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'मुस्लिम होने की वजह से इलाज नहीं', अब इस मामले में एक नई बात सामने आई है

राजस्थान का भरतपुर जिला. यहां पर 5 अप्रैल को एक मामला सामने आया. लेकिन घटना 4 अप्रैल की है. इरफान खान नाम के शख्स ने गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुसलमान होने के चलते उसकी प्रेगनेंट पत्नी परवीना को सरकारी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया. इसके चलते एंबुलेंस में डिलीवरी हुई. और बच्चे की मौत हो गई. 6 अप्रैल को प्रशासन ने इस मामले में रिपोर्ट दी. इसमें कहा गया कि अस्पताल पर लगाए गए आरोप साबित नहीं किए जा सके.

पहले जान लेते हैं मामला क्या है

भरतपुर के जनाना अस्पताल में एक प्रेगनेंट महिला का केस आया. महिला के पति इरफान ने बताया कि परवीना को पहले सीकरी से भरतपुर रेफर किया गया. फिर यहां से जयपुर ले जाने को कह दिया गया. डॉक्टरों ने कहा कि हम मुस्लिम हैं, इसलिए यहां इलाज नहीं होगा. मेरे बच्चे की मौत हो गई. इसके लिए अस्पताल प्रशासन ज़िम्मेदार है. लेकिन अस्पताल के डॉक्टरों ने इससे अलग बात कही.

डॉक्टर रुपेंद्र झा ने कहा कि ये सच है कि महिला डिलिवरी के लिए आई थी. लेकिन जब वह यहां पहुंची, उस वक्त उसकी हालत काफी क्रिटिकल थी. उन्हें भर्ती करने से मना नहीं किया गया. बेहतर अस्पताल के लिए जयपुर रेफर किया गया था.

इस मामले में  मंत्री विश्वेंद्र सिंह भरतपुर ने अपनी ही पार्टी की सरकार को घेर लिया. बता दें कि राजस्थान सरकार में डॉ सुभाष गर्ग स्वास्थ्य राज्य मंत्री हैं. और वे भरतपुर से ही विधायक भी हैं.

फिर क्या हुआ

5 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो उछला. इसमें इरफान का बयान अलग था. वह कह रहे थे कि बच्चे की मौत के बाद उसे लगा कि मुस्लिम होने की वजह से यह सब हुआ. लेकिन यह उसका खुद का ख्याल है. वीडियो में इरफान कह रहे हैं कि अस्पताल ने उनसे ऐसा नहीं कहा कि मुस्लिम होने की वजह से इलाज नहीं किया जाएगा. लेकिन मीडिया ने उनसे बात की तो इरफान ने आरोप लगाया कि पुलिस के डर से उसने यह बयान दिया उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि अधिकारियों ने उससे मामले को न खींचने को कहा. पुलिस ने उसे डराया. उस पर दबाव डाला.

इरफान ने कहा कि उसे अभी भी लगता कि मुस्लिम होने की वजह से ही उसकी पत्नी को रेफर किया गया. उसे संदेह है कि अस्पताल स्टाफ ने उसे तबलीगी जमात से जुड़ा हुआ समझा.

प्रशासन की रिपोर्ट में क्या लिखा

रिपोर्ट भरतपुर के अरबन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सेक्रेटरी उम्मेदी लाल मीणा ने तैयार की. इसमें इरफान खान के हवाले से लिखा है कि स्टाफ ने उसका नाम और पता पूछा. इसके बाद कहा, ‘तबलीगी जमात वहां से निकली है.’ आगे लिखा है,

जब उससे (इरफान) पूछा गया कि क्या मुस्लिम होने की वजह से इलाज से मना किया गया. उसने कहा कि उन्होंने (स्टाफ) पर्सनली नहीं कहा कि तुम मुस्लिम हो और हम इलाज नहीं करेंगे.

रिपोर्ट में इरफान की पत्नी और भाभी के बयान भी दर्ज हैं. उन्होंने कहा कि भरतपुर अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें जयपुर रेफर किया. लेकिन न तो गाली-गलौज की और न ही बदसलूकी की. उनसे मुस्लिम होने के चलते इलाज के लिए मना नहीं किया गया.

रिपोर्ट में इरफान की पत्नी को अटेंड करने वाली डॉक्टर रेखा झारवाल का बयान भी शामिल है.

डॉ. रेखा के अनुसार,

वह (परवीना) 7 महीने के प्रेगनेंट थी. उसका खून भी काफी बह रहा था. इस वजह से महिला काफी कमजोर थी. बच्चे की दिल की धड़कन भी सुनाई नहीं दे रही थी. महिला के गंभीर हालत में होने की वजह से उसे जयपुर ले जाने को कहा गया. उसके परिवार वाले राजी हो गए थे. उसे शुरुआती इलाज के बाद रेफर किया गया. मैंने उनसे बदसलूकी नहीं की. उन्हें मुस्लिम होने की वजह से इलाज के लिए मना नहीं किया.

रिपोर्ट में सभी पक्षों के बयान, भर्ती किए जाने की पर्ची, डिस्चार्ज लेटर, सोनोग्राफी रिपोर्ट और बच्चे की डिलीवरी की रिपोर्ट भी शामिल है. निष्कर्ष के रूप में लिखा गया है कि मुस्लिम होने के चलते इलाज से मना करने की बात साबित नहीं होती. अस्पताल में महिला का प्राथमिक इलाज किया गया. इसके बाद उसे रेफर किया गया. महिला अभी भरतपुर अस्पताल में भर्ती है.


Video: राजस्थान में अस्पताल ने गर्भवती महिला को मुस्लिम होने की वजह से भर्ती नहीं किया

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