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झारखंड के खूंटी में 5 लड़कियों के साथ जंगल में गैंगरेप हुआ था, कोर्ट ने फादर अल्फोंस को दोषी माना

झारखंड के खूंटी जिले के कोचांग का एक गांव है बुरूडीह. यहां की पहाड़ियों पर स्कॉट मैन मिडिल स्कूल है. इस स्कूल में 800 से ज्यादा लड़के और लड़कियां पढ़ते हैं. 19 जून 2018 को इस स्कूल में नुक्कड़ नाटक करने आईं पांच लड़कियों को अगवा कर लिया गया. जंगल में ले जाकर उनके साथ गैंग रेप किया गया था. 7 मई 2019 को खूंटी के जिला व सत्र न्यायाधीश प्रथम राजेश कुमार की अदालत ने 4 आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम किया है. कोर्ट ने फादर अल्फांसो को षड्यंत्रकारी मानते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी. उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. कोर्ट 15 मई को सजा सुनाएगी. हाईकोर्ट ने 2018 में फादर अल्फोंस को जमानत दे दी थी.

19 जून 2018 को हुआ क्या था
एफआईआर के मुताबिक 18 जून 2018 को खूंटी के पिस्टाकोली में आशा किरण नाम की संस्था के कुछ लोग नुक्कड़ नाटक करने पहुंचे थे. ये टीम मानव तस्करी के खिलाफ नुक्कड़ नाटक कर लोगों में जागरूकता फैलाती थी. नाटक के दौरान इस टीम की सिस्टर संगीता से एक शख्स मिला और उसने कहा कि वो कोचांग का मुखिया है. उसे उनका कार्यक्रम पसंद है और वो चाहता है कि कोचांग में भी ऐसा कार्यक्रम किए जाएं. सिस्टर ने पहले तो मना कर दिया, लेकिन उस आदमी के कहने पर टीम कोचांग में नाटक करने के लिए तैयार हो गई.

झारखंड का खूंटी जिले का वो स्कूल, जहां पर नुक्कड़ नाटक करने गई लड़कियों को अगवा कर गैंगरेप किया गया था. (Photo : Prabhatkhabar)
झारखंड के खूंटी जिले का वो स्कूल, जहां पर नुक्कड़ नाटक करने गई लड़कियों को अगवा कर गैंगरेप किया गया था. (Photo : Prabhatkhabar)

नाटक खत्म होने के बाद क्या हुआ
19 जून 2018 को छह लोगों की टीम बनाकर तीन लड़के और तीन लड़कियों के साथ ही आशा किरण की दो लड़कियां और दो सिस्टर ड्राइवर के साथ गाड़ी से कोचांग पहुंच गए. वहां के बाजार में नुक्कड़ नाटक शुरू हो गया. इसी दौरान टीम के साथ गईं दोनों सिस्टर ने कहा कि वो लोग बगल के स्कूल के फादर से मिलकर आ रही हैं. कुछ देर बाद सिस्टर ने पूरी टीम को ही स्कूल में बुला लिया, जहां फिर से नुक्कड़ नाटक शुरू हो गया. इसी बीच दो लड़के आए और फादर से बात करने लगे. नाटक खत्म हुआ तो फादर ने टीम की लड़कियों से कहा कि ये लड़के उन लड़कियों को कुछ देर के लिए लेकर जाएंगे और फिर वापस पहुंचा देंगे. लड़कियों ने विरोध किया और सिस्टर के साथ जाने की जिद की, लेकिन हथियारों के बल पर लड़के उन लड़कियों को एक कार और एक एंबुलेंस से लेकर चले गए.

यातना वाले 7 घंटे
एक युवक कार के पीछे-पीछे बाइक से था. कार छोटाउली होते हुए एक सुनसान जगह पर पहुंची. एक खपरैलनुमा मकान में टीम के साथ गए संजय कुमार नाम के शख्स को उतार दिया गया. इसी दौरान एक ने कहा कि ‘तुम लोग पत्थलगड़ी का विरोध करती हो, इसलिए तुम सबको ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि जीवन भर याद रहे’. इसके बाद वो लोग लड़कियों को लेकर जंगल में चले गए. सुबह 11 बजे जंगल में गई लड़कियां शाम के छह बजे के करीब जंगल से बाहर निकलीं. उनके साथ गैंगरेप किया गया था. उनके प्राइवेट पार्ट को सिगरेट से दागा गया था.

