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अंबानी से वसूली के लिए सचिन वाझे ने एंटीलिया के बाहर खड़ी की थी विस्फोटक भरी कार?

25 फरवरी, 2021 को मुंबई में मुकेश अंबानी के घर के सामने लावारिस खड़ी कार मिली थी. उसके अंदर से जिलेटिन की 20 छड़ें बरामद हुई थीं. 5 मार्च को इस कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव ठाणे से बरामद हुआ. पहले इन मामलों की जांच उस वक्त मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में तैनात असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) सचिन वाझे ने अपने हाथ में ले ली थी. हालांक‍ि बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच सौंपी गई. नए सुराग मिलने पर NIA ने 13 मार्च को सचिन वाझे को गिरफ्तार कर लिया. अब NIA ने दोनों मामलों की जांच पूरी करके मुंबई की स्पेशल NIA कोर्ट में चार्जशीट फाइल की है. 10 आरोपियों के खिलाफ दाखिल ये चार्जशीट करीब 10 हजार पन्नों की है. इसमें कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं. आइए बताते हैं उनके बारे में-

सचिन वाझे ने क्यों रची थी साजिश?

NIA ने अपनी चार्जशीट में बर्खास्त API सचिन वाझे को आरोपी नंबर-1 बनाया है. इंडिया टुडे के दिव्येश सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक भरी स्कॉर्पियो को सचिन वाझे ने ही लगाया था. इसके पीछे उसका मकसद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में अपना खोया रुतबा हासिल करना था. अमीर और संपन्न लोगों को आतंकित करना था.. डर दिखाकर पैसा उगाहना था. चार्जशीट में कहा गया है कि सचिन वाझे को पुलिस सर्विस में बहाल होने पर क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) का प्रभारी बनाया गया. क्राइम ब्रांच मुंबई में एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम) के ऑफिस में चेंबर दिया गया.

इंडिया टुडे के मुताबिक, NIA ने चार्जशीट में दावा किया है,

घटना की जांच से पता चला कि सचिन वाझे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का अपना दबदबा हासिल करना चाहता था, इसलिए उसने कुछ लोगों के साथ मिलकर ये पूरी साजिश रची. उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार को संबोधित करते हुए धमकी भरा नोट लिखा. अंबानी परिवार को डराने के लिए विस्फोटक से भरी गाड़ी को घर के बाहर खड़ा किया, और जांच में इसे आतंकी हरकत की तरह दिखाया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, NIA ने सचिन वाझे पर 17 आरोप लगाए हैं. इसमें कार के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या, सबूतों को नष्ट करना, आतंकवादी गतिविधि और UAPA के तहत आरोप भी शामिल हैं. चार्जशीट में फरवरी के मध्य से लेकर 4 मार्च तक घटनाओं का क्रम रखा गया है.

चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि एंटीलिया कांड की साजिश को अंजाम देने के लिए सचिन वाझे ने दक्षिण मुंबई के एक होटल में 100 रात के लिए कमरा बुक कराया था. ये रूम किसी सुशांत खेमकर के नाम से फर्जी आईडी पर बुक हुआ था. वाझे ने इस रूम को सेफ हाउस के तौर पर इस्तेमाल किया था.

इसके अलावा, मनसुख हिरेन की स्कार्पियो कार की नंबर प्लेट सचिन वाझे ने ही बदली थी. रिलायंस इंडस्ट्री के नाम पर रेंज रोवर कार के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल स्कार्पियो पर करने का आइडिया भी सचिन वाझे का ही था ताकि नामी कारोबारी को डराकर वसूली की जा सके.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, धूल भरे वाहन पर साफ नंबर प्लेट ने रिलायंस के सिक्युरिटी हेड का ध्यान खींचा था. उन्होंने बयान में बताया है कि उस वक्त वह एंटीलिया में सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रहे थे. उन्हें एंटीलिया के गेट पर हंगामा करने वाली एक महिला का फोन आया तो वह वापस चले गए थे.

स्कॉर्पियों में कौन झांक रहा था?

CCTV फुटेज से पता चला कि 25 फरवरी को दोपहर 2.10 बजे अंबानी के घर के बाहर SUV खड़ी थी. तभी करीब 4 बजे एक व्यक्ति लंबा कुर्ता जैसे पहने हुए और चेहरे पर मास्क लगाए हुए आया और अंदर झांकने लगा. चार्जशीट में दावा किया गया है कि ये व्यक्ति सचिन वाझे ही था. अंबानी के घर के बाहर स्कॉर्पियो को पार्क करने के दो घंटे के बाद सचिन वाझे वहां फिर से क्यों गया था, इसका जवाब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दिया गया है. चार्जशीट में एक गवाह के हवाले से कहा गया है कि सचिन वाझे को डर था कि वह स्कॉर्पियो में अपनी पुलिस आईडी भूल आया है. इसी को लेने वह गया था. इस घटना का मुख्य गवाह Crime Intelligence Unit (CIU) में सचिन वाझे का सहयोगी है.

