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बालाकोट में एयर स्ट्राइक करने वाले पायलट बोले, सिर्फ 90 सेकेंड का खेल था

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26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश-ए-मुहम्मद के ठिकाने पर जो ऑपरेशन किया, वो बमुश्किल 90 सेकेंड में पूरा हो गया. हिंदुस्तान टाइम्स में सुधी रंजन सेन के बायलाइन से खबर छपी है. उन्होंने इस ऑपरेशन में शामिल दो पायलट्स से बात की. ये दोनों उस ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए मिराज 2000 और मिराज 2000s फायटर जेट्स उड़ा रहे थे. पायलट्स के मुताबिक-

90 सेकेंड में काम पूरा हो चुका था. हमने हथियार रिलीज़ किया और वापस आने के लिए मुड़ गए. अगले दिन जब ये खबर आई तो मेरी बीवी ने पूछा कि क्या मैं भी इस ऑपरेशन का हिस्सा था. मैंने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप सो गया.

ऑपरेशन में शामिल एक दूसरे स्क्वॉर्डन लीडर ने HT को बताया कि ऑपरेशन से दो दिन पहले उन लोगों को इसके बारे में बताया गया था. ब्योरा बताते हुए उन्होंने कहा-

हम नियंत्रण रेखा (LoC) के पास काफी कॉम्बैट एयर पेट्रोलिंग (CAP) करते थे. हमें पता था कि कुछ तो हो रहा है. मगर क्या, इस बारे में किसी को ठीक-ठीक पता नहीं था. LoC के पास होने वाले उड़ानों की संख्या बढ़ गई थी. हम में से कई लोग कई-कई उड़ानें भर रहे थे. पहले जब हम CAP करते, उड़ानें भरते, तो उनमें हथियारों का इस्तेमाल नहीं होता था. मगर 25 फरवरी को शाम करीब चार बजे मिराज 2000 में स्पाइस-2000 मिसाइलें लोड की गईं. जेट के वेपन सिस्टम में आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप की लोकेशन डाली गई. रात दो बजे हमने ऑपरेशन के लिए उड़ान भरी.

बालाकोट ऑपरेशन में इंडियन एयरफोर्स ने मिराज 2000s और 2000is का इस्तेमाल किया था. सुखोई 30s MKi का काम था पाकिस्तान को चकमा देना. और कहीं मिराज का पता चल जाता है पाकिस्तान को, तो उस स्थिति में मिराज को कवर देना. इसके अलावा फालकन AWACS और ऐम्ब्रेअर AEWS मिड-एयर रिफ्यूलर्स और हमले के बाद टारगेट की तस्वीरें उतारने के लिए हेरॉन ड्रोन्स भी इस्तेमाल किए गए थे.

HT ने जिन दो पायलट्स से बात की, उनमें से पहले पायलट ने बताया कि किसी भी तरह के शक-शुबहे से बचने के लिए एयर फोर्स के सीनियर अफसरों ने अपने रोज़ाना के रूटीन में कोई बदलाव नहीं किया. पायलट का कहना है-

हमने जान-बूझकर हमले वाली जगह तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता पकड़ा. हम पहले देश के पूर्वी हिस्से की तरफ गए और कश्मीर पहुंचने के बाद हमने जेट का रेडियो बंद कर दिया. सबसे ज़रूरी चीज ये हुई कि पाकिस्तान के लोग हमारे करीब मौजूद नहीं थे.

ये पूछे जाने पर कि क्या हथियारों ने अपना काम किया, पायलट का जवाब था-

बिल्कुल, वो सटीक थे. सीधे निशाने पर वार किया उन्होंने.

ये पहली बार था जब ऑपरेशन में शामिल पायलट्स ने इस बारे में पत्रकारों को कुछ बताया हो.


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