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दिल्ली दंगों पर ब्लूम्सबरी प्रकाशन की किताब पर क्या बवाल हो गया कि इसे वापस लेना पड़ा?

ब्लूम्सबरी. ये यूनाइटेड किंगडम (यूके) का प्रकाशन हाउस है. लंदन में हेडक्वार्टर है. इसकी भारत की ब्रांच ‘ब्लूम्सबेरी इंडिया’ ने एक किताब छापी, जो फरवरी, 2020 में नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए दंगों पर आधारित है. इसका नाम Delhi Riots 2020: The Untold Story है. मोनिका अरोड़ा और सोनाली चितलकर, प्रेरणा मल्होत्रा ने मिलकर इसे लिखा है. लेकिन किताब को लेकर बवाल हो गया. विरोध होने पर ब्लूम्सबरी ने इस किताब को वापस लेने का फैसला किया. इसके बाद अलग-अलग धड़ों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

22 अगस्त को एक ऑनलाइन इवेंट के जरिए ये किताब लॉन्च की जानी थी, जिसमें बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को भी शामिल होना था. उन पर दंगों से पहले भड़काऊ बयान देने के आरोप हैं. किताब को बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव लॉन्च करने वाले थे. कपिल मिश्रा के अलावा तीनों ऑथर और फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री को भी कार्यक्रम में शामिल होना था.

फिर शुरू हुआ विरोध और समर्थन का सिलसिला

इस कार्यक्रम का पोस्टर सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होना शुरू हुआ तो तमाम लेखकों, पत्रकारों और एक्टिवस्ट ने इस किताब और ब्लूम्सबेरी का विरोध किया. दावा किया गया कि किताब नफरत फैलाती है और एक कम्युनिटी को टारगेट करती है. दूसरे पक्ष ने दावा किया कि किताब रिसर्च, इंटरव्यू और तथ्यों पर आधारित है.

इसके बाद ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’ की बहस भी फिर से शुरू हो गई. एक धड़े ने कहा कि ब्लूम्सबरी दबाव में झुक गया और प्रकाशन हाउस के बॉयकॉट की बात होने लगी. दूसरे धड़े ने ब्लूम्सबरी की तारीफ की. किसी ने कहा कि हर तरह की किताब छपनी चाहिए, भले आप उससे असहमत हों. किसी ने कहा कि नफरत फैलाना ‘फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन’ नहीं है. इस पर ब्लूम्सबेरी इंडिया ने भी अपना पक्ष रखा है.

मोनिका अरोड़ा और सोनाली चितलकर, प्रेरणा मल्होत्रा की किताब डेल्ही रॉयट्स 2020: द अनटोल्ट स्टोरी. फोटो: Amazon
मोनिका अरोड़ा और सोनाली चितलकर, प्रेरणा मल्होत्रा की किताब डेल्ही रॉयट्स 2020: द अनटोल्ट स्टोरी. फोटो: Twitter

किताब के पक्ष में लोगों का क्या कहना है?

किताब वापस लिए जाने की घोषणा के बाद बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया,

किताब अब सार्वजनिक है. भारत और पूरा विश्व इसे पढ़ेगा और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों की सच्चाई जानेगा. कोई नफरती अभियान और प्रोपेगैंडा मशीनरी सच्चाई को सामने आने से नहीं रोक सकती.

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने किताब के नाम और ब्लूम्सबरी को जोड़कर वर्ड प्ले किया.

विवेक अग्निहोत्री ने किताब वापस लिए जाने पर कई ट्वीट किए. उन्होंने इसका विरोध करने वालों को ‘लिंचर्स ऑफ फ्रीड ऑफ एक्सप्रेशन’ और ‘अर्बन नक्सल’ कहा.

लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा,

अगर आप एक लेखक हैं जो मानते हैं कि सिर्फ आपकी विचारधारा की किताब पब्लिश होनी चाहिए, तो आप अतिवादी हैं. अगर आप प्लेटफॉर्म को कंट्रोल करते हैं, और किसी को प्लेटफॉर्म मुहैया नहीं कराते हैं तो ये किताब जलाने जितना ही बुरा है. एक किताब का जवाब दूसरी किताब है.