Antilia Case Scorpio Mansukh Hiren
तस्वीर में बाईं ओर दिख रही स्कॉर्पियो गाड़ी, जो मुकेश अम्बानी के घर के बाहर मिली थी. दाहिनी ओर CCTV में PPE किट पहने शख़्स.

उसके बयान के अनुसार, दोनों ठाणे में वाझे के घर से एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा में लगभग 1.10 बजे निकले थे. मुलुंड में टोल बूथ पार करने के बाद वाझे ने चेंबूर में इनोवा ड्राइव करने के लिए जगह बदली. जब सहयोगी ने वाझे से गंतव्य के बारे में पूछा तो बताया गया कि यह एक “गुप्त” CIU ऑपरेशन था. कारमाइकल रोड पर पहुंचने के बाद सचिन वाझे स्कॉर्पियो में लगभग 5 मिनट तक बैठे रहे. फिर बाईं ओर का गेट खोलकर निकले और स्कॉर्पियो के पीछे खड़ी इनोवा की ओर गए. सचिन वाझे ने सहयोगी से कहा,

मुझे अपना आईकार्ड नहीं मिल रहा. उन्होंने मुझे इनोवा के डैशबोर्ड में देखने के लिए कहा. लेकिन कार्ड नहीं मिला. हम दोनों जब वाझे के घर पहुंचे तो उन्होंने कहा कि जब तक वह कार्ड नहीं खोज लेते, तब तक वह यहीं रुके.

सहयोगी ने बताया कि सचिन वाझे जल्दी ही लौट आए. उन्होंने कहा कि वह शायद स्कॉर्पियो में कार्ड भूल आए हैं. इसी के बाद सचिन स्कॉर्पियो के पास गए. लेकिन चार्जशीट में ये स्पष्ट नहीं है कि उन्हें आईकार्ड मिला या नहीं. सहयोगी ने दावा किया कि उसे गुमराह किया गया था कि यह एक आधिकारिक काम है.

मनसुख हिरेन की हत्या क्यों हुई?

चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि मुंबई पुलिस के पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को मनसुख हिरेन को खत्म करने का जिम्मा सौंपा गया था. इंडिया टुडे के सौरभ वक्तानिया और दिव्येश सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, एंटीलिया का मामला जैसे ही बड़ा होने लगा और विभिन्न एजेंसियों ने जांच शुरू की, सचिन वाझे ने मनसुख हिरेन पर अपराध की जिम्मेदारी लेने का दबाव डाला. यह आश्वासन दिया कि उसे तुरंत बाहर निकाल लेंगे. लेकिन हिरेन ने जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया और सचिन वाझे की योजना फेल हो गई.

Mansukh Hiren Diatom Test
अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक वाली कार मिलने के मामले में मनसुख हिरेन का नाम सामने आया था, फिर उनकी लाश नाले में मिली थी.

चार्जशीट में लिखा है कि सचिन वाझे जानता था कि अगर किसी और जांच एजेंसी ने मनसुख से पूछताछ की तो वह असलियत उगल देगा. ऐसे में उसके लिए और बाकी लोगों के लिए मुश्किल पैदा हो जाएगी. इसके बाद प्रदीप शर्मा ने संतोष शेलार से संपर्क किया. मनसुख हिरेन को खत्म करने के लिए पैसे की पेशकश की. शेलार ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. सचिन वाझे ने मनसुख हिरेन को 2 मार्च को मुंबई पुलिस मुख्यालय बुलाया. यहां प्रदीप शर्मा और मुंबई पुलिस के बर्खास्त इंस्पेक्टर सुनील माने मौजूद थे. ऐसा इसलिए किया गया ताकि सुनील माने और प्रदीप शर्मा मनसुख हिरेन को पहचान सकें.

चार्जशीट में दावा किया गया है कि

सचिन वाझे 3 मार्च को अंधेरी ईस्ट स्थित पीएस फाउंडेशन कार्यालय में प्रदीप शर्मा से मिलने गए थे. उन्होंने एक बैग सौंपा जिसमें भारी मात्रा में नकदी थी. सचिन वाझे ने सुनील माने को बेनामी सिम कार्ड भी दिए ताकि मनसुख हिरेन को ऐसी जगह बुला सकें, जहां उन्हें ठेके के हत्यारों को सौंपा जा सके. सुनील माने ने मनसुख को लाने के लिए सफेद रंग की कार का इंतजाम किया. हत्या वाले दिन सचिन वाझे ने खुद को इस घटना से दूर दिखाने के लिए टिप्सी बार में फर्जी छापेमारी की थी.

