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Yes Bank शुरू करने वाले राणा कपूर 15 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार

यस बैंक के को-फाउंडर, पूर्व MD और CEO राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, उन्हें रविवार तड़के 3 बजे गिरफ्तार किया गया.

दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी DHFLसे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई है. शनिवार 6 मार्च की सुबह कपूर को पूछताछ के लिए ईडी दफ्तर ले जाया गया था. वहां वे पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. ईडी अधिकारियों ने उनसे 15 घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की. ED ने 6 मार्च की रात मुंबई के उनके घर पर छापेमारी की थी. टीम ने मुंबई के समुद्र महल टॉवर स्थित कपूर के घर पर देर रात तक छानबीन की थी.

इस बीच राणा कपूर की पत्नी बिन्दू कपूर अपने वकील के साथ मुंबई में ईडी की ऑफिस पहुंची हैं. यहां ईडी के अधिकारी उनसे पूछताछ करने वाले हैं.

 

क्या है मामला ?

ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यस बैंक प्रमोटर राणा कपूर और उनकी दो बेटियों की डमी कंपनी अर्बन वेंचर्स को घोटालेबाजों से 600 करोड़ रुपये मिले थे? आरोप है कि डीएचएफएल ने बैंक से 4,450 करोड़ रुपये लेने के लिए इस कंपनी को पैसे दिए थे. ईडी अधिकारियों ने कहा कि यस बैंक ने डीएचएफएल को 3,750 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. इसके अलावा डीएचएफएल नियंत्रित फर्म आरकेडब्ल्यू डिवेलपर्स को 750 करोड़ रुपये का एक और कर्ज दिया था.

ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जब इन दोनों कंपनियों ने लोन नहीं चुकाया तो यस बैंक ने कार्रवाई शुरू नहीं की. कपूर और उनकी दो बेटियों पर संदेह है, जो डूइट अर्बन वेंचर्स की निदेशक हैं. कथित तौर पर कार्रवाई नहीं करने के लिए डीएचएफएल से पैसे लिए. ईडी को इस बात का भी शक है कि 4,450 करोड़ रुपये की यह राशि, उस 13,000 करोड़ रुपये का हिस्सा है जो डीएचएफएल की ओर से 79 डमी कंपनियों को दी गई. इन्ही कंपनयों में अर्बन वेंचर्स भी शामिल है.

ईडी के अधिकारियों ने मुंबई और दिल्ली में उनकी तीन बेटियों और प्रभादेवी में यस बैंक के मुख्यालय की भी जांच की. अधिकारियों ने कहा कि बेटियों के बयान दर्ज किए जाएंगे और कपूर परिवार के वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जाएगी.

कौन हैं राणा कपूर?

राणा कपूर ज्वैलर्स के खानदान से आते हैं. इकॉनमिक सर्कल में राणा कपूर की छवि ऐसी रही कि उन्होंने कभी किसी लोन को मना नहीं किया. उनके लेनदारों में DHFL, IL&FS, अनिल अंबानी की रिलायंस, दीवान हाउसिंग, जेट एयरवेज, एसेल ग्रुप, इंडियाबुल्स, कैफे कॉफी डे जैसी कंपनियां हैं. ये सारी कंपनियां लोन डिफॉल्टर हैं.

2003 में राणा कपूर ने यस बैंक की शुरुआत की. कपूर के शेयरों के प्राइस बढ़े और वो करोड़पति बन गए. देखते-देखते यस बैंक चौथा सबसे बड़ा निजी बैंक बन गया. देशभर में आज इसके 1000 से ज़्यादा ब्रांच हैं और 1800 एटीएम हैं. राणा कपूर ने एक दशक में बैंक को ज़ीरो से 3.4 लाख करोड़ रुपए के बराबर का बैंक बना दिया. 2016 तक बैंक काफी फायदे में था. लेकिन राणा कपूर ने खूब जमकर रिस्क लिए. आग से खेलने लगे. उन्होंने अनाप-शनाप लोन दिए. कई बैंकर मानते हैं कि राणा कपूर की स्थिति अच्छी होती, अगर वो अपने शेयर बेच देते और 2017 में यस बैंक से हट जाते. रिज़र्व बैंक ने राणा कपूर को उनके पद से हटा दिया, लेकिन वो अड़े रहे कि कभी अपने शेयर नहीं बेचेंगे.

सितंबर, 2018 में यस बैंक ने कहा कि उसने राणा कपूर से जनवरी, 2019 में CEO पद छोड़ने को कहा है. जुलाई, 2019 की ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2018 से सितंबर, 2018 तक यस बैंक के शेयर में 78 फीसदी की गिरावट आई. अक्टूबर, 2019 में शेयर और भी गिर गए. आज यस बैंक की नाव जो डूब रही है. आरबीआई ने बैंकिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी है. बैंक के कस्टमर्स एक महीने तक 50 हजार रुपए से ज्यादा नहीं निकाल सकते.


YES Bank के राणा कपूर की कहानी, जिन्होंने नोटबंदी को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया था?

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