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इस लिस्ट में शामिल हैं तो Covishield की दूसरी डोज़ 28 दिन बाद ही लगवा सकेंगे

कोविशील्ड (Covishield) वैक्सीन की दूसरी डोज़ कितने समय बाद लगवानी चाहिए, इसके समय में फिर बदलाव किया गया है. लेकिन इस बार का बदलाव सिर्फ उन लोगों के लिए है, जो विदेश में पढ़ाई के लिए या काम करने जा रहे हैं. ये छूट उन खिलाड़ियों के लिए भी है, जो ओलिंपिक में क्वालिफाई कर चुके हैं. ये लोग अब 28 दिन बाद कभी भी कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवा सकते हैं.

विदेश जाने वाले इनमें से बहुत से लोग पहली डोज ले चुके हैं, लेकिन दूसरी डोज का टाइम बढ़ाए जाने के बाद चिंता में थे. वह 3 महीने बाद ही दूसरी डोज लगवा सकते थे. इसके कारण उनकी पढ़ाई और नौकरी आदि पर संकट आने लगा था. लेकिन अब केंद्र सरकार के नए फैसले से उनको राहत मिलेगी. गौर करने की बात ये है कि भारत में रहने वाले बाकी लोगों के लिए अब भी कोविशील्ड की पहली और दूसरी डोज के बीच का अंतर 12 से 16 हफ्ते ही रहेगा. भारत बायोटेक की बनाई कोवैक्सीन की दो डोज का अंतर भी अभी चार सप्ताह ही है.

CoWIN प्लेटफॉर्म में भी बदलाव होगा

केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद अब सरकार को उस प्लेटफॉर्म में भी बदलाव करना होगा, जिसके जरिए वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाता है. रजिस्ट्रेशन और वैक्सीन स्लॉट्स की बुकिंग CoWIN प्लेटफॉर्म के जरिए होती है. अब इन लोगों को CoWIN वेबसाइट पर अपने पासपोर्ट का नंबर फीड करना होगा, ताकि उन्हें वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट मिल सके. यह सुविधा 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए 31 अगस्त तक रहेगी.

Cowin App
18 से 44 की उम्र वालों को कोरोना वैक्सीन लेने के लिए कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. फोटो- PTI

Olympic क्वालिफाई करने वाले को भी सुविधा

इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी कर दिए हैं. निर्देश में कहा गया है कि कोविशील्ड की दूसरी डोज देने के लिए अलग से एक अधिकारी नियुक्त किया जाए. वह अधिकारी पात्र लोगों के दस्तावेजों की जांच करे और कोविशील्ड की दूसरी डोज लगाने की स्वीकृति दे.

सरकार ने टोक्यो ओलंपिक में जाने वाले खिलाड़ियों के लिए भी गाइडलाइंस में बदलाव किया था. भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा के अनुसार, इस बारे में सभी खेल फेडरेशन्स को निर्देश दे दिया गया है. कहा गया है कि जिनके भी एथलीट टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुके हैं, उनको वैक्सीन की दूसरी डोज चार सप्ताह के बाद ही लगा दी जाए.

वैक्सिनेशन के लिए दिव्यांग फोटो ID भी मान्य

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए एक नए आईडी कार्ड को भी मान्यता दी है. अब फोटो आईडी के रूप में यूनीक डिसैबिलिटी आईडी कार्ड (UDID) को भी शामिल करने का निर्देश दिया है. यह कार्ड केंद्र सरकार की तरफ से दिव्यांग लोगों को जारी किया जाता है. वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्‍ट्रेशन कराने से पहले पहचान पत्र दिखाना जरूरी होता है. अब दिव्यांग अपना आईडी दिखाकर भी टीकाकरण करा सकेंगे.

माइंड द गैपः वैक्सीन के बीच अंतराल में कब-क्या चेंज

कोविशील्ड की डोज के बीच गैप को सरकार कई बार घटा-बढ़ा चुकी है, क्रोनोलॉजी देखिए-

#जनवरी में वैक्सीनेशन की शुरुआत के वक्त कोविशील्ड के दो टीकों के बीच गैप था-  28 दिन से 42 दिन

# मार्च में इसे बढ़ाकर किया गया – 6 से 8 हफ्ते यानी 42 से 56 दिन

# 13 मई से नए नियम के तहत कोविशील्ड के दो टीकों में गैप हुआ – 12 हफ्ते से 16 हफ्ते

# 7 जून से कुछ खास लोगों के लिए कोविशील्ड के दो टीकों में गैप किया गया – 28 दिन

SII की वैक्सीन Covishield. फाइल फोटो. India Today
सरकार ने कोविशील्ड वैक्सीन के दो डोज़ के बीच का वक्त जनवरी से लेकर मई तक 3 बार बढ़ाया है. (फाइल फोटो- India Today)

कोविशील्ड की डोज के बीच गैप घटाने से नुकसान तो नहीं?

