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हाईकोर्ट की रोक पर गुजरात के मंत्री बोले, बेटियों को 'लव जिहाद' से बचाने को लाए कानून

गुजरात सरकार ने 15 जून को एक कानून नोटिफाई किया- Gujarat Freedom of Religion (Amendment) Act, 2021. धर्मांतरण विरोधी इस कानून (Anti-conversion Law) के कई प्रावधानों पर गुजरात हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. सरकार ने रोक हटाने की अर्जी डाली तो कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया. इसके कुछ ही घंटों बाद राज्य के गृह और कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने बयान दिया कि हमारी बेटियों के साथ खिलवाड़ करने वाली जिहादी ताकतों को नष्ट करने के हथियार के रूप में ये एंटी लव जिहाद कानून लाया गया था. धर्मांतरण विरोधी कानून का राजनीतिक एजेंडा नहीं है. हम हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

धारा-5 में क्या खास है?

इस anti-conversion law की एक धारा है, धारा-5. ज्यादातर विवाद इसी को लेकर है. इसके अनुसार धर्म परिवर्तन करने से पहले जिला मैजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करवा रहा है, उसे भी जिला मैजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी. हाईकोर्ट ने इस धारा पर भी अगले आदेश तक रोक लगा रखी है. 19 अगस्त को हाईकोर्ट ने संशोधित कानून की जिन धाराओं पर रोक लगाई, उनमें वह प्रावधान भी शामिल है, जिसके तहत अंतरधार्मिक शादियों को जबरन धर्मांतरण का आधार बताया गया है. गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रम नाथ ने उस समय कहा था,

अगर एक धर्म का व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ बिना बल के प्रयोग, बिना किसी प्रलोभन और बिना कपटपूर्ण साधनों के शादी करता है, तो इसे गैरकानूनी धर्मांतरण के उद्देश्य से की गई शादी नहीं कहा जा सकता. ऐसे में हमारी राय है कि आगे की सुनवाई होने तक संशोधित कानून की धारा 3, 4, 4 C, 5, 6 और 6A को लागू नहीं किया जाएगा.”

मंत्री ने कहा, फर्जी शादी रोकने का नेक इरादा 

इस रोक को हटवाने की ताजा कोशिश नाकाम होने पर गुजरात सरकार के मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि धारा 5 धर्मांतरण विरोधी कानून का “मूल” है. धर्मांतरण विरोधी कानून को किसी राजनीतिक एजेंडा के तहत नहीं लाया गया है. यह  राज्य सरकार द्वारा लड़कियों की सुरक्षा का सिस्टम बनाने का ईमानदार प्रयास है. कुछ विरोधियों ने इसकी “गलत व्याख्या” की और हाईकोर्ट में चुनौती दे दी.

गृह और कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने आगे कहा,

हम हिंदुओं सहित सभी धर्मों की महिलाओं की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं. जिहादी तत्वों द्वारा लड़कियों को प्रताड़ित करने के खिलाफ हमने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ लव जिहाद पर कानूनी हथियार उठाया है. सरकार ने फर्जी हिंदू पहचान, प्रतीक और प्रलोभन देकर होने वाले फर्जी विवाह को रोकने के नेक इरादे से ये संशोधित कानून बनाया है.

सरकार ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?

इस कानून की धाराओं पर से रोक हटाने को लेकर गुरुवार को गुजरात सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कई दलीलें दी गईं. राज्य के एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने कहा कि 2003 के कानून में भी धारा 5 है और इसका अंतर-धार्मिक विवाह से कोई लेना-देना नहीं है. यह केवल धर्मांतरण की अनुमति लेने से संबंधित है, या तो शादी से पहले या बाद में, या फिर बिना शादी के मामलों में भी.

उन्होंने दलील दी कि सेक्शन 5 पर स्टे के बाद कोई भी अनुमति लेने के लिए नहीं आएगा, भले ही यह बिना शादी के स्वैच्छिक धर्मांतरण हो. कोर्ट के आदेश का मतलब है कि अब पूरा कानून रुक गया है. अन्य धाराएं जिन पर रोक लगाई गई है, वो विवाह से संबंधित हैं, जबकि धारा 5 कानूनी स्वैच्छिक धर्मांतरण से संबंधित है. वैध धर्मांतरण से जुड़ी धारा पर रोक क्यों लगाई जानी चाहिए.

इस पर बेंच ने कहा कि यह आपकी (सरकार की) व्याख्या है. अदालत ने धर्मांतरण के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त करने से संबंधित सभी धाराओं पर रोक लगाई है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अगर कोई कुंवारा धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे अनुमति की आवश्यकता होगी. हमने इस पर रोक नहीं लगाई. हमने सिर्फ शादी के जरिए धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई है. हमें 19 अगस्त के आदेश में बदलाव की कोई अच्छा कारण नहीं दिख रहा है. यह कहकर हाईकोर्ट ने संशोधित कानून की धाराओं पर से स्टे हटाने की मांग वाली अर्जी ठुकरा दी.


वीडियो: क्रांति सेना का ‘लव जिहाद’ पर ये कुतर्क सुनकर माथा पीट लेंगे आप!

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