Submit your post

Follow Us

डॉ. कफील खान को CAA पर 'भड़काऊ' भाषण देने के मामले में बहुत बड़ी राहत मिल गई है

डॉ. कफील खान (Dr. Kafeel Khan) को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. उसने गुरुवार 26 अगस्त को निर्देश दिया है कि डॉ. कफील खान पर कथित भड़काऊ भाषण देने को लेकर चल रहे सभी आपराधिक मामलों को रद्द किया जाए. साथ ही उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को भी खत्म किया जाए. डॉ. कफ़ील खान ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में भाषण दिया था. यूपी सरकार ने इसे भड़काऊ बताते हुए डॉ. कफील खान के खिलाफ कार्रवाई थी. उन्हें कई महीने जेल में बिताने पड़े थे.

मामला क्या है?

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 13 दिसंबर, 2019 को हुई. उस दिन कफ़ील खान ने AMU में CAA को लेकर एक भाषण दिया था. इसके बाद उन पर भड़काऊ भाषण देकर शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया था. इसके अलावा, धर्म के आधार पर अलग-अलग संप्रदायों के लोगों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया था.

इन आरोपों के चलते 29 जनवरी, 2020 को कफील खान को गिरफ्तार कर लिया गया. बाद में उन पर इसी मामले में नैशनल सिक्योरिटी ऐक्ट (रासुका) लगाया गया था. इस कानून के तहत सरकार को ऐसे किसी भी व्यक्ति को महीनों तक जेल में रखने का अधिकार है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान पड़ने, देश की सुरक्षा या विदेशों के साथ भारत के संबंधों पर ख़तरा होने का संदेह हो. रासुका के तहत आरोपी 12 महीनों तक कोर्ट में बिना मुक़दमा चलाए भी हिरासत में रखा जा सकता है.

9 महीने जेल में बिताने के बाद सितंबर, 2020 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ. कफील खान की हिरासत को अवैध बताया था और उन्हें ज़मानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था. तब से खान बेल पर बाहर हैं.

Dr Kafeel Khan
जब बेल के बाद जेल से बाहर आए थे डॉ. कफील खान. (फोटो-PTI)

अदालत ने क्या कहा

इस मामले में डॉ. कफील ने हाई कोर्ट में दलील दी थी कि अलीगढ़ के मजिस्ट्रेट के सामने आरोप पत्र दाखिल करने से पहले यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार की अनिवार्य अनुमति नहीं ली थी. हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस गौतम चौधरी ने इस दलील के साथ सहमति जताई और मामले को वापस स्थानीय अदालत में भेजकर सही प्रक्रिया का पालन करने को कहा.

अदालत का फ़ैसला आने के बाद खान ने मीडिया को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की. उन्होंने इसे भारत के लोगों की जीत बताया है. खान ने प्रेस रिलीज़ में कहा है,

“ये भारत के लोगों के लिए एक बड़ी जीत है और न्यायपालिका में हमारे विश्वास को पुनर्स्थापित करता है. माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ योगी आदित्यनाथ सरकार की मनमानी पूरी तरह से उजागर हो गई है.”

स्टेट्मेंट में आगे लिखा है,

“हम ये भी आशा करते हैं कि इस बड़े निर्णय से देश भर की जेलों में बंद सभी लोकतंत्र समर्थक नागरिकों और कार्यकर्ताओं को उम्मीद मिलेगी. भारतीय लोकतंत्र अमर रहे!”

बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में भी मिली थी राहत

डॉ. कफील खान एक और मामले की वजह से मीडिया की सुर्खी बनते रहे हैं. ये मामला गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है, जहां 2017 में कथित रूप से ऑक्सीजन की क़िल्लत के कारण दर्जनों बच्चों की मौत हो गई थी. उस समय की रिपोर्टों के मुताबिक, डॉ. कफील खान ने अस्पताल में ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए व्यक्तिगत स्तर प्रयास किए थे. लेकिन सरकार ने उन्हें ड्यूटी में लापरवाही और प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप में पहले संबंधित वार्ड से हटाया और बाद में सस्पेंड कर दिया.

