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सैयद अली शाह गिलानी के शव को पाकिस्तानी झंडे में लपेटने के आरोप में UAPA के तहत केस

1 सितंबर को कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का निधन हो गया. आरोप है कि उनके शव को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया और कथित राष्ट्रविरोधी नारेबाजी हुई. इस मामले में पुलिस ने UAPA के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

इंडिया टुडे ने न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से लिखा है कि बड़गाम पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ UAPA और IPC की धाराओं को तहत केस दर्ज किया है. पुलिस ने उन वीडियो के आधार पर संज्ञान लेते हुए केज दर्ज किया है जिनमें गिलानी के शव को पाकिस्तानी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है. हालांकि पुलिस जैसे ही शव को अपने कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ी थी, गिलानी के सहयोगियों ने झंडे के हटा दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक वीडियो सोशल मीडिया पर आया था जिसमें अलगाववादी नेता गिलानी के शव को पाकिस्तानी झंडे में लिपटा दिखाया गया था. साथ ही सुपुर्दे खाक के दौरान राष्ट्रविरोधी नारेबाजी हुई थी. इसी मामले में जम्मू और कश्मीर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि 1 सितंबर को गिलानी के घर के बाहर, उनकी मृत्यु के बाद हुईं अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (गैरकानूनी गतिविधियों) के चलते पुलिस ने FIR दर्ज की है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक बड़गाम पुलिस ने इस मामले में FIR नंबर 277/2021 दर्ज की है और अज्ञात लोगों के खिलाफ UAPA भी लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार 3 सितंबर को जब घाटी में इंटरनेट सेवाएं बहाल की गई थीं तब सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो देखे गए जिनमें गिलानी के शव को पाकिस्तानी झंडे में लिपटा दिखाया गया था.

kashmirobserver.net की एक रिपोर्ट के मुताबिक गिलानी के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने गिलानी का शव छीन लिया और आनन-फानन में उसे दफना दिया. हालांकि पुलिस ने इस आरोप का खंडन किया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें परिवार के सदस्य, ज्यादातर महिलाएं, पुलिस के हस्तक्षेप का विरोध कर रही हैं और गिलानी के शरीर पर पाकिस्तानी झंडा लगा दिख रहा है.

इंटरनेट कर दिया गया था बंद

आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक गिलानी के निधन के बाद कश्मीर घाटी में इंटरनेट सस्पेंड कर दिया गया था. सुरक्षाबल भी मुस्तैद हो गए थे. वहीं एक अफवाह ये भी फैली थी कि पुलिस ने बलपूर्वक गिलानी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया था. लेकिन कश्मीर पुलिस ने इसका तुरंत खंडन किया और सभी से अफवाह पर विश्वास ना करने की अपील की थी.

29 सितंबर 1929 को सोपोर में जन्मे करीब 91 साल के सैयद अली शाह गिलानी का लंबी बीमारी के बाद अपने आवास पर ही देहांत हो गया था.गिलानी साल 2002 से किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. उनके परिवार में उनके दो बेटे और छह बेटियां हैं. उन्होंने 1968 में अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद दोबारा शादी की थी. उनके निधन पर जम्मू-कश्मीर के तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी. उनके शव को हैदरपोरा में मस्जिद के पास बने कब्रिस्तान में दफनाया गया.

हुर्रियत के अध्यक्ष भी रहे गिलानी

सैयद अली शाह गिलानी दशकों तक जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की सबसे मुखर आवाज रहे. 28 अगस्त, 1962 को अशांति फैलाने के आरोप में गिलानी को पहली बार हवालात का मुंह देखना पड़ा था. वो 13 महीने जेल में रहे. इस जेल यात्रा के दौरान उन्होंने अपने पिता को खो दिया. वह मातमपुर्सी के लिए घर भी नहीं जा पाए. यह गिलानी के जेल यात्रा की शुरुआत थी. तब से लेकर जीवित रहने तक गिलानी तकरीबन 16 साल से ज्यादा जेल में रहे. वह 1972 में सोपोर से विधायक बने. दो बार और उन्होंने विधानसभा में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 1989 में कश्मीर में इमरजेंसी के शुरुआती दौर में उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया. गिलानी के इस कदम ने उन्हें अलगाववादियों के नेता के तौर पर स्थापित कर दिया.

1993 में 26 अलगाववादी संगठनों ने मिलकर ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नाम का अम्ब्रेला संगठन बनाया. सैयद अली शाह गिलानी इसके अध्यक्ष बनाए गए. 2002 के विधानसभा चुनाव में लोन बंधुओं (बिलाल लोन और सज्जाद लोन) पर प्रॉक्सी कैंडिडेट खड़े करने के आरोप लगे. ऐसे में हुर्रियत दो टुकड़ों में बंट गई. पहले धड़े को मॉडरेट या नरमपंथी कहा गया. इसका नेतृत्व मिला मीर वाइज़ को. दूसरा कट्टरपंथी धड़ा बना गिलानी के नेतृत्व में. 2010 में उन पर देशद्रोह का मुकदमा लग चुका है. वह पाकिस्तान से अवैध फंडिंग के सिलसिले में नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी (NIA) की जांच के दायरे में भी रहे हैं. साल 2020 में पाकिस्तान ने उन्हें अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया था.


वीडियो- कश्मीर में बड़े एक्शन की तैयारी, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को बैन कर देगी मोदी सरकार?

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