गांव से 10 किलोमीटर दूर इसी जंगल में पांंच नाबालिगों के साथ गैंगरेप हुआ था. (Photo : Prahatkhabar)
गांव से 10 किलोमीटर दूर इसी जंगल में पांंच लड़कियों के साथ गैंगरेप हुआ था. (Photo : Prahatkhabar)

फादर की वजह से हुआ रेप!
हथियारबंद लड़कों ने लड़कियों के साथ आए संजय के साथ मारपीट की, पेशाब पिलाया और कहा कि ‘तुम लोग बाहरी हो, जो पत्थलगड़ी का विरोध करते हो’. इसके बाद लड़कियों और संजय को हथियारबंदों ने फादर के पास छोड़ दिया. एक पीड़ित लड़की की ओर से खूंटी थाने में दर्ज करवाई गई एफआईआर के मुताबिक फादर की वजह से ही उन लड़कियों के साथ रेप हुआ था.

24 घंटे बाद पुलिस को सूचना मिली
लड़की ने बताया था कि रेप के दौरान उनका वीडियो बनाया गया. वो लोग आरोप लगाते रहे कि तुम सब लोग पुलिस के एजेंट हो. वारदात के बाद जब लड़कियां फादर के पास पहुंचीं, तो फादर ने इस घटना का जिक्र किसी से भी करने से मना कर दिया. फादर ने लड़कियों को धमकी दी कि किसी से कहने पर उनके मां-बाप की हत्या कर दी जाएगी. इसके बाद लड़कियों को वापस गाड़ी में बिठा दिया गया और सभी लोग अपने-अपने घरों को लौट गए. फादर के कारण पुलिस को वारदात के 24 घंटे बाद सूचना मिली. पुलिस ने दावा किया था कि जॉन जोनास तिडू दो सिस्टर्स को भी अपने साथ ले जाना चाहता था, लेकिन फादर ने बताया कि दोनों ही नन हैं, जिसके बाद जॉन जोनास तिडू ने उनको छोड़ दिया.

19 जून 2018 की इस घटना के बारे में पुलिस को 20 जून की रात को जानकारी मिली. पुलिस किसी तरह से एक लड़की को बयान देने के लिए राजी कर पाई. पुलिस ने अपनी तफ्तीश में पाया कि इस गैंगरेप के पीछे पत्थलगड़ी समर्थक और पीएलएफआई के उग्रवादी हैं. पुलिस के मुताबिक वारदात से पहले पत्थलगड़ी का प्रमुख नेता जॉन जोनास तिडू जंगल में बैठे पीएलएफआई उग्रवादियों के पास गया था और उनसे कहा था कि नुक्कड़ नाटक करने आए लोग पुलिस और प्रशासन के जासूस हैं. ये सब लोग पत्थलगड़ी के विरोधी हैं, इसलिए इनका अपहरण कर लो और सबक सिखाओ.

24 घंटे बाद पुलिस को गैंगरेप की जानकारी मिली थी, इसके बाद केस दर्ज किया गया था.
24 घंटे बाद पुलिस को गैंगरेप की जानकारी मिली थी, इसके बाद केस दर्ज किया गया था.

इस गैंगरेप के मामले में पुलिस ने जॉन जुनास तिडू, बलराम समद, जूनास मुंडा, बाजी समद उर्फ टकला, आशीष लूंगा, फादर अल्फांसो आईंद और नोएल सांडी पूर्ती को आरोपी बनाया गया था. मामले में एक अभियुक्त जुवेनाइल घोषित हुआ. एक अन्य अभियुक्त नोएल सांडी पूर्ति के खिलाफ अनुसंधान जारी है. दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक मामले में 19 लोगों की गवाही दर्ज हुई थी. 11 महीनों के भीतर कोर्ट ने अभियुक्तों को चार्ज फ्रेम किया है. सरकार की ओर से लोक अभियोजक सुशील कुमार जायसवाल ने दलीले दी.

पत्थलगड़ी क्या है
पत्थलगड़ी आदिवासियों की एक पुरानी परंपरा है. पिछले कई सालों से झारखंड में सरकारी तौर पर इसका विरोध बढ़ा है, लेकिन पिछले कुछ सालों से सरकार और पत्थलगड़ी समर्थकों के बीच विवाद हिंसक हो गया है. कई बार पत्थलगड़ी समर्थकों ने सेना और पुलिस के जवानों को बंधक बनाया है, तो कई बार पत्थलगड़ी समर्थक सेना और पुलिस के निशाने पर आए हैं.


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