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ऐसा क्या कांड किया रशिया ने कि उसकी सारी टीमों पर ओलिंपिक्स और वर्ल्ड कप में बैन लग गया?

एथलेटिक्स, खेल, स्पोर्ट्स की दुनिया में कई चीजें बेहद जरूरी होती हैं. इन जरूरी चीजों में से एक चीज खेल को खेल की तरह खेलना भी है. खेल को खेल की तरह खेलना मतलब ईमानदारी. जिसमें ये भी शामिल है कि किसी ऐसे पदार्थ या तरीके की मदद ना लेना जिससे आपको बाकी एथलीट्स के खिलाफ अनुचित लाभ मिले. ऐसे पदार्थों को ड्रग्स कहा जाता है और इन्हें इस्तेमाल करने को डोपिंग.

खेलों में डोपिंग की कोई जगह नहीं है और डोपिंग टेस्ट में फेल होने वाले एथलीट्स को कड़ी सजा दी जाती है. लेकिन क्या हो अगर एथलीट्स की बजाय कोई पूरा देश ही डोपिंग का दोषी पाया जाए? इसका जवाब आज वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) ने रूस पर बैन लगाकर दे दिया है. WADA ने रूस को चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. अब रूस टोक्यो 2020 ओलंपिक्स और फीफा वर्ल्ड कप 2022 जैसे इवेंट्स में भाग नहीं ले पाएगा.

# क्यों लगा बैन

खेलों की दुनिया को डोपिंग मुक्त रखने की जिम्मेदार WADA के एक प्रवक्ता ने इस खबर की पुष्टि की. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक WADA ने रूस पर यह प्रतिबंध रूस में डोपिंग के नमूनों की जांच करने वाली संस्था (RUSADA) की लैबोरेट्री के डाटा से छेड़छाड़ के लिए लगाया है.

WADA की एग्जिक्यूटिव कमिटी ने यह फैसला लिया. उन्होंने यह फैसला इस बात की पुष्टि हो जाने के बाद लिया कि रूस ने अपनी लैबोरेट्री के डाटा से छेड़छाड़ की. डाटा में फर्जी सबूत डाले गए और ऐसी फाइल्स को डिलीट किया गया जिनसे डोपिंग कर रहे एथलीट्स को पकड़ा जा सकता था.

President Of The Russian Ol
Russian Olympics Committee के प्रेसिडेंट Stanislav Pozdnyakov

WADA के एक प्रवक्ता के मुताबिक रूस पर बैन लगाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया. रूस इस फैसले के खिलाफ 21 दिन के अंदर अपील कर सकता है.

# कब का है मामला

रूस लंबे वक्त से खुद को ग्लोबल स्पोर्ट्स पॉवर के रूप में स्थापित करने की कोशिशों में लगा है. साल 2015 में WADA की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि रूस के एथलीट्स को सामूहिक तौर पर प्रदर्शन बेहतर करने वाली दवाएं दी जा रही हैं. इसके बाद से रूस के एथलीट्स का संकट लगातार बढ़ता गया. इसके चलते रियो 2016 ओलंपिक्स से इनके कई एथलीट्स को बाहर कर दिया गया था.

पिछले साल साउथ कोरिया के प्योंगचांग शहर में हुए विंटर गेम्स के दौरान रूस के एथलीट्स को अपने देश के झंडे का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था. यह फैसला 2014 सोच्चि गेम्स के दौरान रूस द्वारा राज्य-प्रायोजित (State Sponsored) डोपिंग को छिपाने के प्रयासों की सजा के तौर पर लिया गया. इस मामले का खुलासा 2015 में आई WADA की एक रिपोर्ट में हुआ था.

Alexander Zubkov Of Russia
Sochi Winter Games में Russian Team (फाइल फोटो AP)

सोमवार को आया यह फैसला WADA की कम्प्लेंट रिव्यू कमिटी की सिफारिश पर आया है. कमिटी ने रूस द्वारा तोड़-मरोड़कर दिए गए लैबोरेट्री डाटा के बाद इस फैसले की सिफारिश की थी.

गौरतलब है कि रूस की डोपिंग एजेंसी RUSADA की बहाली की तमाम शर्तों में यह शर्त भी शामिल थी कि उन्हें लैबोरेट्री के डाटा की असली कॉपी WADA को देनी होगी. RUSADA को डोपिंग के खुलासे के बाद ही सस्पेंड कर दिया गया था. इन शर्तों को पूरा करने के बाद RUSADA को पिछले साल बहाल कर दिया गया था. लेकिन बाद में पता चला कि यह डाटा सही नहीं था, इसमें छेड़छाड़ की गई थी. WADA के ताजा फैसले का अर्थ है कि RUSADA के अधिकार तत्काल प्रभाव से खत्म हो गए.

# एथलीट्स पर असर

रूस के खेल मंत्री पावेल कोलोब्कोव ने पिछले महीने कहा था कि लैबोरेट्री के डाटा में आई गड़बड़ी किसी तकनीकी खराबी का परिणाम है.

हालांकि, इस प्रतिबंध के बावजूद रूस के एथलीट बड़े इंटरनेशनल इवेंट्स में भाग ले सकते हैं. वह अगले चार साल तक अपने देश के झंडे और राष्ट्रगान के बिना बड़े इवेंट्स में भाग ले पाएंगे. इससे पहले 2018 के प्योंगचांग विंटर गेम्स में ऐसा हो चुका है. रूस के कई अधिकारियों ने इन प्रतिबंधों को अनुचित और देश को पीछे धकेलने की पश्चिमी देशों की कोशिश करार दिया है.

Lab Technicians Work At Rus
Russian Anti Doping Agency ( RUSADA) की फाइल फोटो, AP

अगर रूस इस मामले में अपील करता है तो केस को कोर्ट ऑफ अर्बिट्रिशन फॉर स्पोर्ट्स (CAS) को रेफर किया जा सकता है.

# क्या है CAS?

CAS एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. इसकी स्थापना खेल से जुड़े विवादों को मध्यस्थता के जरिए हल करने के लिए की गई थी. इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के लुसान शहर में है जबकि इसकी कोर्ट्स न्यू यॉर्क, सिडनी और लुसान में हैं. इसके अलावा ओलंपिक होस्ट कर रहे शहरों में भी यह अपना टेम्पररी कोर्ट स्थापित करता है.


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