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महाराष्ट्र के गृहमंत्री वसूली कर रहे या राज्य में सरकार गिराने की कोशिश चल रही?

एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने और मनसुख हीरेन की मौत के बाद शुरू हुआ बवाल अब महाराष्ट्र से निकल दिल्ली पहुंच गया है. 22 मार्च यानी सोमवार सुबह संसद के दोनों सदनों में बीजेपी ने इस मसले को उठाया और जमकर हंगामा किया. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राज्यसभा में कहा कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री वसूली कर रहे हैं और ये सारा देश देख रहा है. हालांकि, चेयरमैन ने साफ किया कि कुछ भी रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा. हंगामे के बीच राज्यसभा को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

लोकसभा में बीजेपी सांसद राकेश सिंह ने कहा कि एक API (असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर) के समर्थन में मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. जिसे 100 करोड़ रुपए वसूलने टारगेट दिया गया था. मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराना चाहिए. जवाब में शिवसेना के विनायक राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की सरकार को गिराने की कोशिश लंबे वक्त से चल रही है. परमबीर सिंह के खिलाफ आरोप लगे हैं, जिसकी जांच हो रही है.

Mansukh Hiren Case
मनसुख हिरेन केस और एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने की जांच एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.

100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य?

दो दिन पहले यानी 20 मार्च को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की एक चिट्ठी वायरल हुई थी. जो उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखी थी. चिट्ठी में परमबीर ने लिखा था कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पिछले कई महीने से मुंबई पुलिस के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाकर हर महीने 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य दे रहे थे. आरोप है कि जिन पुलिस अधिकारियों से देशमुख ने कलेक्शन करने के लिए कहा था, उनमें सचिन वाझे भी शामिल थे. सचिन वाझे को एंटीलिया के बाहर विस्फोटक मिलने और मनसुख हीरेन मर्डर केस में बतौर आरोपी गिरफ्तार किया गया है. API सचिन वाझे की 16 साल बाद पुलिस में बहाली हुई थी. और उनकी पोस्टिंग क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट में थी जो हाई प्रोफाइल मामलों की जांच करता है. सचिन वाझे की क्रिमिनल इंटेलिजेंस यूनिट में पोस्टिंग को लेकर परमबीर सिंह पर सवाल उठ रहे थे. जिसकी वजह से 17 मार्च को परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाकर होमगार्ड विभाग में भेज दिया गया था. इसके तीन दिन बाद यानी 20 मार्च को परमबीर सिंह की एक चिट्ठी वायरल हुई.

इधर परमबीर सिंह की चिट्ठी वायरल हुई, उधर बीजेपी ने शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की महाविकास अगाड़ी सरकार को घेरना शुरू कर दिया. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उद्धव सरकार और एनसीपी नेता शरद पवार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने पूछा, 100 करोड़ का टारगेट सिर्फ मुंबई से ही था तो फिर अन्य शहरों और सरकार के अन्य मंत्रियों के लिए कितना टारगेट रखा गया था? सवाल ये भी उठता है कि देशमुख ये वसूली अपने लिए कर रहे थे या एनसीपी के लिए या उद्धव सरकार के लिए? शरद पवार और उद्धव ठाकरे को जवाब देना होगा.

जवाब आया: पहले शरद पवार की ओर से और फिर शिवसेना की ओर से

21 मार्च को परमबीर सिंह के आरोपों पर एनसीपी नेता अनिल देशमुख का बचाव करते हुए पवार ने कहा कि सचिन वाझे की बहाली मुख्यमंत्री ने नहीं परमबीर सिंह ने की थी. परमबीर सिंह ने सीपी रहते हुए गृह मंत्री पर कोई आरोप नहीं लगाए. अब जब उनका तबादला हो गया तो उन्होंने आरोप लगाए हैं.

शरद पवार ने अनिल देशमुख को पद से हटाने या उन पर कार्रवाई से इंकार किया. उन्होंने कहा कि देशमुख पर लगे आरोप गंभीर हैं लेकिन उनके इस्तीफे पर विचार मुख्यमंत्री करेंगे. देशमुख पर लगे आरोपों की जांच के लिए शरद पवार ने उद्धव ठाकरे को पूर्व पुलिस कमिश्नर जूलियो रिबेरो का नाम भी सुझाया. हालांकि 92 वर्षीय जूलियो रिबेरो ने इसके लिए मना कर दिया. 21 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले शरद पवार के दिल्ली स्थित आवास पर महाविकास अघाड़ी के नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में सुप्रिया सुले, अजित पवार, कमलनाथ, प्रफुल्ल पटेल और जयंत पाटिल शामिल हुए थे.

राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश?

परमबीर सिंह के आरोपों पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. कहा कि केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश हो रही है, लेकिन जो ऐसा कदम उठा रहे हैं, उनके लिए ठीक नहीं, अगर ऐसा सोचा तो मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि ये आग उन्हें भी जला देगी.

शरद पवार, फाइल फोटो
शरद पवार, फाइल फोटो

22 मार्च को संसद के बाहर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एक बार फिर से अनिल देशमुख का बचाव किया. शरद पवार ने कहा कि परमबीर ने कहा है कि फरवरी में उनको कुछ आदेश मिले. 5 फरवरी से 15 फरवरी तक अनिल देशमुख कोरोना संक्रमित हो जाने के बाद अलेक्सिस अस्पताल नागपुर में भर्ती थे. अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद भी देशमुख 27 फरवरी तक घर में क्वारनटीन थे. इधर पवार का बयान आया उधर बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने अनिल देशमुख का 15 फरवरी का एक वीडियो रिट्वीट करते हुए शरद पवार के दावे को झूठा बता दिया. वीडियो में अनिल देशमुख मीडिया से बात करते नजर आ रहे हैं. शरद पवार के दावे पर सवाल उठे तो अनिल देशमुख ने खुद सफाई दी.

दूसरी तरफ अब मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. परमबीर सिंह का कहना है कि चिट्ठी में उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए. इतना ही नहीं, परमबीर सिंह ने अपील की है कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के घर के सीसीटीवी की जांच होने चाहिए, ताकि सभी तथ्य हर किसी के सामने आ जाएं.


वीडियो- क्या अंबानी के घर के बाहर मिली कार खड़ी होने के पीछे मनसुख हिरेन ही नहीं, बल्कि और भी कई लोग हैं?

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