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राम मंदिर मामला - कौन हैं वो दो वकील जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने धन्यवाद कहा

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देश के सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मसले पर अपना फ़ैसला सुना दिया है. अयोध्या में विवादित ज़मीन पर मंदिर बनेगा. कोर्ट ने इस फैसले में विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का फैसला किया है. मुस्लिम पक्ष को एक अलग ज़मीन मुहैया करवाई जायेगी. 16 अक्टूबर, 2019 को इस केस की सुनवाई पूरी हुई थी, जिसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए 2 वकीलों को शुक्रिया अदा किया. ये दो वकील हैं राजीव धवन और के पाराशरण. राजीव धवन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की ओर से जबकि के पाराशरण राम जन्मभूमि न्यास की तरफ़ से केस लड़ रहे थे. ये दोनों ही नामी वकील हैं.

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क्लिक करके पढ़िए दी लल्लनटॉप पर अयोध्या भूमि विवाद की टॉप टू बॉटम कवरेज.

कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते हुए धन्यवाद अदा करने के क्रम में कहा, “हम दोनों सीनियर वकीलों पाराशरण और राजीव धवन का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने अपने अपने पक्षों की दलीलें रखीं. इस कोर्ट के और अपने विरोधी पक्ष के प्रति इन्होंने जिस ईमानदारी और सफ़ाई के साथ दलीलें सामने रखीं, उससे ही सुनवाई पूरी हो सकी और हम सभी न्याय और सच्चाई की इस खोज में सहयात्री बने.”

राजीव धवन

Rajeev Dhawan 800

राजीव धवन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की नुमाइंदगी करने के कारण धमकियां झेल रहे थे. एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने राजीव धवन को ये केस लड़ने के लिए धमकी दी थी, लेकिन राजीव धवन ने अधिकारी के ही खिलाफ कोर्ट में केस दायर कर दिया. इन्हें कोर्ट में जजों से ऊंची आवाज़ में बात करने के लिए भी जाना जाता है. इन्हीं की वजह से साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में चीफ़ जस्टिस को कहना पड़ा था कि वकीलों को अपना बर्ताव देखना चाहिये, तथ्यों पर बात करनी चाहिये. साल 1946 में अविभाजित पाकिस्तान में जन्मे राजीव धवन की गिनती सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में होती है.

लोग बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में आते ही धवन के नाम का हल्ला उड़ना शुरू हो गया. कहा गया कि कोर्ट में ऐसा वक़ील आया है जो चुन-चुनकर ऐसे मुद्दे उठाता है, जहां संवैधानिक अधिकार और मानवाधिकार जुड़े रहते हैं. सुप्रीम कोर्ट में आते ही राजीव धवन दो बड़े केसों में शामिल हुए. आरक्षण को लेकर मंडल कमीशन की रिपोर्ट आ चुकी थी और सुप्रीम कोर्ट में लम्बित थी. राजीव धवन इस मामले में शामिल हुए. फिर 1994 में सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद का भी केस भी आ गया. ये भी राजीव धवन के खाते में आया. और कहते हैं कि इन दो केसों में उनकी दलीलों की बदौलत 1996 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट यानी वरिष्ठ अधिवक्ता का ओहदा मिला.

के पाराशरण

के पाराशरण के बेटे मोहन पाराशरण भी सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं. (तस्वीर साभार: बार एंड बेंच )
के पाराशरण के बेटे मोहन पाराशरण भी सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं. (तस्वीर साभार: बार एंड बेंच )

के पाराशरण वकीलों के खानदान से आते हैं. और पिछले तीन साल में इनके दो केस सबसे ज्यादा चर्चित रहे हैं. एक तो सबरीमाला मंदिर मामला. दूसरा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला. सबरीमाला में ये नायर सर्विस सोसाइटी की तरफ से वकील बने थे. मंदिर में महिलाओं के पूजा करने के अधिकार को लेकर सुनवाई चली थी. पाराशरण ने इसके विरोध में तर्क दिए थे. यानी महिलाओं के ऊपर वहां पूजा करने को लेकर जो बैन लगा था, ये उसे डिफेंड कर रहे थे. जब बहस चल रही थी, तब उन्होंने अयप्पा के ब्रह्मचारी होने की दलील दी थी, वो भी सुन्दरकाण्ड से. के पाराशरण की हिन्दू ग्रंथों की जानकारी काफ़ी तगड़ी है.

के पाराशरण का जन्म 1927 में तमिलनाडु के श्रीरंगम में हुआ. इनके पिता भी वकील थे. इनके तीनों बेटे भी वकील हैं. पाराशरण 1958 से प्रैक्टिस कर रहे हैं. तब से लेकर अब तक कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन पाराशरण उनके भरोसेमंद वकील बने रहे. कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. 76 में तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल रहे. उस समय वहां राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था. 2003 में NDA सरकार थी जब उन्हें पद्म भूषण दिया गया, और 2011 में UPA-I के दौरान उन्हें पद्म विभूषण दिया गया.

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