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हैदराबाद डॉक्टर रेप केस: चारों आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए

हैदराबाद रेप केस में चारों आरोपियों को पुलिस ने मार दिया. ख़बरों के मुताबिक, रात के तीन बजे पुलिस चारों आरोपियों को लेकर वारदात वाली जगह पर गई. नेहरू-OR प्लाज़ा से कुछ मीटर दूर की वो जगह, जहां डॉक्टर की जली हुई लाश मिली थी. ये जगह हैदराबाद के पास नैशनल हाई वे-44 पर है. पुलिस क्राइम सीन रिक्रिएट करने गई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह के वक़्त धुंध थी. इस धुंध का फ़ायदा उठाकर चारों आरोपियों ने भागने की कोशिश की. उन्हें रोकने और पकड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने एनकाउंटर में उन्हें मार दिया.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, चारों आरोपियों ने पहले पुलिस टीम पर हमला किया. इसके बाद चारों में से एक आरोपी ने बाकी तीनों को भागने का इशारा किया. चारों ने एक सुनसान और खाली रास्ते पर दौड़ लगा दी. पुलिस का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई उनपर. साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वी सी ने कहा-

अगर आरोपी पुलिस पर हमला करते हैं, तो क्या पुलिस बस देखती रहेगी?

मारे गए चारों आरोपियों के नाम हैं- जॉली शिवा, मुहम्मद आरिफ़, जोलू नवीन और केशवालु.

साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वी सी सज्जनर ने न्यूज़ एजेंसी PTI को बताया-

हैदराबाद रेप और मर्डर केस के चारों आरोपी आज तड़के सुबह पुलिस के साथ क्रॉसफायरिंग में मारे गए.

पुलिस कमिश्नर ने ‘क्रॉसफायरिंग’ में आरोपियों के मारे जाने की बात कही. तो क्या आरोपियों के पास भी हथियार थे? क्या उन्होंने भी फायरिंग की थी? अगर हां, तो उनके पास हथियार कहां से आए? फिलहाल इन सवालों के जवाब नहीं हैं. हैदराबाद पुलिस जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस एनकाउंटर का घटनाक्रम बताने वाली है.

न्यूज़ एजेंसी PTI ने साइबराबाद पुलिस कमिश्नर के हवाले से बताया कि 6 दिसंबर की तड़के सुबह क्रॉसफायरिंग में चारों आरोपी मारे गए (फोटो: PTI)
न्यूज़ एजेंसी PTI ने साइबराबाद पुलिस कमिश्नर के हवाले से बताया कि 6 दिसंबर की तड़के सुबह क्रॉसफायरिंग में चारों आरोपी मारे गए (फोटो: PTI)

एनकाउंटर पर सवाल भी उठने लगे हैं
इस डिवेलपमेंट पर सोशल मीडिया में प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. कुछ लोग पुलिस को शाबाशी दे रहे हैं. इस एनकाउंटर के लिए पुलिस की तारीफ़ कर रहे हैं. कुछ लोग इस एनकाउंटर पर सवाल भी उठा रहे हैं. एनकाउंटर के तरीके पर भी सवाल उठ रहे हैं. इसकी बड़ी वजह ये है कि चारों आरोपी मारे गए. चारों को गोली लगी. पूछा जा रहा है कि क्या एनकाउंटर के समय उनके हाथ में हथकड़ी थी? अगर नहीं, तो क्यों? क्या क्राइम सीन पर ले जाने के बाद उनकी हथकड़ी खोली गई? किस तरह के हालात बने कि चारों भागने लगे? और किस तरह पुलिस को चारों को गोली मारनी पड़ी? गोली कहां मारी गई?