चार्जशीट के मुताबिक, 4 मार्च को सुनील माने ने तावड़े बनकर हिरेन को फोन किया. रात 8 बजे सूरज वाटर पार्क में मिलने के लिए बुलाया. मनसुख ने ऑटो रिक्शा लिया और मिलने चल दिए. बाद में उन्हें लाल रंग की कार में बैठाया गया, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट किलर बैठे थे. कार में ही मनसुख हिरेन की हत्या कर दी गई. इसके बाद थाणे के काशेली ब्रिज के नीचे नाले में शव को फेंक दिया गया. इसके लगभग 24 घंटे में प्रदीप शर्मा के नंबर पर हिरेन की हत्या की जानकारी दी गई.

परमवीर सिंह पर क्या आरोप हैं?

चार्जशीट में मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे परमवीर सिंह पर भी आरोप लगाए गए हैं. चार्जशीट के मुताबिक, एंटीलिया केस में मुंबई पुलिस के साथ काम करने वाले एक साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया है कि परमवीर सिंह ने रिपोर्ट में फेरबदल के लिए कहा था और Jaish Ul Hind का पोस्टर जोड़ने के लिए कहा था. साइबर एक्सपर्ट का दावा है कि इस काम के लिए परमबीर सिंह ने 5 लाख के पेमेंट की बात कही थी.

Paramvir Singh
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का भी जिक्र चार्जशीट में है. (फाइल फोटो)

अंबानी के घर के बाहर स्कॉर्पियो में जिलेटिन की छड़ें मिलने के बाद खुद को जैश उल हिंद बताते हुए एक संगठन ने टेलीग्राम चैनल पर इसकी जिम्मेदारी ली थी. इंडिया टुडे की विद्या की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान साइबर एक्सपर्ट ने NIA के सामने दावा किया कि उसने 9 मार्च को पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह से क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम के सिलसिले में मुलाकात की थी. इस दौरान उन्हें बताया था कि जनवरी में इजरायल दूतावास के बाहर हुए विस्फोट मामले में उसने दिल्ली पुलिस की मदद की थी. ये भी बताया कि स्पेशल सेल ने तिहाड़ जेल के एक फोन नंबर पर टेलीग्राम चैनल का पता लगाया था, जिस पर जैश उल हिंद ने विस्फोट की जिम्मेदारी ली थी.

चार्जशीट में कहा गया है कि इस एक्सपर्ट ने जांच एजेंसी को बताया कि

मुझसे पूछा गया कि क्या मैं लिखित में ऐसी रिपोर्ट दे सकता हूं? मैंने कहा कि काम गोपनीय था. इसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही थी. मेरी ओर से कोई रिपोर्ट देना उचित नहीं होगा. लेकिन सीपी सर (परमबीर) ने कहा था कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है. मुझे वह रिपोर्ट देनी चाहिए. सीपी सर भी इस संबंध में NIA  के IG से बात करने जा रहे थे. मुंबई के सीपी के आग्रह पर मैंने सीपी मुंबई के कार्यालय में बैठकर अपने लैपटॉप पर रिपोर्ट तैयार की. ये रिपोर्ट एक पैराग्राफ में थी. मैंने इसे सीपी मुंबई को दिखाया भी था. इसमें मुझे जैश उल हिंद का पोस्टर जोड़ने के लिए कहा गया था. मैंने ये पोस्टर जोड़ा और उनके मेल पर भेज दिया.

चार्जशीट के मुताबिक, एक्सपर्ट का दावा है कि इस काम के लिए उन्हें परमबीर सिंह ने 5 लाख कैश पेमेंट किया था, जिसकी उम्मीद उसे नहीं थी. साइबर एक्सपर्ट ने हालांकि ये भी कहा कि उसने जो पोस्टर भेजा था, वह बाद में सामने आए पोस्टर से अलग था. उसमें एंटीलिया का जिक्र नहीं था. 

NIA ने साइबर एक्सपर्ट को पैसे सौंपने वाले पुलिसकर्मियों का भी बयान दर्ज किया है. चार्जशीट में कहा गया है कि इन पुलिसवालों ने बताया है कि परमबीर सिंह ने कहा था कि एक्सपर्ट को 3 लाख का भुगतान किया जाना चाहिए. लेकिन जब एक्सपर्ट ने मना किया तो उन्होंने ये राशि बढ़ाकर 5 लाख कर दी था. ये पैसा मुंबई पुलिस के SS फंड से दिया गया था.


मनसुख हिरेन केस: NIA को केस सौंपने से पहले, ATS ने सचिन वाझे को बनाया मुख्य आरोपी

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