जब भी मंत्री रहे हैं, तब अपने क्षेत्र में अपने मंत्रालय की परियोजनाएं लेकर आते हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल में भाजपा के सबसे पुराने नेताओं में से एक हैं. मंत्रिमंडल में उनको लाकर भाजपा गंगवार को मंत्री बनाने की परिपाटी तो पूरी कर ही रही है. साथ इसके, जैसा लोग बताते हैं, भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन को भी मजबूत करना चाहती है. ऐसे में बरेली के सांसद को (फिर से) मंत्री बनाने में सरकार को अपना वजन बढ़ता दिखता ही है, साथ ही भाजपा संगठन के रूप में अपनी मजबूती का भी रास्ता देख रही है. प्रोटेम स्पीकर बनाने के साथ ही भाजपा ने संतोष गंगवार को श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय का प्रभार दिया है.

4. वीके सिंह

वीके सिंह ने योगी आदित्यनाथ के बयान को गलत ठहराया है. (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)
सरकार ने वीके सिंह को सड़क परिवहन मंत्रालय में राज्यमंत्री का दर्जा दिया है.

क्या बनाया गया है- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री

गाज़ियाबाद के सांसद. भाजपा की राष्ट्रवाद की थीम में बैठने वाला सबसे सटीक चेहरा हैं. थलसेना प्रमुख रह चुके हैं. पिछली बार भी चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. पिछली सरकार में विदेश राज्यमंत्री थे. अपने कार्यकाल के दौरान विदेशों में फंसे भारतीयों को लाकर वीके सिंह ने सुर्ख़ियों में जगह बनाई थी. हरियाणा से ताल्लुक रखने वाले वीके सिंह की पकड़ राजपूत समुदाय में अच्छी मानी जाती है. दिल्ली से सटे गाज़ियाबाद में वीके सिंह का होना भाजपा को जातीय समीकरण पर फायदा पहुंचाएगा. इसके साथ ही भाजपा की राष्ट्रवाद वाली थीम को भी उनके होने से लाभ मिलता है. शायद इसीलिए सरकार ने वीके सिंह को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया और सड़क परिवहन मंत्रालय में राज्यमंत्री का दर्जा दिया.

5. साध्वी निरंजन ज्योति

क्या बनाया गया है- ग्रामीण विकास राज्यमंत्री

पिछली सरकार में केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में राज्यमंत्री थीं. फतेहपुर से सांसद चुनी गई हैं. साध्वी निरंजन ज्योति ने ‘रामज़ादा’ और ‘हरामज़ादा’ बयान दिया था. इस बयान के बाद बवाल मचा, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बयान के लिए खेद जताया था.

महाकुंभ में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था. और मोदी कैबिनेट में मंत्री.
महाकुंभ में मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति (दाहिने) को निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था. 

इस सरकार में साध्वी निरंजन ज्योति को मिला है ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री का प्रभार. जानकार मानते हैं कि साध्वी निरंजन ज्योति को मंत्री पद देकर भाजपा के दो हित सधते हैं. एक, निरंजन ज्योति निषाद समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. लखनऊ, गोरखपुर और आसपास की सीटों पर निषाद वोटों की बहुतायत है. ऐसा बहुत हद तक संभव है कि निषाद वोट, जिस पर सपा-बसपा गठबंधन भी अपना निशाना साधता है, को एक करने के लिए निरंजन ज्योति को मंत्री पद दिया गया है. दूसरा कारण यह है कि साध्वी निरंजन ज्योति के साथ-साथ भाजपा पर भी ध्रुवीकरण के आरोप लगते रहे हैं. अगर आरोप सच हैं तो साध्वी निरंजन ज्योति भी इस अजेंडे को लाभ पहुंचा सकती हैं. लोग यह भी कहते हैं कि निरंजन ज्योति को मंत्री पद देकर संत समाज को नाराज़ न करने की भी रणनीति अपनाई है मोदी सरकार ने. ऐसा इसलिए कि साध्वी का संत समुदाय में बड़ा नाम है और इलाहाबाद में इस साल हुए अर्धकुंभ में उन्हें निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर की उपाधि भी दी गई थी.

6. संजीव बालियान

क्या बनाया गया है- पशुपालन, दुग्ध एवं मत्स्य पालन राज्यमंत्री

जाटों के बड़े नेता. मुज़फ्फ़रनगर लोकसभा सीट से लगातार दूसरी बार सांसद. इस साल उन्होंने महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय लोक दल (RLD) प्रत्याशी अजित सिंह को चुनाव में शिकस्त दी है. पिछली सरकार में पहले कृषि और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय में राज्यमंत्री पद मिला. फिर नदी विकास और जल संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाए गए. 2017 में उन्हें कैबिनेट से बाहर कर दिया गया. चर्चा होती है कि संजीव अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभा नहीं पाए. ऐसे में फिर से उन्हें मंत्रिमंडल में क्यों लाया गया?

रालोद मुखिया अजित सिंह को हराने के बाद संजीव बालियान को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है.
रालोद मुखिया अजित सिंह को हराने के बाद संजीव बालियान को कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री बनाया गया है.

