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दिल्ली सरकार का ये कदम बदल सकता है देश का एजुकेशन सिस्टम

जब कहीं से खबर आती है कि किसी बड़े अधिकारी ने अपने बच्चे का एडमिशन सरकारी स्कूल में करवाया है, तो लगता है कि उस स्कूल की हालत अब बेहतर हो जाएगी. ऐसी खबर किसी गरीब या आर्थिक तौर पर कमजोर व्यक्ति की आंखों में चमक ला देती है. उसे लगता है कि काश ऐसा होता तो वो भी अपने बच्चे को अच्छी पढ़ाई दे पाता. सोचिए कि अगर अपने देश में ऐसा हो जाए कि सभी अच्छे स्कूल सरकार के नियंत्रण में आ जाएं, तो कितना बेहतर होगा. देश के और किसी राज्य में भले ही ऐसी पहल नहीं हुई हो, लेकिन दिल्ली इस दिशा में कदम उठा रही है. दिल्ली सरकार सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के साथ ही प्राइवेट स्कूलों को टेकओवर करने की तैयारी में है. इसका सीधा सा मतलब ये है कि इन स्कूलों का संचालन अब किसी निजी हाथ में न होकर दिल्ली सरकार के हाथ में होगा और इसकी देख-रेख का जिम्मा शिक्षा निदेशालय का होगा.

क्या है प्रस्ताव

school

दरअसल दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत उसने कहा है कि वो 449 प्राइवेट स्कूलों को टेकओवर करने के लिए तैयार है. सचिव (शिक्षा) पुण्य सलिल श्रीवास्तव 16 अगस्त को दिल्ली सरकार की ओर से हाई कोर्ट में पेश हुए थे और ये प्रस्ताव रखा था. सरकार जिन स्कूलों को टेकओवर करने की तैयारी में है, उनमें दिल्ली पब्लिक स्कूल मथुरा रोड, स्प्रिंग डेल, अमिटी इंटरनेशनल साकेत, संस्कृति स्कूल और मॉडर्न पब्लिक स्कूल जैसे नामी-गिरामी स्कूल शामिल हैं, जिनमें अपने बच्चों का एडमिशन करवाने का सपना सभी पैरेंट्स देखते हैं. ये वो स्कूल हैं, जिन्होंने मनमाने तरीके से फीस बढ़ा दी थी, जिसके बाद सरकार ने उन्हें नोटिस जारी कर 9 प्रतिशत ब्याज दर के साथ पेरेंट्स को पैसे लौटाने का आदेश दिया था. दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा है कि अगर दो हफ्ते में ये स्कूल कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते या फिर पैसे नहीं लौटाते तो सरकार इन स्कूलों को टेकओवर कर लेगी.

हाई कोर्ट ने बनाई थी कमेटी

delhi high court

दिल्ली के 554 स्कूलों पर मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने का आरोप था. 2009 में दिल्ली का एक एनजीओ दिल्ली अभिभावक महासंघ हाई कोर्ट पहुंच गया. वहां सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जस्टिस अनिल देव सिंह कमेटी बना दी. कमेटी की सिफारिश थी कि बढ़ी हुई फीस को नौ प्रतिशत की ब्याज दर से पैरेंट्स को लौटा दिया जाए. 554 स्कूलों में से सिर्फ 105 स्कूलों ने ही फीस लौटाई, जबकि 449 स्कूलों ने पैसा वापस नहीं किया. 17 अगस्त को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जब नाराजगी जताई तो दिल्ली सरकार ने इन स्कूलों को टेकओवर करने की इच्छा जाहिर की.

स्कूलों पर सख्ती

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पश्चिमी दिल्ली के मैक्सफोर्ट पीतमपुरा और मैक्सफोर्ट रोहिणी स्कूल मेंआर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए तय किए गए कोटे में एडमिशन के दौरान अनियमितताओं की शिकायत मिली थी. दिल्ली सरकार ने दोनों स्कूलों को नोटिस भेजा था. जवाब से संतुष्ट न होने पर सरकार ने दोनों स्कूलों को टेकओवर कर लिया. स्कूल प्रशासन इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट चला गया, जहां कोर्ट ने दिल्ली सरकार के फैसले पर स्टे लगा दिया.

सरकारी जमीन पर बने हैं 410 प्राइवेट स्कूल

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दिल्ली में 410 ऐसे प्राइवेट स्कूल हैं, जो सरकारी जमीन पर बने हैं. दिल्ली सरकार ने आदेश दिया था कि सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूल बिना सरकार की इजाजत के फीस नहीं बढ़ा सकते हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सरकार के इस फैसले को सही ठहराया था. 2016-17 के सत्र में 150 स्कूलों ने फीस बढ़ाने के लिए आवेदन किया था. हालांकि 25 स्कूलों ने आवेदन वापस ले लिया और सिर्फ 5 स्कूलों को ही फीस में मामूली बढ़ोतरी की इजाजत मिली. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ये साफ कर दिया था कि प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने का प्रस्ताव मानना किसी भी तरह से ठीक नहीं है.

बच्चों के भविष्य की है चिंता

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शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया के सलाहकार अतिसी मरलेना ने मीडिया को बताया था कि निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए सरकार के पास दो ही विकल्प थे. या तो सरकार ऐसे स्कूलों को टेकओवर कर लेती या फिर उन्हें बद करने का आदेश दे देती. अगर ये स्कूल बंद हो जाते तो हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता. इसलिए सरकार ने स्कूलों को टेकओवर करने का फैसला लिया है. मारलेना के मुताबिक इन 449 स्कूलों को पैरेंट्स को 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लौटानी है.

क्या तैयार है सरकार

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दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में टेकओवर का जो प्रस्ताव दिया है, उस पर कोर्ट ने प्रतिक्रिया भी दी है. जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस नाजिमी वजीरी की खंडपीठ ने दिल्ली सरका ने कहा है कि आप 400 से अधिक स्कूलों को टेकओवर करने की तो बात कर रहे हैं, लेकिन क्या आपके पास इतने ट्रेंड लोग हैं कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों का मैनेजमेंट संभाल सकें. कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछा है कि क्या वो स्कूलों को टेकओवर करने का दिखावा मात्र कर रही है या वास्तव में वो ऐसा करना चाहती है. ये सवाल जेनुइन हैं, क्योंकि अगर इन स्कूलों का मैनेजमेंट बेहतर हाथों में नहीं रहा, तो सरकार जिस मंशा से ये कर रही है, वो कभी पूरी नहीं हो पाएगी और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा देने का सपना सपना ही रह जाएगा.


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