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क्या योगी आदित्यनाथ को कासगंज में होने वाले तनाव का पहले से पता था?

कासगंज में सांप्रदायिक तनाव क्यों और कैसे हुआ, इसे लेकर तरह-तरह की थ्योरी दी जा रही हैं. इनमें से सबसे सनसनीखेज़ वो है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि 26 जनवरी, 2018 को तिरंगा यात्रा के बाद हुआ विवाद सुनियोजित था और इसे लेकर यूपी पुलिस, योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह को 5 दिन पहले ही आगाह कर दिया गया था. लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया और बवाल हो गया. कासगंज की ‘विसलब्लोअर थ्योरी’ पर मीडिया में कई रिपोर्ट आई हैं. अगर ये बात सच है तो इस हिसाब से सांप्रदायिक तनाव फैलने देने के लिए सबसे बड़ा दोषी प्रशासन बन जाता है. लेकिन क्या इस थ्योरी में दम है?

वो ट्वीट जो कभी पढ़े नहीं जा सके

कासगंज के ही एक व्यक्ति ने 20 तारीख को कुछ ट्वीट किए थे. इनमें यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और यूपी पुलिस के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल को टैग कर के कच्ची अंग्रेज़ी में कहा गया है कासगंज में सांप्रदायिक तनाव हो सकता है और प्रशासन ध्यान दे. किसी फेसबुक पोस्ट का लिंक भी दिया है जो खबर लिखे जाने के समय तक डिलीट कर दिया गया था. प्रशासन को ‘आगाह’ करने वाली बात का पूरा आधार इन्हीं ट्वीट्स पर टिका हुआ है. इसलिए हमने इन ट्वीट्स की पड़ताल की.

kasganj tweet

सबसे पहले हमारा ध्यान गया फेसबुक लिंक पर. क्योंकि ये पोस्ट डिलीट हो गया था, हमने इन ट्वीट्स को लिखने वाले से बात की. उन्होंने हमें बताया कि कासगंज में 26 तारीख से कई दिन पहले से तनाव था. पहले चामुंडा माता मंदिर का गेट लगने को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ, फिर लाउडस्पीकर को लेकर. आरोप लगा कि जब मंदिर का लाउडस्पीकर उतार लिया गया तो मस्जिद का क्यों नहीं उतारा गया. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फेसबुक पर लड़ाई शुरू हुई. एक पक्ष फेसबुक पर कुछ लिखता, तो दूसरी तरफ के लोग उसपर कमेंट करने आ जाते. इसी फेसबुक वॉर की पूर्णाहुति 26 जनवरी को झंडावंदन के दौरान ज़ोरआज़माइश के रूप में हुई. एक ऐसे ही भड़काऊ पोस्ट का लिंक कासगंज के उस व्यक्ति ने ट्विटर पर डाला था.

kasganj tweet2

लेकिन इस दौरान एक झोल हो गया. जिस अकाउंट से ये ट्वीट हुए थे, उसके ट्वीट ‘प्रोटेक्टेड’ हैं. माने इसके ट्वीट आमतौर पर नज़र नहीं आते. उन्हें भी नहीं, जिन्हें टैग किया जाता है. प्रोटेक्टेड ट्वीट देखने के लिए आपको उस अकाउंट को फॉलो रिक्वेस्ट भेजनी होती है. अकाउंट चलाने वाला रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ले, तब जाकर ट्वीट दिखते हैं. जिन हैंडल्स की बात यहां हो रही है, वो कासगंज में किसी ट्विटर अकाउंट को फॉलो रिक्वेस्ट भेजेंगे, ये बहुत दूर की संभावना है, लगभग असंभव.

लाल घेरे में जो ताला दिख रहा है, उसका मतलब है कि पुलिस को आगाह कर रहे ट्वीट प्रोटेक्टेड हैं. माने उन्हें हर कोई नहीं देख सकता.
लाल घेरे में जो ताला दिख रहा है, उसका मतलब है कि पुलिस को आगाह कर रहे ट्वीट प्रोटेक्टेड हैं. माने उन्हें हर कोई नहीं देख सकता.

दी लल्लनटॉप ने इस ट्विटर यूज़र से बात की. उन्होंने कबूला कि उनका अकाउंट प्रोटेक्टेड है और ये भी कि वो ट्विटर बेहद कम इस्तेमाल करते हैं. इसीलिए न यूपी पुलिस, न राजनाथ सिंह और न योगी आदित्यनाथ इन ट्वीट्स को देख पाए होंगे. इसलिए इन ट्वीट्स के ज़रिये उनके ‘समय रहते आगाह होने’ का सवाल ही नहीं उठता.

हर बड़े हादसे का एक तात्कालिक कारण होता है. लेकिन वो असल में कई छोटी-छोटी घटनाओं का समुच्चय होता है. इसी तरह हो सकता है कि कासगंज की घटना के पीछे भी कई और कारण रहे हों. इसलिए कई तरह के कयास लगाए भी जा रहे हैं. लेकिन ये एक विस्तृत जांच ही बता सकती है कि गणतंत्र दिवस पर जो हुआ वो सुनियोजित था या फिर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना जो तात्कालिक आवेश के चलते हुई.


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