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नक्सली हमले में कमांडो जख्मी हुआ तो सिख जवान ने अपनी पगड़ी खोलकर बांध दी, अब मिला सम्मान

सरदार बलराज सिंह. CRPF में कोबरा कमांडो हैं. छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले का शिकार हुए सुरक्षा बलों के साथ शामिल थे. हमले के दौरान सरदार बलराज सिंह ने ऐसा काम किया था, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया. उन्होंने हमले में घायल हुए अपने साथी जवान की जान बचाने के लिए अपनी पगड़ी उतार दी थी. इसके लिए बलराज सिंह ने बहादुरी के साथ इंसानियत भी दिखाई, जिसे अब सम्मानित किया गया है.

दरअसल, सीनियर IPS अधिकारी आरके विज मंगलवार (3 अप्रैल) को उस अस्पताल पहुंचे, जहां बलराज सिंह भर्ती हैं. विज ने यहां बलराज को नई पगड़ी भेंट की. उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से इस लम्हे की तस्वीर साझा की है और लिखा है,

‘कोबरा कमांडो बलराज सिंह को ये पगड़ी भेंट करते हुए मैंने सम्मानित महसूस किया. उन्होंने साथी सैनिक की जान बचाने के लिए अपनी पगड़ी खोल दी थी. आज मैंने उन्हें पगड़ी दी तो इसे पाकर वे बहुत खुश हुए और तुरंत अपने अटेंडर से फोटो लेने को कहा. ये मुश्किल वक्त में कुछ खुशी के पल थे.’

बलराज सिंह ने अपने जिस साथी की जान बचाई थी, उनका नाम अभिषेक पांडे है. वो CRPF में सब-इंस्पेक्टर हैं. नक्सलियों ने उन पर अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBLG) से हमला किया था. उससे निकली गोली अभिषेक के पैर के आर-पार चली गई थी. घायल एसआई की मदद के लिए बलराज सिंह ने फर्स्ट एड टीम को आवाज लगाई, जो उस समय दूसरे घायल जवानों को अटेंड कर रही थी. उधर, अभिषेक के पैर से तेजी से खून बह रहा था. वो मारे दर्द के बुरी तरह चिल्ला रहे थे. समय पर मदद नहीं मिलने पर खून रोकने के लिए बलराज ने अपनी पगड़ी उतार दी और अभिषेक के जख्मी पैर पर बांध दी. इससे कम से कम खून बहना बंद हुआ.

Naxal Rassi
रस्सी के जरिए शव को पलटने की कोशिश करता जवान. फोटो साभार- बस्तर टाकीज

साथी जवान की मदद करते हुए बलराज सिंह खुद भी घायल हो गए. नक्सली हमले में उनके पेट पर गोली लगी. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बलराज ने पूरा वाकया बताया. उन्होंने कहा,

‘एनकाउंटर के दौरान हम जवाबी हमला कर रहे थे. पोजीशन लेने के बाद माओवादियों ने हम पर UBGL से हमला किया. इससे मेरे साथी जवान सब-इंस्पेक्टर अभिषेक पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए. वे ठीक मेरी बगल में थे और उनके पैर से तेजी से खून बह रहा था. तभी मेरे दिमाग में ये बात आई कि अगर उनका खून बहना बंद नहीं हुआ तो उनकी मौत हो सकती है. मैंने फर्स्ट एड ढूंढी लेकिन अन्य जवानों के लिए इस्तेमाल होने के चलते उसकी कमी हो गई थी. कोई उपाय ना मिलता देख मैंने अपनी पगड़ी उतारी और उसे फाड़कर मेरे साथी के पैर पर बांध दी. इससे खून बहना रुक गया और पांडे फिर से फायरिंग करने लगे.’

बलराज सिंह ने ऐसा कर अपने साथी की जान बचा ली. ये भी राहत की बात रही कि वे खुद भी जिंदा बच गए. बलराज सिंह ने अखबार को बताया कि ये मुठभेड़ बहुत भीषण थी. उनके मुताबिक, इसमें सुरक्षा बलों ने कई माओवादियों को ढेर कर दिया और कइयों को घायल किया. सरकार ने भी ऐसा दावा किया है और कहा है कि मारे गए माओवादियों की संख्या जल्दी ही सामने आएगी.


वीडियो: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सली हमले का आंखो देखा हाल इस पत्रकार ने बताया! 

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