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38 दिन बाद ऑफिस खुला था, मामला ऐसा निकला कि फिर छुट्टी करनी पड़ी

लॉकडाउन के चलते सरकारी-प्राइवेट सारे दफ्तर लंबे वक्त से बंद हैं. अब धीरे-धीरे सरकारी दफ्तरों में काम-काज शुरू किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 38 दिन बाद 30 अप्रैल को सचिवालय और निदेशालय खुले. लेकिन ज़्यादातर अधिकारी दफ्तर के दरवाज़े से ही लौट गए. क्यों? क्योंकि अभी दफ्तर अच्छे से सैनिटाइज़ नहीं हुआ था.

प्रशासन ने कहा था कि सचिवालय में उप सचिव और निदेशालय में अपर संचालक तक के अफसर दफ्तर पहुंच सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि पूरी स्ट्रेंथ के 30 फीसदी लोग ही ऑफिस आएंगे, ताकि सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन रखी जा सके. दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक – कई अफसर दफ्तर पहुंचे तो देखा कि उनके और टीम के बैठने की जगहों पर कायदे से सैनिटाइज़ेशन तक नहीं हुआ था. मेज-कुर्सियों पर धूल तक जमा थी. इसलिए वो दरवाज़े से ही घर वापस चले गए.

दफ्तर शुरू करने को लेकर ये निर्देश हैं.

किसी भी दिन पर कुल स्टाफ में 30% लोग ही दफ्तर आ सकेंगे. रोस्टर सिस्टम के हिसाब से ये स्टाफ बदलता रहेगा.

गाड़ियों से लेकर सीढ़ियों तक, हर जगह को सैनिटाइज़ किया जाए.

कई अफसरों ने तो फोन, लिपिक को बुलाने के लिए लगी घंटी तक को सैनिटाइज़ करा लिया.

12 बजे तक दुकानें खोलने पर भी विचार

काम-काज शुरू होने के साथ ही इकॉनमी को दुरुस्त करने की प्रोसेस भी शुरू हो गई है. लॉकडाउन के बाद शिवराज सिंह चौहान की सरकार प्रदेश में सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक दुकानें खोलने की परमिशन देने की सोच रही है. शिवराज की श्रम विभाग के साथ बैठक में ये बात उठी.

बहरहाल, आप ऑफिस से छुट्टी लेने की वजहों की लिस्ट में एक कारण और जोड़ लीजिए – दफ्तर सैनिटाइज़ न होने से छुट्टी.


नारायणमूर्ति ने बताया, लॉकडाउन फिर से बढ़ाने पर कितना बड़ा नुकसान हो सकता है

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