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रामदेव पर एलोपैथी के खिलाफ बोलने की रोक तो नहीं लगी, पर हाईकोर्ट से ये नसीहत जरूर मिल गई

एलोपैथी को लेकर बयानबाज़ी के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव को राहत तो दी, लेकिन साथ ही एक नसीहत भी दे डाली. हाईकोर्ट ने रामदेव के एलोपैथिक दवाओं के खिलाफ या कोरोनिल के पक्ष में बयान देने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. कोर्ट का कहना था कि ऐसी किसी भी तरह की रोक को फ्री स्पीच की कसौटी पर कसा जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने रामदेव को समन जारी करके जवाब भी मांगा है.

कोरोनिल का प्रचार करें, ऐसे बयानों से बचें

दिल्ली हाईकोर्ट में 3 जून को दिल्‍ली मेडिकल ए‍सोसिएशन की एक याचिका पर सुनवाई हुई. याचिका में कहा गया था कि बाबा रामदेव एलोपैथिक के खिलाफ लगातार ऊलजलूल बयान देते हैं. उन्हें ऐसा करने से रोका जाए. कोर्ट ने इनकार कर दिया, लेकिन बाबा को विवादित बयानों से बचने की सलाह दे डाली. कोर्ट ने रामदेव से कहा-

‘आप कोरोनिल का प्रचार करें, कोई दिक्कत नहीं. लेकिन एलोपैथी को लेकर ऐसे बयान देने से बचें.’

बार एंड बेंच वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस सी. हरिशंकर की सिंगल बेंच ने आगे कहा कि यह एक राय है.. किसी मामले में बयान देने से रोकने की किसी रिक्वेस्ट को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के आधार पर परखा जाना चाहिए.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने तर्क दिया कि कोरोनिल और एलोपैथी पर रामदेव की गलतबयानी से गंभीर सवाल उठ रहे हैं. इस पर जज ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आपका एलोपैथिक पेशा इतना नाजुक है. किसी का विचार है कि एलोपैथिक दवाओं की अक्षमता के कारण इतने लोग मारे गए. मेरा मानना है कि यह अनुच्छेद 19(1)(ए) के अंतर्गत आता है.

हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी राय रख सकता है. इसके लिए उसके खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा-

अगर मुझे लगता है कि कुछ विज्ञान फर्जी है. कल को मुझे लगता है कि होम्योपैथी फर्जी है. क्या आपका मतलब है कि वे मेरे खिलाफ मुकदमा दायर करेंगे? यह जनता की राय है. रामदेव एक इंसान हैं. उनकी एलोपैथी मे आस्था नहीं है. उनका मानना है कि योग और आयुर्वेद से सब कुछ ठीक हो सकता है. वो सही हों या गलत, ये अलग बात है.

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने कहा था कि रामदेव जनता के बीच जो बयान दे रहे हैं, उससे विज्ञान और डॉक्‍टर्स की छवि को नुकसान हो रहा है. मामले में हाई कोर्ट ने रामदेव को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. उनके अलावा ट्विटर, मीडिया चैनल्‍स आदि से भी जवाब तलब किया है.

रामदेव ने एलोपैथी पर उठाए थे सवाल

रामदेव ने पिछले दिनों एलोपैथी को लेकर सवाल उठाए थे. इसे ‘तमाशा’. ‘बेकार’ और ‘दिवालिया’ कह दिया था. इस पर खूब बवाल हुआ. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन समेत विभिन्न संस्थाएं रामदेव के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगी थीं. स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भी 23 मई को आपत्ति जताते हुए रामदेव को पत्र लिखा. कहा कि एलोपैथिक दवाओं और डॉक्टरों पर आपकी टिप्पणी से लोग बेहद आहत हैं. कोरोना के खिलाफ दिनरात युद्धरत डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी देशवासियों के लिए देवतुल्य हैं. ऐसे में रामदेव को अपना बयान वापस लेना चाहिए. इसके जवाब में बाबा रामदेव ने चिट्ठी लिखी. कहा कि जिस बयान का जिक्र है, उसे उन्होंने एक वॉट्सऐप मैसेज से पढ़कर सुनाया था. लेकिन फिर भी अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बयान वापस लेता हूं और खेद प्रकट करता हूं.

हालांकि इसके बाद भी बाबा रामदेव एलोपैथ को लेकर लगातार हमलावर रहे. उन्होंने आईएमए को 25 सवालों की एक लिस्ट भेजकर जवाब भी मांगा. रामदेव के बयानों पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कहा था कि उनके खिलाफ महामारी एक्ट की धारा 188 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. बाबा के बयानों के खिलाफ दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट में मामला दायर कर दिया. इसी पर कोर्ट ने बाबा को नसीहत देते हुए समन जारी किया है. अगली सुनवाई के लिए 13 जुलाई की डेट दी गई है.


वीडियो – डॉ हर्षवर्धन की चिट्ठी के बाद बाबा रामदेव ने एलोपैथी वाला बयान लिया वापस, और क्या-क्या कहा?

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