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CAA पर नाटक खेलने वाले नाबालिग बच्चों से पुलिस ने 5 बार पूछताछ करके बवाल फान लिया

दक्षिण भारत का राज्य कर्नाटक. यहां के बीदर जिले में मौजूद शाहीन स्कूल. यहां पर 21 जनवरी को एक नाटक खेला गया. नाटक में कक्षा 4, 5 और 6 के बच्चों ने भाग लिया. नाटक CAA यानी नागरिकता संशोधन क़ानून और NRC के विरोध में. इसके बाद पुलिस ने स्कूल के मैनेजमेंट और एक छात्रा की मां के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया.

किसके कहने पर? अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता नीलेश रक्षला की शिकायत पर. शिकायत में नीलेश ने कहा कि स्कूल ने पीएम नरेंद्र मोदी का अपमान किया है. नीलेश ने स्कूल मैनेजमेंट पर राजद्रोही गतिविधि का आरोप लगाया. 26 जनवरी को बीदर न्यू टाउन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गयी. दर्ज हुआ राजद्रोह का मामला.

छोटे बच्चों से पूछताछ और दो महिलाओं की गिरफ्तारी

पुलिस ने एक छात्रा की मां नज्बुन्निसा और हेड टीचर फरीदा बेगम को गिरफ्तार भी कर लिया है. गिरफ्तारी के बाद ये मामला बीदर जिला न्यायालय पहुंचा, जहां केस को 11 फरवरी तक मुल्तवी कर दिया गया है. दोनों महिलाएं अब भी जेल में. पुलिस का कहना है कि नज्बुन्निसा ने अपनी 11 साल की बेटी को नाटक में एक आपत्तिजनक डायलाग देने के लिए ट्रेनिंग दी.

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बिदर के स्कूल की सीसीटीवी फुटेज में साफ़ देखा जा सकता है कि वर्दीधारी पुलिस बच्चों को बिठाकर पूछताछ कर रही है.

इसके साथ ही कर्नाटक पुलिस ने बच्चों से पूछताछ शुरू की. और एक या दो बार नहीं. एक खबर के लिखे और आपके सामने पहुंचने तक पांच बार कर्नाटक पुलिस स्कूल के नाबालिग बच्चों से पूछताछ कर चुकी है. शाहीन स्कूल में ही एक “पूछताछ रूम” बनाया गया है. पूछताछ की लिस्ट में 85 बच्चे हैं. नज्बुन्निसा की बेटी ने समाचार वेबसाइट The News Minute से बातचीत में बताया है कि मैंने पुलिसवालों के सभी सवालों का जवाब दे दिया है, लेकिन फिर भी पुलिस मेरी मां को नहीं छोड़ रही है. नज्बुन्निसा की बेटी ने बताया है कि वो अपने पड़ोसियों के घर रही है. कहा है,

“मेरे पास सबकुछ है. लेकिन मैं बस इतना चाहती हूं कि मेरी मां वापिस आ जाए.”

इस नाटक में एक मां और उसकी संतान के बीच CAA-NRC को लेकर कागज़ दिखाने की बात हो रही है. जैसा खबरें कहती हैं, मां कहती है कि मोदी को आने दो. कागज़ मांगने दो. उसे मैं चप्पल से मारूंगी. नज्बुन्निसा की बेटी ने बताया कि पुलिस ने क्या पूछताछ की. कहा,

“हमसे पूछा गया कि हमने कैसे तैयारी की. मैंने कहा कि हमें किसी तैयारी की ज़रुरत नहीं पड़ी. हमें बस कुछ पॉइंट याद करने थे. फिर पुलिस ने हमसे पूछा कि क्या पीएम को चप्पल से मारना सही है या गलत? मैंने कहा कि गलत है. फिर मुझसे पूछा गया कि क्या मैंने नाटक में जो किया, मैं वो फिर से करना चाहूंगी? मैंने मना कर दिया. मैंने सबकुछ का जवाब सचाई से दिया. फिर भी मेरी मां को गिरफ्तार कर लिया गया.”

लेकिन यहीं पर नज्बुन्निसा को हिरासत में रखने के लिए दिए गए पुलिस एप्लीकेशन की कॉपी में कुछ अलग ही बात लिखी है. यहां लिखा है,

“लड़की ने पूछताछ में पुलिस से बताया है कि वो घर पर अपने नाटक के लिए तैयारी कर रही थी. उस समय उसकी मां नज्बुन्निसा ने उसे प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बयान देने के लिए उकसाया.”

ऐसे देखने तो नज्बुन्निसा की बेटी ने अपनी मां की संलिप्तता के बारे में कोई बयान नहीं दिया है. लेकिन पुलिस के अप्लिकेशन में नज्बुन्निसा का नाम शामिल है. हालांकि इस बारे में अभी तक मसला साफ नहीं हो सका है, कि उस आपत्तिजनक डायलॉग पहले से स्क्रिप्ट में शामिल था, या नज्बुन्निसा ने उसे शामिल किया.

वकील एलिजाबेथ शेषाद्री ने अपने ट्विटर पर उस नाटक का अंग्रेजी में पाठ किया है. इसमें वो लाइन भी सुनी जा सकती है. उन्होंने सवाल उठाये हैं कि इस नाटक का कौन-सा हिस्सा राजद्रोह में गिना जा सकता है? उन्होंने ट्वीट के माध्यम ये भी कहा है कि ये राजद्रोह नहीं, फ्रीस्पीच का मसला है.

