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नागरिकता संशोधन बिल पास होने पर IPS ऑफिसर ने विरोध में इस्तीफा दिया

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 यानी CAB 11 दिसंबर को राज्यसभा में भी पास हो गया. लोकसभा में 9 दिसंबर को ही पास हो गया था. दोनों सदनों में गृहमंत्री अमित शाह ने ये बिल पेश किया था. देश के कई हिस्सों में कई लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं. 11 दिसंबर को जब राज्यसभा में इसे पास किया गया, तो इसके विरोध में एक आईपीएस अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया.

अधिकारी का नाम अब्दुर रहमान है. 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग में स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल के पद पर हैं. ट्विटर पर उन्होंने CAB का विरोध करते हुए लिखा,

‘नागरिकता संशोधन बिल 2019 संविधान की बुनियाद के खिलाफ है. मैं इस बिल की निंदा करता हूं. मैंने इस बिल की अवज्ञा करते हुए फैसला लिया है कि मैं कल से ऑफिस अटेंड नहीं करूंगा. मैं अब आखिरकार अपनी सेवाएं छोड़ रहा हूं. ये बिल भारत के धार्मिक बहुलवाद के खिलाफ है. मैं न्याय को पसंद करने वाले हर एक इंसान से अपील करता हूं कि लोकतांत्रिक तरीके से इस बिल का विरोध करें. ये संविधान की सबसे बुनियादी विशेषता के खिलाफ है.’

अब्दुर रहमान ने इस साल अगस्त में VRS यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए भी आवेदन किया था. इस बात की जानकारी भी उन्होंने ट्विटर के जरिए दी. उन्होंने अपने दोनों ट्वीट में कुछ दस्तावेज अटैच किए. इनमें से एक में उनके VRS की जानकारी थी. अब्दुर ने लिखा,

‘मैं अपने VRS आवेदन की स्थिति के बारे में भी जानकारी देना चाहता हूं. मैंने अपनी सर्विस से VRS लेने के लिए 1 अगस्त को आवेदन दिया था. हालांकि 25 अक्टूबर, 2019 को आए एक लेटर के जरिए मुझे ये जानकारी मिली कि मेरे आवेदन को गृह मंत्रालय ने स्वीकार नहीं किया. मंत्रालय ने जल्दबाजी में ये फैसला लिया. मेरे खिलाफ कोई जांच नहीं चल रही है, कोई चार्जशीट पेंडिंग नहीं है. मेरे खिलाफ कोई कारण बताओ नोटिस भी पेंडिंग नहीं है. इसलिए मेरे आवेदन का रिजेक्शन भी कानून और सर्विस के नियम के खिलाफ हुआ. फिर 6 नवंबर को गृह मंत्रालय के फैसले को चुनौती देते हुए मुंबई सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल को आवेदन दिया गया. लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि मैं 12 दिसंबर से ऑफिस अटेंड करने की हालत में नहीं हूं. अगर कोर्ट मेरे VRS की अपील को स्वीकार नहीं करता है, तो ये आवेदन मेरे इस्तीफे के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.’

ये आवेदन महाराष्ट्र होम डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को दिया गया. इसके अलावा अब्दुर ने एक दूसरा दस्तावेज भी ट्वीट किया. जिसमें उन्होंने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया. लिखा,

‘ये बिल साफ तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों के खिलाफ है. पूरी तरह से असंवैधानिक है. संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 25 का उल्लंघन करता है. धर्म किसी व्यक्ति को नागरिकता देने और नहीं देने का आधार नहीं बन सकता. इस बिल के पीछे का मकसद देश को धर्म के आधार पर बांटने का है. ये बिल मुस्लिम समुदाय के लोगों के मन में डर पैदा कर रहा है. ये मुस्लिमों के ऊपर दबाव डाल रहा है कि अपनी नागरिकता बचाने के लिए वो अपना धर्म छोड़कर कोई दूसरा धर्म अपना लें. ये बिल पूरी तरह से देश का विभाजन करने वाला और असंवैधानिक है.

अगर NRC और CAB साथ में लागू कर दिए गए तो गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग जो भले ही अपने दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहें, उन्हें शरणार्थी घोषित करके भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी. इसका ये मतलब हुआ कि नागरिकता साबित करने का पूरा भार मुस्लिमों पर आया है.’

अब्दुर रहमान एक किताब भी लिख चुके हैं. उनकी किताब का टाइटल ‘डिनायल एंड डिप्राइवेशन’ है. इंडियन एक्सप्रेस से की गई बातचीत में उन्होंने अपनी किताब के बारे में कहा,

‘मैंने मुस्लिम समुदाय की हालत पर एक किताब भी लिखी है. मैंने देखा है कि सरकार लगातार एक निश्चित समुदाय को टारगेट करते आ रही है. मेरा इस्तीफा इसके ही खिलाफ है.’

ये सारे कारण बताते हुए अब्दुर रहमान ने इस्तीफा दे दिया. नागरिकता संशोधन बिल के बारे में ज्यादा जानकारी पाने के लिए यहां क्लिक करें.


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