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घर जाने को लेकर राजकोट में 500 मज़दूरों का सब्र जवाब दे गया, सड़क पर उतरे

लॉकडाउन के बीच प्रवासी मज़दूरों को घर पहुंचाने के लिए ट्रेन से लेकर बस तक चला दी गई. लेकिन ये सुविधाएं सभी मज़दूरों तक अभी भी नहीं पहुंच पा रही हैं. इसी वजह से अब गुजरात के राजकोट में मज़दूरों का सब्र टूट गया. घर जाने की मांग को लेकर प्रवासी मजदूर 17 मई को सड़क पर उतर आए.

राजकोट में रविवार को करीब 500 मज़दूर अपने-अपने राज्य जाने के लिए जुटे थे. लेकिन न तो उन्हें बस मिली, न ही श्रमिक स्पेशल ट्रेन. ट्रांसपोर्ट को लेकर किसी तरह की कोई जानकारी भी नहीं मिल पा रही थी. इसी बात पर मज़दूरों का गुस्सा भड़क गया. शापर-वेरावल हाइवे पर मज़दूर जुटे और जमकर हंगामा किया. गाड़ियों की जमकर तोडफोड़ की.

राजकोट के पुलिस अधीक्षक बलराम मीणा यहां पहुंचे. मज़दूरों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामे के बीच वे भी घायल हो गए. कुछ पत्रकार और पुलिसकर्मी भी घायल हुए. पुलिस को आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े. फिर तमाम दिलासे देने के बाद मज़दूरों को शांत कराया जा सका. इंडिया टुडे रिपोर्टर गोपी घांघर ने बताया कि मामले में 25 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. बाकियों की अभी पहचान की जा रही है.

दो और राज्यों में मज़दूरों ने घर जाने का कोई साधन न मिलने पर हंगामा किया. पैदल ही घर जा रहे मज़दूरों ने हरियाणा के यमुना नगर में हाइवे जाम कर प्रदर्शन किया. वहीं, उत्तर प्रदेश में भी कानपुर-लखनऊ हाइवे पर प्रदर्शन किया. दिल्ली में भी यूपी बॉर्डर पर बड़ी तादाद में मज़दूर जमा हो गए थे. बता दें कि कुछ दिन पहले सूरत में भी प्रवासी मज़दूरों ने घर जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था.


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