बीदर के डीएसपी बसवेश्वर हीरा ने न्यूज़ मिनट से कहा है कि नाटक में किसका रोल क्या और कितना है, इसकी जांच की जा रही है.

“हम नियम के हिसाब से मामले की जांच कर रहे हैं. इस मामले पर हम कमेन्ट नहीं कर सकते हैं. हम नाटक के बारे में और नाटक में स्टाफ और स्टूडेंट्स के रोल के बारे में जानकारियां जुटा रहे हैं.”

पुलिस कार्रवाई कितनी सही

कर्नाटक पुलिस के इस कदम की सोशल मीडिया पर बहुत आलोचना हो रही है. आलोचना ये कि पुलिस बच्चों को क्यों टार्गेट कर रही है. पुलिस से पूछा गया कि बच्चों के नाटक में असल में क्या राजद्रोह है? जवाब नहीं मिला.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री, राज्यपाल रह चुकीं और पांच बार की लोकसभा सांसद मार्गरेट अल्वा ने कर्नाटक के भाजपा के मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा को पत्र लिखकर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाये हैं.

कर्नाटक पुलिस जिन बच्चों से सवाल पूछ रही है, उनकी उम्र 9-12 साल के बीच की बतायी जा रही है. पुलिस पर आरोप है कि वो बच्चों के मां-बाप की गैरमौजूदगी में बच्चों से घंटों पूछताछ कर रही है. इस पर पुलिस की सफाई आई. इकॉनोमिक टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, बीदर के एसपी नागेश डीएल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराने का प्रयास किया. उन्होंने 2007 के ललिता कुमारी केस का हवाला दिया, जहां किसी भी अपराध – जिसमें संज्ञान लिया जा सके – की सूचना दी जाये, तो पुलिस जल्द से जल्द FIR दर्ज करे.

लेकिन केदारनाथ सिंह बनाम बिहार सरकार के केस की मानें तो राजद्रोह यानी धारा 124(A) के तहत मामला तभी दर्ज किया जा सकता है, जब किसी स्पीच के माध्यम से राज्य के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश की गयी हो. इसकी आड़ में एसपी नागेश का देखा जाए, जहां वे कहते हैं,

“सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए हमें जो सूचना मिली, उसके आधार पर हमने FIR दर्ज कर दी. इस मामले के जांच अधिकारी सारे तथ्य जुटा रहे हैं. इस मामले में अगली ज़िम्मेदारी कोर्ट की है.”

क्या कहना है स्कूल का?

स्कूल के सीईओ तौसीफ मदिकेरी ने मीडिया से बात की. उन्होंने कहा,

“नज्बुन्निसा ने उस नाटक में उस लाइन के लिये माफ़ी मांग ली थी. लेकिन पुलिस बार-बार स्कूल चली आ रही है, और बच्चों को घंटों तक क्लासरूम से बाहर रख रही है. पुलिस पूछती है कि नाटक किसने लिखा था? किसने ये डायलॉग बोलने के लिए कहा था? क्या किसी टीचर ने इस सब की ट्रेनिंग दी थी?”

तौसीफ ने कहा है कि ये बच्चों का मानसिक शोषण है. जिन बच्चों ने नाटक में हिस्सा लिया था, उन्होंने स्कूल ही आना बंद कर दिया है. उन्होंने सवाल किया कि ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि वे अल्पसंख्यक संस्थान हैं? तौसीफ के मुताबिक, 4 पुलिसकर्मियों और बाल विकास कमिटी के 2 सदस्य सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक स्कूल में रहते हैं.

लेकिन इस मामले में जेल गयी नज्बुन्निसा के देवर ने इण्डिया टुडे से बातचीत में कहा है कि उसे पढ़ना-लिखना नहीं आता है. उसे सोशल मीडिया की भी समझ नहीं है. स्कूल ने उस पर दबाव डाला है कि वो खुद के ऊपर सबकुछ की ज़िम्मेदारी ले ले. इस आरोप पर अभी तक स्कूल की ओर से कोई सफाई नहीं आई है.

पूरी जांच पर सवाल क्यों उठ रहे हैं

इसके पीछे एक और घटना है. दिसंबर में कर्नाटक के ही दक्षिण कन्नड़ जिले में आरएसएस के नेता कल्लड़का प्रभाकर भट के स्कूल में बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया था. इस प्रस्तुति में बच्चों ने बाबरी मस्जिद का विध्वंस करते दिखाया था. बाबरी मस्जिद का एक बड़ा पोस्टर था. “जयश्री राम” का नारा लगाते ही बच्चे दौड़ पड़े और उन्होंने पोस्टर को फाड़ डाला.

इस मामले में स्कूल के मालिक भट धारा 295A, 298 के तहत मामला दर्ज किया गया था. यहां राजद्रोह की कोई बात या कोई मामला नहीं. यही नहीं. मामले में अब तक कोई भी गिरफ्तारी भी नहीं हुई है. वहीं शाहीन स्कूल के मामले में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज हो चुका है, दो लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है. और 9 साल के बच्चों से पूछताछ भी हो रही है.


लल्लनटॉप वीडियो : बिजनौर कोर्ट में पुलिस साबित नहीं कर पाई कि CAA प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर गोली चलाई

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