शुरुआती शिकायत की अनदेखी करके पुलिस ने टाइम गंवाया
हैदराबाद रेप केस की वारदात 27 नवंबर की है. जिस 26 साल की लड़की के साथ अपराध हुआ, वो वेटनरी डॉक्टर थी. 27 नवंबर की शाम साढ़े पांच बजे वो घर से निकली. रात 9.22 मिनट पर उसने अपनी बहन को फोन किया. बताया कि उसे डर लग रहा है. उसकी स्कूटी का टायर पंचर हो गया था. कुछ लोग उसके पास आकर मदद देने की बात कह रहे थे. मगर डॉक्टर को वो ठीक नहीं लग रहे थे. यही बात उसने बहन को फोन पर बताई. बहन ने कहा, वो उनसे बात करती रही. इसके बाद रात 9.45 पर बहन ने उसे कॉल किया. फोन स्विच ऑफ आ रहा था. बहन राजीव गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट थाने पर शिकायत लिखवाने पहुंची. मगर वहां पुलिस ने कहा कि टोल प्लाजा उनके अधिकारक्षेत्र में नहीं आता. परिवार का आरोप है कि यहां पुलिस ने उनसे कहा कि शायद उनकी बहन किसी के साथ भाग गई हो. पुलिस ने उनसे ये भी पूछा कि क्या उसका (डॉक्टर) किसी के साथ अफेयर था.

एक दूधवाले ने शरीर जलता देखा
यूं इस तरह बेहद ज़रूरी और क्रूशिअल समय बर्बाद हुआ. जिसे अगर गंवाया न गया होता, तो शायद डॉक्टर को बचाया जा सकता था. रात 3.10 बजे आख़िरकार शादनगर पुलिस थाने ने परिवार द्वारा लिखवाई गई शिकायत दर्ज़ की. ये गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई गई थी. उधर सुबह के पांच बजे चाटनपल्ली गांव का एक दूधवाला वारदात वाली जगह से होकर गुजरा. उसने कुछ जलते हुए देखा. उसे लगा, शायद किसी ने ठंड से बचने के लिए आग जलाई हो. मगर दो घंटे बाद, सुबह के तकरीबन सात बजे जब वो उस जगह से वापस गुजरा, तो देखा आग अब भी जल रही है. उसने पास जाकर देखा, तो आग में एक इंसानी शरीर जलता नज़र आया. दूधवाले ने पुलिस को फोन करके जानकारी दी. और इस तरह डॉक्टर के साथ हुए भीषण अपराध की बात सामने आई.

फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिया गया था ये केस
पुलिस ने चारों आरोपियों- जॉली शिवा, मुहम्मद आरिफ़, जोलू नवीन और केशवालु को अरेस्ट कर लिया था. ये चारों लॉरी में ड्राइवर और क्लीनर का काम करते थे. इस रेप केस पर तेलंगाना सरकार की काफी आलोचना हुई. सोशल मीडिया पर भी काफी नाराज़गी थी लोगों में. कई जगहों पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया. 1 दिसंबर को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने इस केस की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया. सरकार ने महबूबनगर ज़िले के फर्स्ट अडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन्स जज की अदालत को इस केस का जिम्मा सौंपा.

डॉक्टर के परिवार की शुरुआती शिकायत की अनदेखी करने के लिए तेलंगाना पुलिस की काफी छीछालेदर हुई. इस बैकड्रॉप में तेलंगाना सरकार ने कहा कि महिलाओं से जुड़े अपराध और उनकी गुमशुदगी के मामलों में पुलिस को तत्काल शिकायत दर्ज़ करनी चाहिए. ये भी कहा गया कि ज़ीरो FIR सिस्टम का भी पालन किया जाए. ज़ीरो FIR ऐसी व्यवस्था है, जिसमें अपराध चाहे कहीं भी हुआ हो, उसकी शिकायत किसी भी थाने में दर्ज़ करवाई जा सकती है. ऐसी स्थिति में थाना ये नहीं कह पाता कि फलां जगह उनके ज्यूरिस्डिक्शन में नहीं आती और इसीलिए वो शिकायत दर्ज़ नहीं कर सकते.


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