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सिर्फ दिल्ली ही नहीं, मलेशिया में हुई तबलीगी जमात से कोरोना के लिंक भारत से जुड़े हैं!

इन दिनों कई कीवर्ड्स घूम रहे हैं. दिल्ली का निज़ामुद्दीन. तबलीगी जमात. मरकज़. मार्च महीने में हुई जमात में देश-विदेश के करीब 3000 लोग शामिल हुए थे. 30 मार्च को मरकज़ (सेंटर) खाली कराया गया. 334 लोगों को कोरोना वायरस टेस्ट के लिए भेजा गया और 700 को क्वारंटीन किया गया. अलग-अलग राज्यों में कोरोना वायरस के मामले इस मरकज़ से जुड़ रहे हैं. लेकिन ऐसा ही एक और सम्मेलन हुआ था,  मलेशिया में. यहां से अब कोरोना वायरस का लिंक जोड़ा जा रहा है. इसकी ज़द में सिर्फ भारत नहीं, बल्कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया हैं.

गृह मंत्रालय ने राज्यों को लिखा था पत्र

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने 21 मार्च को सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखा था और देश में रुके विदेशी 824 तबलीगी जमात के सदस्यों को पहचानने, उनकी स्क्रीनिंग करने और क्वारंटीन करने को कहा था. 23 मार्च को सभी इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर रोक लगा दी गई और 25 मार्च से लॉकडाउन हो गया.

28 मार्च को गृह मंत्रालय ने राज्यों को एक और पत्र लिखा. कहा कि बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से टूरिस्ट वीज़ा पर आए करीब 2 हज़ार तबलीगी सदस्य COVID-19 के संभावित कैरियर हो सकते हैं. इनमें से एक देश पर जाकर सुई रुकती है- मलेशिया.

इस पत्र में कहा गया,

कई रिपोर्ट बताती हैं कि 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच मलेशिया के कुआलालमपुर में हुई धार्मिक सभा में कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए, इसलिए मलेशिया से आने वाले लोगों की अर्जेंट स्क्रीनिंग की ज़रूरत है.

मलेशिया और तबलीगी जमात

मलेशिया की राजधानी. कुआलालमपुर. 27 फरवरी से 1 मार्च तक यहां तबलीगी जमात का बड़ा जमावड़ा हुआ. श्री पेटलिंग मस्जिद में. इसमें 30 देशों से मुस्लिम समुदाय के करीब 16,000 लोग शामिल हुए. भारत से भी लोग गए थे. इसके अलावा कनाडा, नाइजीरिया, चीन, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई, ऑस्ट्रेलिया से लोग आए. साउथ एशिया के कई हिस्सों में तबलीगी जमात को जमाह तबलीग भी कहते हैं. जमात पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं की तरफ लौटने और उनके रहन-सहन के तरीकों को फॉलो करने की बात कहता है.

विश्व के नक्शे पर मलेशिया यहां दिखता है.
विश्व के नक्शे पर मलेशिया यहां दिखता है.

अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट बताती है कि मलेशिया में 18 मार्च तक 673 कन्फर्म केसों में दो तिहाई के तार इसी मीटिंग से जुड़े थे. इसी रिपोर्ट में कहा गया है ये दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में कोरोना वायरस के फैलने का प्रमुख केंद्र बना. मलेशिया में अब तक कोरोना वायरस के 2,908 मामले सामने आ चुके हैं और 45 लोगों की मौत हो चुकी है. मलेशिया ने अपने बॉर्डर सील कर रखें हैं और सभी मस्जिदें बंद हैं.

लोगों ने हाथ मिलाया, खाने की प्लेट शेयर कीं

रायटर्स ने छह लोगों से बात की थी, जो इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे. उनके सोशल मीडिया पोस्ट देखे गए. इस आधार पर कहा गया कि कोरोना वायरस फैल सकता है. सोशल मीडिया पोस्ट में लोग कंधे से कंधा मिलाकर नमाज़ पढ़ते देखे गए. कुछ ने सेल्फी डाली, जिसमें वो खाना शेयर कर रहे थे. ये साफ नहीं है कि इनमें से कितने मलेशिया के निवासी थे.

अल जज़ीरा के मुताबिक, नाम न छापने की शर्त पर कंबोडिया के एक 30 साल के शख्स ने कहा,

हम एक दूसरे के नज़दीक बैठे थे. कई देशों के लोगों से हाथ मिलाना हुआ. जब मैं लोगों से मिला तो मैंने भी हाथ मिलाया. ये सामान्य था. मुझे नहीं पता किससे संक्रमण हुआ, किससे नहीं.

