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काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: चश्मदीद ने कहा- कयामत क्या होती है, मैंने यहां देख लिया

काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गुरुवार, 26 अगस्त की देर शाम हुए धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 100 के पार हो गई है. पहला धमाका अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के एब्बी गेट के बाहर हुआ था. दूसरा धमाका एब्बी गेट से थोड़ी दूरी पर स्थित बैरन होटल के पास हुआ. पेंटागन के मुताबिक़, इस हमले में 13 अमेरिकी मारे गए, जिनमें 12 कमांडो थे. काबुल एयरपोर्ट पर हमले की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (IS) के खोरासान ग्रुप ने ली है. आईएस ने इसे आत्मघाती हमला बताया है. कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस हमले का खौफनाक मंजर बयां किया है.

न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, इंटरनेशनल डेवलपमेंट ग्रुप के पूर्व कर्मचारी जो इस हमले के प्रत्यक्षदर्शी हैं, उन्होंने अपने अनुभव साझा किए हैं. वे एयरपोर्ट के आसपास जमा उन हजारों लोगों में शामिल थे, जो अफगानिस्तान से निकलने वाली फ्लाइट्स में चढ़ने की जद्दोजहद में जुटे थे. वह करीब 10 घंटे तक एयरपोर्ट के एब्बी गेट के पास कतार में खड़े रहे. शाम करीब पांच बजे एक जोरदार धमाका हुआ. उन्होंने बताया,

यह ऐसा था जैसे किसी ने मेरे पैरों के नीचे से जमीन खींच ली हो. एक पल के लिए मुझे लगा कि मेरे कान के परदे फट गए हैं. मैंने सुनने की शक्ति खो दी है. मैंने देखा कि बॉडी और बॉडी के अंग हवा में उड़ रहे हैं जैसे कोई बवंडर प्लास्टिक की थैलियों को हवा में उड़ा ले जाता है. मैंने शवों और घायलों को विस्फोट स्थल पर बिखरे हुए देखा. इनमें आदमी, औरतें और बच्चे भी शामिल थे. कहा जाता है कि जिंदा रहते कयामत को देखना संभव नहीं है, लेकिन आज मैंने कयामत देखी. मैंने इसे अपनी आंखों से देखा है.

हमले की आंखों देखी बयान करने वाले अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते. उन्हें डर है कि कहीं तालिबान उन्हें निशाना न बना ले. इनमें से अधिकांश लोग पिछली सरकार और सिविल सोसायटी ग्रुप से जुड़े थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया,

(ब्लास्ट के बाद) सिचुएशन को हैंडल करने वाला कोई नहीं था. शवों को हटाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाला कोई नहीं था. हमले में मारे गए और घायल लोग सड़क और नाले में पड़े थे. उसमें बह रहा पानी खून के रंग में बदल गया था. मैं शारीरिक रूप से ठीक हूं… लेकिन मुझे नहीं लगता कि जो मानसिक घाव और झटका मुझे इस विस्फोट से लगा है, वह मुझे कभी सामान्य जीवन जीने देगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम हमले में तालिबान के भी कम से कम 28 लोग मारे गए हैं. तालिबान के एक अधिकारी ने कहा भी कि इन धमाकों में अमेरिकियों से ज़्यादा हमारे लोग मारे गए हैं. हालांकि इसके बावजूद तालिबान के अधिकारी ने कहा कि अमेरिकियों को 31 अगस्त के बाद अफ़ग़ानिस्तान में रुकने की कोई ज़रूरत नहीं है.


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