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कोरोनावायरस : दिल्ली के इस ट्रॉमा सेंटर का हाल देखकर आप माथा पीट लेंगे!

दिल्ली का लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल. इससे जुड़ा हुआ है सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर (STC). STC नॉन-कोविड केंद्र है. मतलब यहां कोरोना के मरीज़ों का इलाज नहीं किया जाता है. लेकिन यहां से कोरोना को लेकर विचलित करने वाली ख़बर आ रही है. ख़बर ये कि यहां एक कई डॉक्टरों, टेक्नीशियन, कर्मचारियों को धीरे-धीरे कोरोना का संक्रमण हो रहा है. लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें तब तक काम करने को कह रहा है, जब तक उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई देने लगते हैं, या टेस्ट में वे पॉज़िटिव नहीं आते. डॉक्टर मांग उठा रहे हैं कि जल्द से जल्द अस्पताल के सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को क्वॉरंटीन किया जाए, वरना संक्रमण फैलता जाएगा. लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई अभी बेहद कम.

क्या है पूरा मामला?

यहां के डॉक्टर नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर जानकारी देते हैं. 29 अप्रैल को ऑर्थोपेडिक विभाग की एक फ़िज़ियोथेरेपिस्ट कोरोना पॉज़िटिव पाई गईं. उन्होंने 25 अप्रैल तक अपनी ड्यूटी की. और दूसरे तमाम डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीज़ों के लगातार सम्पर्क में रहीं. स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं कि उक्त फ़िज़ियोथेरेपिस्ट के सम्पर्क में आए दूसरे लोगों की जांच नहीं की गई. न ही किसी क़िस्म की कांटैक्ट ट्रेसिंग की गई. 

इस अस्पताल में अब तक क़रीब 10 मामले आ चुके हैं. सभी स्वास्थ्यकर्मी. कुछ और की भी जांच हुई है. उनकी जांच की रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है. इन 10 में से 7 स्वास्थ्यकर्मी ऐसे हैं, जो लगातार ICU में ड्यूटी कर रहे थे. यानी ज़्यादा गम्भीर मरीज़ों को कोरोना होने का ख़तरा. ICU में भर्ती मरीज़ों के कोरोना सैम्पल 4 मई को लिए गए. अभी तक रिपोर्ट नहीं आई. रिपोर्ट आने में 5-7 दिन लग जा रहे हैं. 

स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि जिन 10 लोगों की कोरोना की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है, उनकी भी कांटैक्ट ट्रेसिंग नहीं की गयी. जबकि लक्षण आने या रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के पहले इन स्वास्थ्यकर्मियों की कई लोगों से मुलाक़ात हुई थी. 

ज़हालत और भी है

आप सोच रहे होंगे कि इंफेक्शन के इतने मामले हुए भी सभी लोग ड्यूटी पर मौजूद क्यों हैं? STC के स्वास्थ्य्कर्मी ही इस बात की जानकारी देते हैं कि प्रशासन की तरफ़ से एक अनलिखा आदेश दिया गया है. कहा गया है कि सभी स्वास्थ्यकर्मियों को अपनी ड्यूटी पर आना ही है. अगर उनमें लक्षण दिखाई देते हैं या उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आती है, तभी नहीं आना है. वरना अस्पताल को अपनी सेवाएं देते रहना है.

लेकिन यहीं पर स्वास्थ्यकर्मी ICMR की रिसर्च का हवाला देते हैं. कहते हैं कि कोरोना के 80 प्रतिशत मरीज़ों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं. और STC में स्वास्थ्यकर्मियों की अमूमन उसी हाल में जांच की जा रही है, जब उनमें लक्षण दिखाई देने लगते हैं. अस्पताल के एक स्वास्थ्यकर्मी दी लल्लनटॉप से बताते हैं,

“मैं तो कोरोना पॉज़िटिव हूं. मेरा टेस्ट तभी किया गया, जब मेरे अंदर लक्षण दिखाई दिए. लक्षण दिखाई देने के बहुत दिनों पहले तक मैं काम करता रहा. मरीज़ों और दूसरे स्वस्थ्यकर्मियों के सम्पर्क में आना पड़ा. अब जिनके अंदर लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं, हो सकता है कि वो भी कोरोना पॉज़िटिव हों. क्योंकि वो मेरे या दूसरे कोरोना मरीज़ों के सम्पर्क में आए हैं. लेकिन उनकी जांच की नहीं जा रही है. और वे अभी तक काम कर रहे हैं.”

बिना लक्षणों वाले स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समस्या ये भी है कि वे अस्पताल में मौजूद दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों या दूसरे मरीज़ों को ही संक्रमित नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने घर और अपनी रहने की जगहों पर मौजूद दूसरे लोगों को भी संक्रमण की चपेट में ले रहे हैं. इससे संक्रमण का रिस्क और दायरा दोनों बड़े होते जा रहे हैं. डॉक्टर कहते हैं कि घर पर बच्चे-बूढ़े हैं. उन्हें संक्रमण से बचाने के लिए वे घर नहीं जाना चाहते. 

स्वास्थ्यकर्मियों ने अधिकारियों से सारी बात बताई. लेकिन कोरोना की जांच अनिवार्य नहीं बनायी गयी. बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों से ही कहा गया कि वे जाकर अपना कोरोना की जांच करवा लें.

स्वास्थ्यकर्मियों की क्या मांग है?

मांग है 

> STC में तत्काल प्रभाव से किसी भी क़िस्म के मरीज़ की भर्ती पर रोक लगा दी जाए. इससे उन मरीज़ों को संक्रमण का ख़तरा नहीं रहेगा. और ऐसा तब तक किया जाए जब तक सभी कर्मचारियों के कोरोना की जांच की रिपोर्ट नहीं आ जाती है.

> ऐसे संभावित कोरोना पॉज़िटिव स्वास्थ्यकर्मी जिनके घरों पर 60 साल से ऊपर और 10 साल से कम उम्र के लोग हैं, उन्हें क्वॉरंटीन की सुविधा दी जाए. जिससे उनके घर पर संक्रमण न हो.

> जितने भी मरीज़ों को कोरोना का संक्रमण है, उन्हें STC से निकालकर लोकनायक हॉस्पिटल में भर्ती कराया जाए. 

> डॉक्टर ये भी कह रहे हैं कि कोरोना की सैम्पलिंग और जांच की रिपोर्ट आने में लम्बा वक़्त लग रहा है. कई बार कुछ चीज़ों की अनुपलब्धता के कारण जांच नहीं हो पा रही है. इस व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाए. 

प्रशासन का क्या कहना है?

अभी तक प्रशासन ने ICU में मौजूद मरीज़ों की जांच की है. और लक्षणों वाले स्वास्थ्यकर्मियों को काम पर न आने के लिए कहा है. पॉज़िटिव हैं तो भी नहीं आना है. कांटैक्ट ट्रेसिंग अभी तक नहीं की जा रही है. 6 मई को असिसटेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट ऑफ़िस की तरफ़ से आदेश जारी हुआ. बस इतना कहा गया कि मीटिंग बुलाई गयी है. और एमरजेंसी सर्जरी रोक दी जाए. बाक़ी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं.

इन बातों-सवालों पर हमने लोकनायक अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ऑफ़िस से बात करने की कोशिश की. कोई जवाब नहीं मिला. जवाब मिलते ही आपको भी बतायेंगे. लेकिन स्वास्थ्यकर्मी लल्लनटॉप से बातचीत में साफ़ कहते हैं, ‘जब तक सब बात होगी, तब तक बहुत देर न हो जाए.’

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