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कोहली, शास्त्री से पूर्व कप्तान और चीफ सेलेक्टर बेहद नाराज़ हैं

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भारत की क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप 2019 के लीग मैचों में शानदार खेली. 9 में से 7 जीते, 1 में हार का सामना करना पड़ा. एक मुकाबला बारिश की वजह से रद्द कर दिया गया. ये तो हुई लीग मैचों की बात. लेकिन अपने पहले नॉकआउट मुकाबले यानी कि सेमीफाइनल में टीम पस्त हो गई. न्यूजीलैंड से 18 रनों से हारने के बाद टीम का सफर समाप्त हो गया है. अब वर्ल्ड कप में टीम के प्रदर्शन की चीड़-फाड़ शुरु हो गई है.

दिलीप वेंगसरकर टीम इंडिया के लिए खेल चुके हैं. 1976 से 1992 तक. 100 से ज्यादा टेस्ट और वनडे मैचों में भारत को रिप्रजेंट किया. 1987 वर्ल्ड कप के बाद कपिल देव के स्थान पर टीम के कप्तान बने. फिर बोर्ड से खटपट हुई और दो साल बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी. 1992 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

वेंगसरकर ने क्रिकेट के मैदान पर लंबा वक्त गुजारा है. संन्यास के बाद क्रिकेट की बेहतरी के लिए अपनी क्रिकेट एकेडमी शुरु की. लंबे समय तक क्रिकेट प्रशासन में रहे. पूर्व कप्तान और इंडिया के चीफ सेलेक्टर रहे दिलीप वेंगसरकर ने इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने टीम सेलेक्शन और सेलेक्शन कमिटी की खामियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

किन मुद्दों पर क्या कहा वेंगसरकर ने

टीम सेलेक्शन पर

team selectors

इस समय की सेलेक्शन कमिटी का कुल अनुभव 13 टेस्ट और 31 वनडे मैचों का है. वेंगसरकर ने कहा कि सेलेक्शन कमिटी में ऐसे लोग हों, जिनके पास अंतराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव हो. जिनके पास अनुभव होगा, वे ही बेहतर खिलाड़ी चुन पाएंगे. अगले चार साल काफी खास होने वाले हैं. अगला वर्ल्ड कप इंडिया में होने वाला है. सेलेक्टर्स के पास अनुभव और आइडिया होना चाहिए. लेकिन आप हमेशा उन्हें ही दोषी नहीं ठहरा सकते.

वेंगसरकर बोले कि टीम चुनने से पहले अधिक सोचा नहीं गया. आपको हर एक डिपार्टमेंट पर ध्यान देना होता है. अगर प्लान ए काम न कर रहा हो तो प्लान बी तैयार रखना होता है. प्लान ए जितना ही बेहतर. उन्होंने तीन विकेटकीपर के साथ खेलने पर भी सवाल उठाए. लाखों लोग क्रिकेट खेल रहे हैं. 50 ओवर के मैच में 4 से 5 बल्लेबाज चाहिए. क्या देश में टैलेंट की कमी हो गई है? अगर आप इंटरनेशनल लेवल के टैलेंट ढूंढ़ नहीं सकते, फिर घरेलू क्रिकेट का कोई मतलब नहीं रह जाता.

टीम की बल्लेबाजी पर

हम अपने टॉप ऑर्डर के भरोसे ही रह गए. रोहित, विराट और राहुल ने बेहतरीन बल्लेबाजी की, लेकिन मिडिल ऑर्डर पर ध्यान ही नहीं दिया. सेमीफाइनल तक सब ठीक रहा. लेकिन जैसे ही सेमीफाइनल मुकाबले में 5 के स्कोर पर 3 विकेट गिरे, सब खत्म हो गया. जडेजा की पारी अद्भुत थी, लेकिन आप हमेशा उनसे ऐसी उम्मीद नहीं करते. आपको आजिंक्य रहाणे या चेतेश्वर पुजारा को टीम में रखना चाहिए था. वे इंग्लैंड की कंडीशन को बेहतर जानते हैं. बैकअप में अनुभवी खिलाड़ियों को रखना होता है. इंडिया के बैकअप में ऋषभ पंत, दिनेश कार्तिक और केदार जाधव थे. फिर रिजल्ट आपके सामने है.

धोनी के सवाल पर

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धोनी लाजवाब खिलाड़ी हैं. इंडियन क्रिकेट में उनका योगदान शानदार है. धोनी जैसे खिलाड़ी के लिए, आपको फिटनेस और उनकी सोच को ध्यान में रखना होता है. अगर वो फिट हैं और फॉर्म में हैं, तो उन्हें खेलते रहना चाहिए. महान खिलाड़ी हमेशा अपने लिए स्टैण्डर्ड तय रखते हैं. वे फैसला लेना जानते हैं. जब उन्हें ऐसा लगेगा कि वो स्टैण्डर्ड गिर रहा है, वे छोड़ देंगे. आप उनके ऊपर दबाव नहीं डाल सकते.

नए खिलाड़ियों को टीम में जगह कमानी होती है. उम्र के आधार पर नहीं बल्कि खेल के आधार पर. मैंने पंत को आइपीएल के अलावा कहीं और खेलते नहीं देखा है.

वेंगसरकर सेलेक्टर होते तो क्या करते

युवा चेहरों को तैयार करता, ये सेलेक्शन कमिटी वह काम नहीं कर रही है. अंबाती रायडू को दो साल से वर्ल्ड कप के लिए तैयार किया गया. और, जब समय आया तो उन्हें अनदेखा कर दिया गया. मैं अपने समय में आगे की सोचकर टीम चुना करता था. जूनियर लेवल की क्रिकेट पर भी ध्यान देना जरूरी है.

दिलीप वेंगसरकर के सवाल गंभीर हैं. उनकी सलाहें जरुरी हैं. देखना दिलचस्प होगा, बीसीसीआई उनकी बात को कितनी गंभीरता से सुनती है.


वीडियो: वर्ल्ड कप 2019: सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ रवींद्र जडेजा और धोनी के अलावा सब ढेर

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