मलेशिया की राजधानी कुआलालमपुर में प्रतिबंधों के चलते सूनी सड़कें. फोटो: AP
मलेशिया की राजधानी कुआलालमपुर में प्रतिबंधों के चलते सूनी सड़कें. फोटो: AP

दो लोग बताते हैं कि कोरोना वायरस, स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर इस सभा में कोई बात नहीं हुई. हालांकि ज़्यादातर लोग हाथ धो रहे थे, क्योंकि शरीर के बाकी अंगों के अलावा हाथ धोना मुस्लिम इबादत पद्धति का हिस्सा है. कंबोडिया के एक दूसरे शख्स ने बताया कि अलग-अलग देशों के लोगों ने आपस में खाने की प्लेटें शेयर कीं.

अलग-अलग देशों से मामले सामने आने लगे

न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां से घर लौटने के बाद कंबोडिया के एल मैटली और 22 दूसरे लोग पॉजिटिव पाए गए. इसके बाद ब्रुनेई में 50 कोरोना केस मस्जिद के इवेंट से जुड़े हुए बताए गए. सिंगापुर में 56 में से पांच केस के तार यहां से जुड़े. कंबोडिया में 13 और थाईलैंड में दो मामले सामने आए, जिनका कनेक्शन इस इवेंट से था. फिलिपींस ने बताया कि इसके 215 नागरिकों ने इवेंट में हिस्सा लिया था. सिंगापुर के एक अधिकारी बिलाहरी कौसिकन ने फेसबुक पर लिखा,

कुआलालमपुर में हुए तबलीगी इवेंट को इजाज़त देना अधिकारियों की तरफ से ग़ैर-ज़िम्मेदाराना कदम था.

‘कोरोना टेस्ट करवाने से मना किया’

मलेशिया में 28 फरवरी तक सिर्फ 25 मामले सामने आए थे. कुआलालमपुर के 34 साल के एक धर्मगुरु खुज़ैफा कमाज़लन ने कहा, ‘तब तक COVID-19 कंट्रोल में लग रहा था और हमें चिंता नहीं थी.’ खुज़ैफा ने कहा कि इवेंट में आने वाले कई लोगों ने कोरोना वायरस का टेस्ट करवाने से मना कर दिया और कहा कि अल्लाह उनकी हिफाज़त करेगा.

भारत के निजामुद्दीन इलाके को सील कर दिया गया है. फोटो: India Today
भारत के निजामुद्दीन इलाके को सील कर दिया गया है. फोटो: India Today

‘मेरे लिए दुआ कीजिए’

44 साल के मलेशिया के नागरिक करीम यहां आए थे. वो करोना पॉजिटिव पाए गए. वो कहते हैं कि सरकार को ये कार्यक्रम रद्द कर देना चाहिए था. उन्होंने कहा,

मुझे थोड़ी निराशा है कि पूरी तरह आरोप हम पर लग रहा है. ऐसा सोचना ग़लत है. हमारे इकट्ठा होने पर पाबंदी नहीं थी. अब मुझे चिंता होने लगी है क्योंकि मैं पॉजिटिव पाया गया हूं. मेरे लिए दुआ कीजिए.

कई राज्यों ने मरकज़ लिंक के बारे में बताया था

गृह मंत्रालय ने मंगलवार, 31 मार्च को बताया कि तबलीगी से जुड़े कार्यक्रमों के चलते 1 जनवरी से करीब 2100 विदेशी भारत आए और उन्होंने दिल्ली के निज़ामुद्दीन में रिपोर्ट किया. द हिंदू  की ही रिपोर्ट बताती है कि गृह मंत्रालय 21 मार्च को गृह मंत्रालय  की तरफ से पत्र लिखे जाने से पहले कई राज्यों ने गृह मंत्रालय को पॉजिटिव केसों के मरकज़ से लिंक होने की जानकारी दी थी.

21 मार्च को ही जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों ने बताया था कि 65 साल का एक मरीज पॉजिटिव पाया गया था और वो अंडमान निकोबार, दिल्ली, देवबंद और उत्तर प्रदेश गया था. इस बात की संभावना जताई गई थी कि वो दिल्ली में इंडोनिशिया और थाईलैंड के तबलीगी सदस्यों के संपर्क में आया. उसके परिवार के 8 लोग पॉजिटिव पाए गए. इससे पहले 20 मार्च को तेलंगाना पुलिस ने तबलीगी मरकज़ के 11 विदेशी नागरिकों को हैदराबाद में हिरासत में लिया था. उन्हें बाद में क्वारंटीन भी किया गया था. इसके बाद 21 मार्च को गृह मंत्रालय कहता है कि 824 विदेशी तबलीगी सदस्य देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं.

कोरोना ट्रैकर:


दिल्ली के निज़ामुद्दीन में आयोजित तबलीगी जमात में शामिल हुए थे हज़ारों लोग, 24 पाए गए कोरोना पॉजिटिव

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