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धोनी ने अंपायरों को धमकाया मगर सजा के नाम पर ये किसी मजाक से कम नहीं

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महेंद्र सिंह धोनी की बहुत चर्चा होती है. उनकी कप्तानी की कसीदे पढ़े जाते हैं. उन्हें सबसे कूल कप्तान माना जाता है. मगर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में जब धोनी डगआउट से उठकर मैदान पर अंपायरों से भिड़ने पहुंच गए तो धोनी की इस कूल इमेज को झटका लगा है. धोनी का इस तरह नियमों के खिलाफ जाकर अंपायरों से बहस करना किसी को सही लग रहा है मगर ज्यादातर को खराब लग रहा है. क्रिकेट के जानकारों की राय भी इस पर बंटी हुई है. धोनी को कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने के लिए मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माने के तौर पर देने होंगे. उन्हें आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.20 के लेवल 2 का दोषी पाया गया है. इसके तहत मैच फीस का 50-100 फीसदी जुर्माना के साथ साथ दो मैच तक का बैन भी हो सकता है.

अब इसपर जो सबसे तीखी रिएक्शन आई वो है पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी. बेदी ने कहा कि ” धोनी पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना लगाकर मजाक किया गया है. क्रिकेट का इतना बुरा चेहरा कभी नहीं देखा. गेम से बड़ा कोई नहीं हो सकता है. स्थापित खिलाड़ियों को हमेशा अनुशासन का उदाहरण बनकर पेश होना चाहिए.”

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वहीं राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज जोस बटलर ने कहा है कि शायद धोनी का इस तरह मैदान में दाखिल होना सही नहीं था. उस वक्त काफी टेंशन वाला माहौल था और हर रन बेशकीमती साबित हो रहा था. मगर कुछ भी हो मैदान में दाखिल होना सही नहीं था.” वही चेन्नई के कोच स्टीफन फ्लेंमिंग ने कहा कि धोनी इसलिए मैदान तक चले गए क्योंकि नो बॉल न दिए जाने से एक कन्फ्यूजन पैदा हो गई थी.

जो भी हो क्रिकेट नियमों के हिसाब से अंपायर नो बॉल के निर्णय को करेक्ट कर सकते हैं. जैसे फील्ड अंपायर ने इसे नो बॉल दिया तो लेग अंपायर ने इसे नो बॉल नहीं दिया. इसके लिए थर्ड अंपायर की मदद नहीं ली जा सकती. जब इसमें कोई आउट होता है, तभी थर्ड अंपायर इसे रिव्यू कर सकता है.  हमेशा धोनी के पीछे चलने वाली जनता को भी इस बार लगा है कि धोनी ने थोड़ा ज्यादा ही कर दिया. सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है कि धोनी पर नाम भर का फाइन किया गया है. उन पर कुछ मैच का बैन भी होना चाहिए. देखिए कुछ सोशल मीडिया रिएक्शन्स

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धोनी का इस तरह मैदान में जाकर अंपायरों से बहस करना एक और बात की ओर इशारा करता है. वो है आईपीएल में फ्रैचाइजी का प्रेशर. हर हाल में जीत. इसी के चक्कर में खिलाड़ी यहां जी जान लगाते हैं. मगर क्रिकेट के नियमों और अंपायरों के निर्णयों पर एक लिमिट के बाहर जाकर रिएक्ट करना सही नहीं है.


 

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