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लॉकडाउन के कायदे समझाने के लिए पुलिस ने 72 बरस के बुजुर्ग से उठक-बैठक लगवा दी

मध्य प्रदेश का बैतूल ज़िला. यहां का कोसमी इलाका. यहां 72 बरस के गजन बड़करे रहते हैं. सड़क किनारे सब्ज़ी की छोटी सी दुकान लगाते हैं. लॉकडाउन के वक्त भी वो अपना काम कर रहे थे, क्योंकि परिवार का पेट पालना है. लेकिन इसी काम के चक्कर में पुलिसवालों ने उन्हें कठोर सज़ा दे डाली. गजन जो बुढ़ापे के कारण ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते, पुलिस ने उनसे 10 मई की शाम 10 उठक-बैठक लगवाए.

छिंदवाड़ा कांग्रेस आईटी सेल ने फेसबुक पर इस घटना का एक वीडियो डाला. पुलिस के रवैये पर सवाल खड़ा किया. ‘इंडिया टुडे’ से जुड़े राजेश भाटिया ने मामले की और जानकारी दी. बताया कि डिप्टी रेंजर श्रीराम पिम्पलकर ने गजन को ये सज़ा दी थी.

क्यों दी सज़ा?

श्रीराम पिम्पलकर का कहना है कि लॉकडाउन के नियम के मुताबिक, सुबह 7 से 11 ही सब्ज़ी की दुकानें खोलने के निर्देश हैं. गजन ने देर तक दुकान खोल रखी थी. वो कहते हैं,

‘दो-तीन बार पहले समझाया था, लेकिन जब नहीं माने तो उनसे उठक-बैठक लगवाई. हिदायत दी कि आगे से लॉकडाउन के नियमों का पालन करें. नगर पालिका के अधिकारी लोग भी हमारे साथ थे. वो कार्रवाई करते. हमने सोचा बुजुर्ग हैं, इसलिए उठक-बैठक लगवा कर छोड़ दिया.’

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डिप्टी रेंजर श्रीराम पिम्पलकर, जिन्होंने सज़ा दी. (फोटो क्रेडिट- राजेश भाटिया)

बुजुर्ग क्या कहते हैं?

राजेश भाटिया ने गजन बरकड़े से बात की. उन्होंने बताया कि उन्हें सब्ज़ी की दुकान खोलने और बंद करने का वक्त नहीं पता था. आगे कहा,

‘समय पता नहीं था. हम दुकान पर बैठे थे. वो (पुलिस) आए और उन्होंने हमसे उठक-बैठक लगवाई. मैं कह भी रहा था कि हम दुकान बंद कर देंगे, लेकिन उन्होंने कुछ सुना नहीं. मेरी उम्र 71-72 साल है. बहुत तकलीफ हुई. अगर वो हमें समझा देते तो हम समझ जाते. जो हुआ गलत हुआ.’

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बुजुर्ग गजन बरकड़े, इनसे ही उठक-बैठक लगवाई गई. (फोटो क्रेडिट- राजेश भाटिया)

प्रशासन क्या कहता है?

श्रद्धा जोशी, एडिशनल एसपी हैं. राजेश भाटिया ने उनसे भी बात की. उनका कहना है कि बुजुर्गों के साथ इस तरह का बर्ताव होना अमानवीय है. साथ ही ये भी कहा कि वो इस मामले में सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) को भी जानकारी देंगी. श्रद्धा जोशी कहती हैं,

‘लॉकडाउन में 7 से 11 बजे तक सब्ज़ी की दुकानें खोलने की परमिशन है. वैसे भी बुजुर्गों को कोरोना के वक्त थोड़ा संभलकर रहना होगा. दूसरा अगर इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो ये बिल्कुल ठीक नहीं है. कोई अगर बुजुर्ग है और नियमों का उल्लंघन कर रहा है, तो उसे समझाया जाए, इस तरह की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. मैंने भी उसे देखा तो लगा कि वो ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा. इसलिए मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए काम करना चाहिए.’

सोशल मीडिया पर ये वीडियो इस वक्त काफी वायरल हो रहा है. जो भी इसे देख रहा है बुजुर्ग के प्रति संवेदना जता रहा है.


वीडियो देखें: दिल्ली के उत्तरी निगम के अस्पतालों में काम कर रहे मेडिकल स्टाफ को सैलरी नहीं मिल रही!

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