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कासगंज कांड के मुख्य आरोपी मोती धीमर की क्राइम कुंडली जान लीजिए

दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर है कासगंज. एटा और अलीगढ़ के पास है. काली नदी और गंगा नदी आस-पास बहती हैं. साथ ही यहां कटरी का इलाका भी है. यानी ऐसा इलाका, जो अपराधियों के लिए काफी मुफीद है. यहीं मोती धीमर नाम के अपराधी का शराब का अवैध कारोबार चलता रहा है. हाल ही में बुलंदशहर और ग्रेटर नोएडा में नकली शराब से करीब डेढ़ दर्जन मौतों के बाद सरकार सख्त हुई. दो पुलिसवाले मोती धीमर के घर पर कुर्की को नोटिस लगाने गए. आरोप है कि मोती धीमर और उसके लोगों ने एक पुलिसवाले को पीट-पीटकर मार डाला, और दूसरा मरणासन्न हालत में मिला. आइए बताते  हैं, कौन है मोती धीमर और क्या है उसकी हिस्ट्रीशीट में.

पुलिसवालों को बेरहमी से पीटा

कासगंज में थाना सिढ़पुरा इलाके में एक गांव है जिसका नाम है नगला धीमर. सब इंस्पेक्टर अशोक और सिपाही देवेंद्र यहां पहुंचे थे. मकसद था अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाना. लेकिन शायद शराब माफिया को पुलिस के आने की खबर पहले ही मिल गई थी. आरोप है कि मोतीराम उर्फ मोती धीमर और उसके साथियों ने दोनों पुलिसवालों को बुरी तरह मारा. पेड़ से बांधकर पीटा गया. वर्दी फाड़ दी. भाले से भोंकने के भी आरोप हैं. खबर मिलने पर थाने से फोर्स आई तो सिपाही देवेंद्र की लाश गांव के बियाबान में मिली. काफी तलाश के बाद दरोगा अशोक कुमार गंभीर स्थिति में एक खेत में मिले.

Kasganj sub inspector
घायल दरोगा को ले जाते पुलिसकर्मी. फोटो- आजतक

मामला गंभीर था. खबर लखनऊ तक पहुंची. सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. कासगंज पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी. काली नदी के खादर इलाके में अपराधियों की मौजूदगी की खबर मिली. इंडिया टुडे से जुड़े रिपोर्टर देवेश पाल सिंह के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि जब फोर्स मौके पर पहुंची तो बदमाशों ने गोली चला दी. जवाबी फायरिंग में एक बदमाश को गोली लगी. बाकी फरार हो गए. घायल बदमाश की अस्पताल में मौत हो गई. पता चला कि उसका नाम एलगार था और वह मोती का भाई था. एलगार पर भी 4 मुकदमे दर्ज थे. मोती अभी भी पुलिस को गिरफ्त से बाहर है.

हिस्ट्रीशीटर मोतीराम उर्फ मोती धीमर

पुलिस के मुताबिक, मोती धीमर शराब माफिया है. नगला धीमर में अवैध शराब बनाई जाती है. ये पूरा काम मोती की देखरेख में ही होता रहा है. मोती पर 11 बार केस दर्ज हुए. उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई, लेकिन वह जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं है, इसका जवाब फिलहाल किसी अधिकारी के पास नहीं है.

Moti Dhimar
मोतीराम की हिस्ट्रीशीट

118A. यही है मोतीराम की हिस्ट्रीशीट का नंबर. पहला मामला जो मोतीराम के खिलाफ दर्ज हुआ, वो था महिला की गरिमा भंग करने का. फिर गुंडा एक्ट, आबकारी अधिनियम, आयुध अधिनियम, सब उसकी हिस्ट्रीशीट का हिस्सा बनते चले गए. उसके आपराधिक कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिढ़पुरा थाने में जो टॉप-10 अपराधियों की लिस्ट बनी है, उसमें मोती का नाम पहले नंबर पर है.

2015 में पहली बार आबकारी अधिनियम के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. शराब के काले धंधे को लेकर. 2019 और 2020 में उस पर आबकारी के तीन और मुकदमे दर्ज किए गए. 2020 वाले मामले में वो अभी तक फरार है. पुलिस और आबकारी विभाग का दावा है कि वे लगातार कार्रवाई करते रहे लेकिन मोती बचता रहा. आखिर ये सब कैसे हो पाया? और अब जब पुलिसवाले कुर्की का नोटिस लेकर उसके घर पहुंचे, तो वह पुलिसवालों की जान लेने से भी नहीं हिचका. कानपुर के बिकरू के विकास दुबे कांड के साथ अगर कासगंज कांड की तुलना हो रही है, तो इसमें कोई हैरानी भी नहीं है.

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने कहा है कि मोती धीमर पुलिसवालों पर हमले का मुख्य आरोपी है. जल्द ही उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी मामले को दुखद बताया और कहा है कि लखनऊ से टीमों को भेजा गया है. एक आरोपी काउंटर फायरिंग में मारा गया है. बाकी के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.


वीडियो- जहरीली शराब का पूरा तिया-पांचा समझ लीजिए, जानें कैसे खेला जा रहा है ये खेल

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