इसके जवाब में जानकार कहते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति में भाजपा की पकड़ इन कुछेक सालों में कमज़ोर हुई है. जाटलैंड की महत्वपूर्ण सीटों पर इस बार जीत दर्ज करने के लिए भाजपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ी थी. मुरादाबाद मंडल की सभी छह सीटों पर भाजपा हार ही गई थी. लेकिन जाटों के प्रमुख बालियान खाप में संजीव बालियान की अच्छी स्थिति है. लोग उन्हें करीब से जानने का दावा करते हैं. वो चुनाव भी जीत गए. मुज़फ्फ़रनगर के एक पत्रकार ने बातचीत में बताया कि अजित सिंह को हराने का इनाम दिया गया है संजीव को, ताकि वे 2022 तक जाट वोटों को भाजपा के पक्ष में लामबंद कर सकें. जाटों को खुद के बीच से एक कैबिनेट मंत्री देखकर ख़ुशी हो सकती है.

2013 के मुज़फ्फ़रनगर के दंगों के समय भी संजीव बालियान पर दंगे भड़काने का आरोप लगा था. उन पर यह भी आरोप लगता है कि वे खुलेआम ध्रुवीकरण करते हैं. चुनाव कैंपेन में भी उनके कुछ ऐसे वीडियो आए थे, जिसमें वो अपने खिलाफ पड़े हर वोट का हिसाब लेने की बात करते दिखे थे. ऐसे में जानकार यह भी अंदेशा जताते हैं कि संजीव का इस्तेमाल ध्रुवीकरण के लिए हो सकता है.

7. राजनाथ सिंह

क्या बनाया गया है- रक्षा मंत्री

भाजपा के शीर्ष नेतृत्त्व में से एक. चंदौली से ताल्लुक रखने वाले राजनाथ सिंह ठाकुरों की राजनीति में मजबूत माने जाते हैं. लखनऊ से सांसद हैं. भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. पिछली सरकार में गृह मंत्री थे. सोशल मीडिया पर ‘कड़ी निंदा’ करने के लिए राजनाथ सिंह की चुटकी ली जाती है. दो बार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बीजेपी के साथ-साथ राजनाथ सिंह का भी कद बढ़ा.

गृह मंत्री से विदेश मंत्री बने राजनाथ सिंह का प्रमोशन हुआ है या डिमोशन.
गृह मंत्री से विदेश मंत्री बने राजनाथ सिंह के बारे में लोग लिख रहे हैं कि उनका प्रमोशन हुआ है या डिमोशन, ये समझ नहीं आ रहा है

राजनाथ सिंह को इस बार दिया गया है रक्षा मंत्रालय. कहा जा रहा है कि उनको महत्त्वपूर्ण मंत्रालय देकर भाजपा ठाकुर वोटों पर बढ़त देखना चाह रही है. उन्हें नाराज़ करने से उत्तर प्रदेश के एक बड़े वोट बैंक के बीच भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है. लेकिन सारी बातों के साथ यह भी कहा जाता है कि संगठन के साथ-साथ सरकार में राजनाथ की छवि बहुत अच्छी है. उनके अधीन रहे गृह मंत्रालय का भी प्रदर्शन बहुत अच्छा माना जा रहा है. ऐसे में राजनाथ सिंह को कैबिनेट में शामिल करना भाजपा के लिए तो फायदेमंद है ही, लोग कह रहे हैं कि ये गवर्नेंस के लिए भी अच्छा मुद्दा है. लेकिन सोशल मीडिया पर अब ये बहस चल रही है कि राजनाथ सिंह से गृह मंत्रालय लेकर रक्षा मंत्रालय देना उनका प्रमोशन है या डिमोशन.

8. मुख़्तार अब्बास नक़वी

क्या बनाया गया है-  अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं. पिछली मोदी सरकार में वरिष्ठ नेता नज़मा हेपतुल्ला ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री पद से इस्तीफा दिया. फिर इस मंत्रालय को संभालने के लिए मुख़्तार अब्बास नक़वी सामने आए थे. इस बार भी नक़वी को यही मंत्रालय दिया गया है. इलाहाबाद से ताल्लुक रखने वाले नक़वी ने रामपुर से 1998 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता. तब से लेकर अब तक वे रामपुर में सक्रिय रहे हैं. इस साल जब जयाप्रदा आज़म खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही थीं, तो कहा जा रहा था कि जयाप्रदा के समर्थन में वोटरों को तैयार करने की ज़िम्मेदारी नक़वी ने ली थी. ये अलग बात है कि आज़म खान के खिलाफ चुनाव लड़ रही जया प्रदा जीत नहीं पाईं.

मुख्तार अब्बास नक़वी केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हैं. (फोटोःपीटीआई)
मुख्तार अब्बास नकवी बीजेपी का इकलौता मुस्लिम चेहरा है कैबिनेट में

नक़वी को फिर से वही मंत्रालय सौंपने की वजह भी मुरादाबाद मंडल से आती है. मुरादाबाद मंडल में आने वाली छह लोकसभा सीटें संभल, रामपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, नगीना और अमरोहा हैं. भाजपा ये सभी सीटें महागठबंधन के हाथों हार गई है. रामपुर में सक्रिय रहे नक़वी पर बड़ी ज़िम्मेदारी होगी कि इन सभी सीटों को वापस भाजपा के पाले में लाएं. नक़वी को मोदी सरकार में मंत्री बनाने को योगी सरकार के एक मंत्री मोहसिन रज़ा से भी जोड़कर देखा जा रहा है. योगी सरकार में मोहसिन रज़ा को कैबिनेट मंत्री बनाने के साथ सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया. शिया मुस्लिमों को बड़ा ओहदा देकर भाजपा अवध की विधानसभा सीटों पर इसे भुना सकती है.


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