13 मई 2021 को केंद्र सरकार ने कोविशील्‍ड वैक्‍सीन के दो डोज़ के बीच के अंतर को बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह कर दिया था. इससे पहले ये अंतराल 6 से 8 सप्ताह का था. सरकार के इस फैसले पर तमाम सवाल उठे. कहा गया कि देश में वैक्सीन की कमी की वजह से ऐसा किया गया है. इस पर 15 मई को नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने जवाब दिया था. प्रेस कॉन्फ्रेस करके उन्होंने कहा था-

“कोविशील्ड की दोनों डोज़ के अंतर को जब 4-6 हफ्ते से बढ़ाकर 12 हफ्ते किया गया, तो कहा गया कि ये फैसला किसी दबाव में लिया गया है, या (वैक्सीन की) कमी हो गई है. ये बहुत दुख की बात है. हमारे देश में नेशनल टेक्निकल अडवाइज़री ग्रुप ऑन इम्युनाइज़ेशन नाम की स्वतंत्र संस्था है. यही संस्था विज्ञान और डेटा के आधार पर बताती है कि कब-कौन सी वैक्सीन इस्तेमाल करनी है. किसी भी फैसले के पीछे पूरा एक समूह होता है, न कि कोई एक व्यक्ति.

डॉ. पॉल ने वैक्सीन के स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पर भी बात रखी. बोले-

“जब इस वैक्सीन की स्टडी हुई थी तो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल 4 से 6 हफ्ते वाला था. कहीं बीच में जाकर ये प्रोटोकॉल डिस्टर्ब हुआ. दूसरी डोज़ देने में देरी हुई. लेकिन जब इसका बाद में अध्ययन किया गया तो पता चला कि दूसरी डोज़ में देरी से कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा. सुरक्षा उतनी ही रही.”

अब सरकार की ओर से कुछ लोगों के लिए कोविशील्ड की डोज का गैप घटाने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसा करने का कोई नुकसान तो नहीं होगा. इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि नुकसान जैसा कुछ नहीं है. ब्रिटेन में हुए फील्ड ट्रायल में भी यह बात सामने आई थी कि कोविशील्ड वैक्सीन का गैप बढ़ाने से इसकी क्षमता में इज़ाफा ही होता है. मतलब ज्यादा फायदा मिले न मिले, कम से कम नुकसान नहीं होगा.

इस गैप को कम करने का सबसे बड़ा फायदा विदेश जाने वालों के लिए वैक्सीनेशन प्रोसेस कंप्लीट होने का होगा. कोविशील्ड की दोनों डोज़ लेने के बाद कोई भारतीय जिस देश में भी जाएगा, पूरी तरह से वैक्सीनेट माना जाएगा. अगर एक डोज़ वैक्सीन लगवाकर जाते तो ऐसा नहीं होता.

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नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने 13 मई को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोविशील्ड के दो डोज़ के बीच गैप को बढ़ाने के बारे में तफ्सील से जानकारी दी थी. उन्होंने साथ में स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल के बारे में भी बताया था. (फोटो-एएनआई)

बाकी देशों में डोज के बीच कितना गैप?

भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड नाम से वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग कर रहा है. इस वैक्सीन को ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया है. यूरोप के कई देश इसे ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका से लाइसेंस लेकर मैन्युफैक्चर कर रहे हैं. ये वैक्सीन यूरोप के कई देशों में वैक्सीनेशन ड्राइव का हिस्सा है. इसके दो डोज़ के बीच देशों ने अपनी-अपनी स्टडी के हिसाब से अंतर रखा है. आइए जानते हैं, कहां कितना गैप है-

यूकेः  यूनाइटेड किंगडम मार्च में ही वैक्सीन के डोज़ के बीच 12 हफ्ते का गैप निर्धारित कर चुका है. ऐसा रियल लाइफ एविडेंस यानी वैक्सीनेशन के बीच लोगों से जुटाए गए डेटा के आधार पर किया गया.

यूरोपियन यूनियनः यूरोप के ज्यादातर दूसरे देश यूरोपियन यूनियन की गाइडलाइंस को मानते हुए एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के दो डोज़ के बीच 12 हफ्ते का गैप रख रहे हैं.

स्पेनः  यहां फरवरी में ही एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के दो डोज़ के बीच गैप को बढ़ाकर 16 हफ्ते किया जा चुका है. यह किसी भी देश में कोविशील्ड के दो डोज़ के बीच दिया गया सबसे बड़ा गैप है.


वीडियो – एक डोज़ कोवैक्सीन और दूसरी कोविशील्ड लगवा ली तो क्या हो सकता है?

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