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केरल के इस डॉक्टर पर 'आयुष' के अपमान का आरोप, मंत्रालय ने नोटिस भेजा तो ट्विटर पर मोर्चा खोल दिया

केरल के कोच्चि स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल के एक डॉक्टर पर आयुष को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है. डॉ. लिवर स्पेशलिस्ट यानी हेपेटोलॉजिस्ट है. नाम है सिरिएक एबी फिलिप्स. आयुष मंत्रालय की ओर से उन्हें मेमोरेंडम जारी किया गया है. इसमें लिखा है कि डॉ. फिलिप्स आयुर्वेदिक प्रणाली का अपमान कर रहे हैं. वहीं, फिलिप्स ने ये मेमोरेंडम ट्विटर पर साझा करते हुए मंत्रालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

क्या है मेमोरेंडम में?

इसमें लिखा है,

मंत्रालय को यूट्यूब पर एक वीडियो मिला है जो 21 जून 2021 को पब्लिश हुआ था. इसमें पाया गया कि कोच्चि के राजागिरी हॉस्पिटल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सिरिएक एबी फिलिप्स आयुर्वेदिक प्रणाली से जुड़ी दवाओं का ये कहते हुए अपमान कर रहे हैं कि ये साइंटफिक नहीं हैं. इस तरह इंटरव्यू देना और उसे पब्लिश करना भ्रामक है. ये आयुष में लोगों की आस्था को कम करने वाला है. इस संदर्भ में सलाह दी जाती है कि इस इंटरव्यू को सोशल मीडिया और अन्य तमाम जगहों से हटाया जाए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो मानहानि की कार्रवाई होगी.

डॉक्टर ने क्या कहा?

मेमोरेंडम मिलने के बाद डॉ. सिरिएक एबी फिलिप्स ने ट्विटर पर कई ट्वीट किए हैं. उन्होंने लिखा है,

आयुष मंत्रालय, जो भारत में चिकित्सा की वैकल्पिक प्रणालियों पर काम करता है, ने मुझे चुप रहने और जहरीली हर्बल दवाओं और झोलाछाप चिकित्सा पद्धतियों के बारे में बात ना करने की चेतावनी दी है. इसीलिए वो भारत और मेरे राज्य के अधिकांश चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर मुझे लेकर चिंता जताता है.

डॉ. फिलिप्स ने उसी इंटरव्यू का वीडियो डालते हुए दावा किया कि इसमें आयुष प्रणाली की निंदा की गई है, लेकिन उनकी बातें तथ्यों पर आधारित और सार्वजनित स्वास्थ्य के हित में हैं. उन्होंने ये भी कहा कि उनका वीडियो छद्म विज्ञान का विरोध करता है, जिससे आयुष मंत्रालय और (चिकित्सा के नाम पर) ठगी करने वाले उत्तेजित हो गए हैं.

एक और ट्वीट में उन्होंने दावा किया कि आयुर्वेद के सुरक्षा और अवैज्ञानिक दावों के बारे में चिंता जताने वाले कुछ आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी आयुष अधिकारियों ने धमकाया और चेतावनी दी है. डॉ. फिलिप्स ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य को जोखिम में डालते हुए कुछ लोगों का धंधा हमेशा की तरह चल सके.

डॉक्टर फिलिप्स ने लिखा है,

आयुष विज्ञान नहीं है, ना ही साक्ष्यों पर आधारित अभ्यास. इसलिए ये जन स्वास्थ्य विरोधी है. ये एक व्यवसाय है. हमें विज्ञान को आगे बढ़ाने और स्वास्थ्य देखभाल में मिथकों और परंपराओं को दूर करने के लिए एक मजबूत संगठन की आवश्यकता है.

ये अजीब है कि कैसे जनता के पैसे से पोषित एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन स्वास्थ्यकर्मियों (चिकित्सक, शोधकर्ता) को बिना परीक्षण वाली हर्बल दवाओं के बारे में बताने के लिए कह रहा है ताकि जनता जोखिम में रहे. मैं हजारों लोगों की सुरक्षा के बारे में चिंतित हूं और शायद अधिक लोगों को ये विश्वास करने के लिए धोखा दिया जाता है कि हर्बल दवाएं सुरक्षित हैं.

पूरा मामला क्या है?

अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने 18 जुलाई 2021 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की. बताया गया कि AMAI के महासचिव डॉ. सदाथ दिनाकर ने पीएम नरेंद्र मोदी और केरल के सीएम पी विजयन को पत्र लिखकर डॉ. फिलिप्स की शिकायत की थी. उन पर आरोप लगाया था कि वे आयुर्वेदिक दवाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. आरोप के पीछे उन्होंने डॉ. फिलिल्स के उसी वीडियो का जिक्र किया, जिसे बीती 21 जून को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था.

वीडियो में डॉ. फिलिप्स ने आयुर्वेद को लेकर काफी कुछ कहा था. पत्र में डॉ. दिनाकर ने आरोप लगाया था कि डॉ. फिलिप्स ने आयुष विभाग को ‘अवैज्ञानिक’ बताया और COVID-19 की रोकथाम के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए इम्यूनिटी बूस्टर को लीवर सेल्स के लिए खतरनाक करार दिया.

AMAI के महासचिव के मुताबिक, डॉ. फिलिप्स ने ये भी दावा किया कि उनसे कंसल्ट करने वाले 1440 रोगियों में से 34 को आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन के कारण लीवर से संबंधित रोग हो रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने दवाओं की अच्छी मैन्युफैक्चरिंग करने वाली सर्टिफाइड कंपनियों के लिए कहा कि वे ‘नीमहकीम को बढ़ावा’ देती हैं.

डॉ. दिनाकर ने ये आरोप भी लगाया था कि डॉ. फिलिप्स ने आयुर्वेदिक दवाओं के अध्ययन के लिए आयुष विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया, उनके तर्क उनकी मान्यताओं पर आधारित थे ना कि वैज्ञानिक अध्ययनों पर. इन बातों के आधार पर AMAI के पदाधिकारी ने मांग की कि डॉ. फिलिप्स का पंजीकरण रद्द किया जाए और YouTube चैनल के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए.

वहीं, डॉ. फिलिप्स ने उस समय द हिंदू से बातचीत में कहा था कि AMAI महासचिव की शिकायत का कोई कानूनी आधार नहीं है और ना ही उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है. फिलिप्स ने कहा था कि वीडियो में उन्होंने आयुष विभाग का नाम ही नहीं लिया था.


आयुष मंत्रालय सचिव पर तमिलनाडु के डॉक्टर्स और सांसद क्यों सवाल उठा रहे हैं?

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