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72 साल के बुज़ुर्ग का आरोप, नहीं चढ़ने दिया गया शताब्दी एक्सप्रेस में

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इटावा से एक ख़बर आई. ख़बर हमारी संवेदनशीलता पर गहरा सवाल खड़ा करती है. अगर एक 72 वर्ष के बुज़ुर्ग की ट्रेन सिर्फ़ इसलिए छूट जाए क्योंकि वो अपना कोच नहीं खोज पाए. तो इससे और क्या साबित होता है.

# हुआ क्या था 

4 जुलाई 2019 की घटना है. एक ट्रेन है शताब्दी एक्सप्रेस. कानपुर से दिल्ली के बीच चलती है. बीच में आता है इटावा. और इटावा में ट्रेन का रुकती है महज़ दो मिनट. 72 साल के बुज़ुर्ग रामअवध दास. इटावा स्टेशन पर गाज़ियाबाद आने के लिए खड़े थे. कन्फर्म टिकट था. C-2 कोच में सीट थी. बाबा एक कोच में चढ़ने की कोशिश करने लगे. लेकिन बाबा का पहनावा जीआरपी के सिपाही को अजीब लगा. और उसका कहना था कि बुज़ुर्ग ट्रेन के जनरेटर कोच में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे.

इटावा स्टेशन जहां की ये घटना है
इटावा स्टेशन जहां की ये घटना है

# बाबा ने शिकायत दर्ज कराई

रामअवध दास का कहना है कि उन्हें ट्रेन पर चढ़ने नहीं दिया गया. और उसके बाद उन्होंने स्टेशन के पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. रामअवध दास इसके बाद अगली गाड़ी से जनरल कोच में सफ़र करके गाज़ियाबाद पहुंचे.

रामअवध दास ने शिकायत में बताया कि उनके लाख कहने पर भी उन्हें ट्रेन में नहीं चढ़ने दिया गया
रामअवध दास ने शिकायत में बताया कि उनके लाख कहने पर भी उन्हें ट्रेन में नहीं चढ़ने दिया गया

इस मामले में जब ‘आज तक’ ने इटावा के स्टेशन मास्टर से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया.

# अब सवाल क्या है

अब सवाल ये है कि क्या हम वाक़ई आज़ाद हुए हैं? क्या आज भी हम पर अंग्रेज़ों की सोच राज नहीं कर रही? एक 72 साल का बुज़ुर्ग ट्रेन पकड़ने पहुंचा है. ऐसे बहुत से कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से वो बुज़ुर्ग स्टेशन पर अकेला होगा. लेकिन जिस सिपाही ने बाबा को जनरेटर कोच से उतार दिया. वो उन बुज़ुर्ग की मदद भी तो कर सकता था. ये भी किया जा सकता था कि अगले स्टॉप तक के लिए उन्हें उसी कोच में रहने दिया जाता. ये भी किया जा सकता था कि बाबा को बीस कदम आगे जाकर किसी और कोच में चढ़ाया जा सकता था. मानवता यही तो कहती है.

जिस दिन बापू को तीन गोलियां मारी गईं थीं, उन्होंने अंतिम शब्द ‘हे राम’ कहा था. राम को याद किया. अवध के राम को. देश बस आज़ाद हुआ ही था. 4 जुलाई को ट्रेन पर ना चढ़ पाने वाले वाले राम अवध दास उसी गांधी के देश में हैं. हमें सोचना चाहिए कि हमारी किसी ग़लती की वजह से अवध के राम शर्मसार ना हों, राम को मानने वाले बापू की आत्मा ना रोए.

महज़ एक ट्वीट पर ट्रेनों में बच्चों के लिए दूध पहुंचाने वाली रेलवे को ये भी सोचना चाहिए, कि पूरा भारत ट्विटर इस्तेमाल नहीं करता. भारत आज भी उन्हीं गांवों में बसता है जहां से अनेकों अनेक रामअवध, रामदरश, रामतीरथ, रामबदन और बहुत से राम धोती चप्पल में आपकी शताब्दियों और राजधानियों में बैठने आते हैं. यही असली भारत है.


वीडियो देखें:

कंगना और राजकुमार की ‘जजमेंटल है क्या’ का ट्रेलर देखकर आप कहानी जानने के लिए बेचैन हो जाएंगे

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etawah Railway Station an old man 72 years, stopped by TTE from boarding Shatabdi Express

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