किताब का विरोध करने वालों ने क्या कहा? 

किताब का विरोध करने वाले धड़े में ऐक्टिविस्ट साकेत गोखले ने लिखा,

ब्लूम्सबरी इंडिया एक किताब लॉन्च कर रही है, जो दिल्ली दंगों के लिए अल्पसंख्यकों पर आरोप लगाती है. एक अंतर्राष्ट्रीय पब्लिशिंग हाउस सरेआम संघी सांप्रदायिक एजेंडा को बढ़ावा दे रहा है.

साकेत गोखले के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने लिखा,

स्टेज के दूसरे लोगों में नफरत फैलाने के लिए प्रसिद्ध, फेक न्यूज फैलाने वाले और हंगामा करने वाले विवेक अग्निहोत्री और नुपुर शर्मा भी शामिल हैं. ब्लूम्सबरी, आपकी भारत की ब्रांच धर्मान्धों और दंगाइयों को स्टेज क्यों मुहैया करा रही है.

पत्रकार राना अयूब ने लिखा,

राज्य, न्यायपालिका, पुलिस ने शोषितों को शोषक के तौर पर दिखाने का फैसला किया है. दिल्ली दंगों में पीड़ितों को आरोपी बनाया गया. एक किताब को रिलीज करना, जो इस नफरत को वैधता देती हो, इस तबाही को वैधना देना है. ये फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नहीं है.

फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की बहस

वहीं, कई लोगों ने फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के समर्थन में लिखा. फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने कहा कि लोकतंत्र में बैन करना या कोई चीज वापस लेना समाधान नहीं है. उन्होंने ट्वीट किया,

किसी किताब को बैन करना, जिससे मैं सहमत नहीं हूं, ये ऐसा ही है जैसे उस किताब को बैन करना, जिससे मैं सहमत हूं. एक फिल्म को बैन करना जो मुझे ऑफेंड करती है, ये ऐसा ही है, जैसे एक फिल्म को बैन करना जिसे मैंने बनाया है और जो किसी दूसरे को ऑफेंड करती है. किसी भी चीज को बैन करना फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को दबाना है. इससे फर्क नहीं पड़ता कि इसमें झूठ हैं.

लोकतंत्र विचारों और विरोधी विचारों को स्थान देता है.. और लड़ाई का तरीका असहमति और शिक्षा है और ये हमेशा सच्चाई के लिए संघर्ष रहेगा. लेकिन एक स्वस्थ लोकतंत्र में बैन करना या वापस लेना समाधान नहीं है. मैं इतना ही कहना चाहता हूं.

डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने कहा,

  1. सभी किताबों को छपना चाहिए.
  2. ज़रूरी नहीं कि आप हर किताब से सहमत हों.

ब्लूम्सबरी इंडिया ने क्या कहा?

इंडिया टुडे के मुताबिक, ब्लूम्सबरी इंडिया ने एक बयान में कहा कि उन्होंने किताब को सितंबर में लॉन्च करने की योजना बनाई थी और उनकी जानकारी के बिना ये वर्चुअल प्री-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया गया. बयान में कहा गया,

हाल के घटनाक्रम के बाद, जिसमें ऑथर की तरफ से हमारी जानकारी के बिना प्री-पब्लिकेशन लॉन्च इवेंट आयोजित किया गया, जिसमें पार्टियों के लोग शामिल होने थे, जिन्हें पब्लिशर की तरफ से मंज़ूरी नहीं मिलती. हमने किताब का प्रकाशन वापस लेने का फैसला किया है. ब्लूम्सबरी इंडिया फ्रीडम ऑफ स्पीच का मजबूती के साथ समर्थन करता है लेकिन हमारे अंदर समाज के प्रति ज़िम्मेदारी का गहरा भाव भी है.


पुलिस की तरफ से ज़ारी कबूलनामे में ताहिर हुसैन ने दिल्ली दंगे में शामिल होने पर क्या कहा है?

 

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