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'मसकली 2.0' जैसे 'हादसों' से बचने के लिए जावेद अख़्तर और समीर कोर्ट जाएंगे

‘मसकली’ गाने का नया वर्ज़न पब्लिक को पसंद नहीं आया. ओरिजिनल गाने से जुड़े हुए मोहित चौहान, ए.आर.रहमान और प्रसून जोशी ने भी नाराज़गी ज़ाहिर की. इससे पहले भी गानों के रीमिक्स बनते रहे हैं. कभी ‘हम्मा हम्मा’, तो कभी ‘दिलबर दिलबर’. दो गीतकार इस बढ़ते हुए ट्रेंड के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले हैं.

नए वर्ज़न के ट्रेंड से खफा हैं 

समीर अनजान बॉलीवुड में गीतकार हैं. 3500 से ज़्यादा गाने लिख चुके हैं. ‘आशिकी’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘देवदास’, ‘कभी ख़ुशी कभी ग़म’, ‘राज़’, ‘धड़कन’ जैसी फिल्मों में. उनका नाम गिनीज़ बुक में दर्ज है. सबसे ज़्यादा गाने लिखने के लिए. उनका ‘धूम 3’ फिल्म का गाना ‘मलंग’ यूट्यूब पर साढ़े 10 करोड़ बार देखा जा चुका है –

समीर पुराने गानों के नए वर्ज़न के ट्रेंड से खफा हैं, क्योंकि इनमें ओरिजिनल कलाकारों को सही से क्रेडिट नहीं मिलता. पीटीआई से हुई बातचीत में उन्होंने कहा –

“जो हो रहा है, वह सही नहीं है. हम इसके बिल्कुल खिलाफ हैं. लड़ाई लड़ने के लिए कोर्ट जाने को सोच रहे हैं. क्योंकि हम उन्हें, यानी म्यूज़िक लेबल को, किसी एक फिल्म के लिए अधिकार देते हैं. लेकिन वे गानों को रिक्रिएट कर रहे हैं. अलग-अलग फिल्मों और प्रोजेक्ट में इस्तेमाल कर रहे हैं. मैंने जावेद अख्तर से बात की है, जो ‘इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी’ के चेयरमैन हैं. हम कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं. यही एक समाधान है, वर्ना ये लोग मानेंगे नहीं.”

उन्होंने ‘सिर्फ तुम’ फिल्म के लिए गाना लिखा था ‘दिलबर दिलबर’. बहुत सुपरहिट गाना था. पिछले साल इसे टी-सीरीज़ ने रिक्रिएट करवाया. जॉन अब्राहम स्टारर ‘बाटला हाउस’ में इस्तेमाल करने के लिए. समीर ने जब रीमिक्स गाने की क्रेडिट लिस्ट देखी, तो बहुत निराश हो गए –

“उन्होंने शब्बीर अहमद को क्रेडिट दिया, जिन्होंने गाने की शुरुआत में केवल दो लाइन लिखी हैं. बाकी सारा गाना मेरा ओरिजिनल काम है. भविष्य में आने वाली पीढ़ी को कैसे पता चलेगा कि ओरिजिनल लेखक कौन है. जिस तरह से क्रेडिट लिखे जाते हैं, उन्हें लगेगा कि इसे किसी और ने लिखा है.”

यह देखिए ‘दिलबर दिलबर’ गाने का रीमिक्स –        आपको बता दें कि ‘दिलबर दिलबर’, ‘हम्मा हम्मा’ और ‘मसकली’ गानों के रीमिक्स में कुछ कॉमन है. वे हैं म्यूज़िक प्रोग्रामर तनिष्क बागची, जिनके बारे में सोशल मीडिया पर आजकल बहुत मीम बन रहे हैं –   

उन्होंने गानों को रिक्रिएट करने वाले कलाकारों पर भी निशाना साधा –

“जो लेखक इन रिक्रिएशन का हिस्सा बनते हैं, वे नए काम के लिए खुलकर क्रेडिट ले लेते हैं. स्टेज पर और अवॉर्ड फंक्शन में भी. वे लोग ऐसा कैसे कर सकते हैं?”

राइट्स न खरीदने को लेकर भी नाराज़गी 

समीर ने बताया कि म्यूज़िक लेबल ओरिजिनल क्रिएटर्स से राइट्स भी नहीं खरीदती किसी गाने का रीमिक्स बनाने से पहले, न ही उन्हें इसके लिए रुपया मिलता है. अगर गाने को रिक्रिएट करना है, तो कंपनी ओरिजिनल लेखक को एप्रोच क्यों नहीं करती? क्योंकि उन्हें पता है कि ओरिजिनल लेखक मना कर देंगे. उन्होंने आगे कहा कि नए लेखकों में कोई नैतिकता नहीं बची है. उन्हें बस रुपया चाहिए सर्वाइव करने के लिए.

इसके अलावा उन्होंने एक और समस्या का ज़िक्र किया. ओरिजिनल गाने की एसेंस को ख़त्म कर देने का. बोले –

“जावेद साब का गाना था ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’. उसे भी किसी ने रिक्रिएट किया था और लेखन का क्रेडिट किसी और को चला गया. सबसे बेकार बात यह है कि जो आदमी लिख रहा होता है, उन्हें ओरिजिनल लेखक के सोच-विचार के बारे में कुछ नहीं पता. वे उस सोच से जुड़े बिना कुछ भी लिख देते हैं. यह दुखी कर देने वाला है.”


वीडियो देखें – ए.आर. रहमान, ‘मसकली 2.0’ देखने के बाद नाराज़ क्यों हो गए?

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