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इन तीन परिवारों के उजड़ने की कहानी से समझिए कि कोरोना से बचाव कितना ज़रूरी है

पहले दो हिस्सों में इन तीन परिवारों की कहानी सुन लीजिए.

पहली घटना : पुणे का पिंपरी-चिंचवड़

दो परिवार. एक परिवार में कोविड-19 से तीन भाईयों की मौत हो गयी. और दूसरे परिवार में मां-बाप की मौत हो गयी, और 13 साल की बच्ची अकेली रह गई. 

पहले परिवार की कहानी कुछ ऐसी है कि 18 लोगों की ज्वाइंट फ़ैमिली थी. इस परिवार के तीन भाईयों को 8 जुलाई को चिंचवड के अस्पताल में भर्ती किया गया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, तीनों भाइयों में को-मॉर्बिडिटी के फ़ैक्टर थे. यानी और भी दूसरी बीमारियां थीं. और इस लिहाज़ से हाई-रिस्क में थे. तीन भाईयों में सबसे छोटे भाई को लकवा मार चुका था, तो दोनों बड़े भाइयों का दिल का ऑपरेशन हो चुका था. शुगर और बीपी जैसी बीमारियां भी थीं. तीनों भाइयों में से एक के बेटे को कोरोना का इंफ़ेक्शन हो गया था. और उनसे ही इन तीनों को पहुंचा. तीनों को ICU में एडमिट कराया गया. सबसे छोटे भाई की कोरोना से मौत हुई 12 जुलाई को. उसके बाद 13 जुलाई को सबसे बड़े भाई की हुई. और आख़िर में 18 जुलाई को मझले भाई की मृत्यु हुई.

पुणे का खड़की कैंटोन्मेंट इलाक़ा(PTI)

अस्पताल ने बताया कि तीनों भाई सांस नहीं ले पा रहे थे. ऑक्सिजन सैचुरेशन 65-84 प्रतिशत के बीच था. जबकि ये 90-94 के ऊपर होना चाहिए. लेकिन इसी परिवार के दूसरे लोगों को भी इसी अस्पताल में भर्ती किया गया था. वे सभी ठीक हो गए.

वहीं दूसरे परिवार में पति और पत्नी और उनकी एक बेटी भी थी. पत्नी को YCM अस्पताल में भर्ती किया गया 6 जुलाई को. रिलेटिव से मिली जानकारी के अनुसार, पति को किडनी की बीमारी थी. पत्नी पति का इलाज कराने के लिए बहुत परेशान थी. उसे कोरोना का इंफ़ेक्शन हुआ. 6 जुलाई को भर्ती करने के आधे घंटे बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गयी. पत्नी की मौत के बाद जिस सोसायटी में ये परिवार रहता था, उन्होंने पति और बेटी की कोरोना जांच कराई. बेटी निगेटिव आयी. पति का टेस्ट पॉज़िटिव. पति को पहले YCM अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिर वहां से बालेवाड़ी कोविड केयर सेंटर ले जाया गया. लेकिन कम लक्षण होने की वजह से उसने दरखास्त की कि उसे होम आइसोलेशन में डाल दिया जाए. क्योंकि घर पर बेटी अकेली थी. 18 जुलाई को आदमी घर आ गया. 19 जुलाई की सुबह मौत हो गयी. ख़बर बताती है अब बेटी अकेली है. और सोसायटी के पड़ोसी उसका ख़याल रख रहे हैं.

दूसरी घटना : धनबाद का कतरास

एक ही परिवार में एक के बाद एक 6 लोगों की मौत हुई. सबसे पहले मां की कोरोना से मौत हुई, फिर एक के बाद एक 5 बेटों की. 

रांची का RIMS
रांची का RIMS

सबसे पहले 4 जुलाई को 88 वर्षीय मां की बोकारो के एक नर्सिंग होम में मृत्यु हुई. मृत्यु के बाद कोरोना की जांच की गयी. कोरोना पॉज़िटिव. इसके कुछ दिन बाद रांची के रिम्स कोविड हॉस्पिटल में एक बेटे की मौत हुई. कुछ दिनों बाद दूसरे बेटे की मौत केंद्रीय अस्पताल में हुई. तीसरा बेटा धनबाद के क्वॉरंटीन सेंटर में भर्ती था. तबीयत एकाएक बिगड़ी. मृत्यु हो गयी. चौथे बेटे का कैंसर के इलाज के दौरान निधन हो गया. फिर पांचवें बेटे का भी कोविड से रिम्स रांची में निधन हो गया. 

नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर की मानें तो जून के महीने में महिला दिल्ली से शादी समारोह में हिस्सा लेने के लिए कतरास स्थित अपने घर आई थी. तभी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसे बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई.

कोरोना एक संक्रामक और घातक बीमारी है. अनलॉक की प्रक्रिया तो चल रही है. ऐसे में ख़ुद का बचाव पूरी समझदारी से करना बहुत ज़रूरी है.


कोरोना ट्रैकर :

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