इसके बाद अस्पताल के डीजी (मेडिकल एजुकेशन) की शिकायत पर डॉ. कफील खान के खिलाफ कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया. इस पर कोर्ट ने खान को गैरजमानती वॉरंट जारी किया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. तब एम्स की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने कफील खान के खिलाफ हुई कार्रवाई का विरोध किया था.

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस से मर रहे बच्चों के समय की एक तस्वीर (फाइल फोटो)
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस से मर रहे बच्चों के समय की एक तस्वीर (फाइल फोटो)

इस मामले में जेल में रहते हुए डॉ. कफील खान ने कई पत्र लिखे. इनमें उन्होंने दावा किया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी को लेकर उन्होंने अस्पताल प्रशासन को कई बार आगाह किया था और लोकल ऑक्सीजन सप्लायर से भी तुरंत ऑक्सीजन सप्लाई करने की गुहार लगाई थी. बाद में वे खुद बाहर गए और मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर का इंतजाम किया. खान ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया.

बहरहाल, सितंबर 2019 में अदालत ने कफील खान को इस मामले से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया. बाद में उन्होंने दावा किया था कि राज्य सरकार की एक रिपोर्ट ने उन्हें सभी बड़े आरोपों से मुक्त कर दिया था. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने इससे इनकार किया था.

डॉ. कफ़ील खान फ़िलहाल उत्तर प्रदेश सरकार के साथ काम नहीं कर रहे हैं.


वीडियो- गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज की महिला क्लर्क को क्यों निलंबित किया गया? 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

हाईकोर्ट की रोक पर गुजरात के मंत्री बोले, बेटियों को 'लव जिहाद' से बचाने को लाए कानून

गुजरात हाईकोर्ट ने धर्मांतरण विरोधी कानून की जिस धारा पर रोक लगाई है, उसमें ऐसा क्या है?

क्या अमिताभ के बॉडीगार्ड को डेढ़ करोड़ की सैलरी मिलती थी और इसीलिए उसका ट्रांसफर हो गया?

कॉन्स्टेबल जीतेंद्र शिंदे पिछले 6 साल से अमिताभ बच्चन की सिक्योरिटी का हिस्सा थे.

अफगानी महिला सांसद को दिल्ली एयरपोर्ट से बैरंग लौटाने पर सरकार ने गलती मानी, दिया ये ऑफर

सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस नेताओं ने विदेश मंत्री से इस पर जवाब मांगा तो उन्होंने क्या कहा?

दिल्ली के CM अरविंद केजरीवाल और सोनू सूद साथ आए और क्या ऐलान कर गए?

पंजाब से चुनाव लड़ने के बारे में क्या बोले सोनू सूद?

काबुल एयरपोर्ट ब्लास्ट: चश्मदीद ने कहा- कयामत क्या होती है, मैंने यहां देख लिया

'हाल ऐसा था कि एयरपोर्ट के पास नाले का पानी खून से लाल हो गया था.'

काबुल एयरपोर्ट पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या बड़ा ऐलान कर दिया?

ISIS के इस हमले में 12 अमेरिकी कमांडोज की भी मौत हुई है.

पंजाब किंग्स से जुड़ा 200 T20 मैच खेल चुका दिग्गज लेग स्पिनर

IPL में पहली बार दिखेगा इस प्लेयर का जलवा.

KKR में ऑस्ट्रेलियाई पेसर पैट कमिंस की जगह लेने कौन आया?

IPL 2021 के बचे मैचों में नहीं खेलेंगे कमिंस.

जो रूट की एक और सेंचुरी ने फिर छुड़ाए भारत के पसीने

कब निकलेगा रूट का तोड़?

अफगानिस्तान से आया ऑस्ट्रेलियाई युवक का ये वीडियो सिहरन पैदा कर देगा!

पूरा चेहरा खून-खून हुआ पड़ा है.