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गलवान में हुई झड़प के बाद भारत ने चीन को पहला झटका दिया है

चीन की एक कंपनी से रेलवे ने 471 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर लिया है. रेलवे के मुताबिक, कंपनी ठीक से काम नहीं कर रही थी. चार साल पूरे होने के बाद भी कंपनी ने केवल 20 प्रतिशत काम ही पूरा किया था. लचर काम की वजह से से रेलवे ने कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का फैसला किया है. रेलवे के इस कदम को गलवान घाटी में भारत और चीन सेना की बीच हुई हिंसक झड़प से भी जोड़कर देखा जा रहा है. 15 जून को हुई इस झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे.

जिस कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द हुआ है. उसका नाम है- बीजिंग नेशनल रेलवे रिसर्च एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल एंड कम्युनिकेशन ग्रुप कंपनी लिमिटेड. 2016 में इस कंपनी ने रेलवे का एक कॉन्ट्रैक्ट जीता था. कानपुर और दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन के बीच 417 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम लगाने का काम इस कंपनी को करना था. कॉन्ट्रैक्ट 471 करोड़ रुपये का था जो वर्ल्ड बैंक से लोन के रूप में लिया जाना था.

रेलवे ने चाइनीज़ कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के पीछे पांच वजहें बताई हैं.
रेलवे ने चाइनीज़ कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने के पीछे पांच वजहें बताई हैं.

इंडिया टुडे को मिले डॉक्यूमेंट्स में रेलवे ने कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की वजहें भी बताई हैं, जो इस ऐसी हैंः

– कॉन्ट्रैक्ट में लिखे होने के बावजूद टेक्निकल डॉक्यूमेंट जमा करने को लेकर कंपनी का ढुलमुल रवैया.
– कंपनी के इंजीनियर्स और अधिकारियों का साइट पर उपलब्ध न रहना.
– स्थानीय एजेंसियों से इस कंपनी ने कोई टाईअप नहीं किया था, जिसके चलते सिग्नलिंग का काम ज़मीन पर नहीं हो पा रहा था.
– इस काम के लिए लगने वाले ज़रूरी मटेरियल कंपनी ने समय पर नहीं खरीदे.
– बार-बार मीटिंग के बाद भी उनके काम में कोई प्रोग्रेस नहीं थी.

रेल मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा,

रेल सेक्शंस के इंटरलॉकिंग के लिए रेलवे सिग्नल और टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है. ऑपरेशन के लिए लिए और सिस्टम की दिक्कतों को सुधारने के लिए सॉफ्टवेयर सिक्योरिटी कोड्स होने बेहद ज़रूरी हैं. कंपनी ने लंबे समय तक टेक्निकल डिटेल और कोड देने से मना किया. कई स्तर की बैठक के बाद कंपनी ने कोड हमें दिए. लेकिन वो चीनी भाषा में थे. और अधूरे थे.

कहा जा रहा है कि कंपनी के डेटा और सॉफ्टवेयर शेयर नहीं करने को लेकर रेलवे की चिंता ये भी थी कि मिलिट्री इक्विपमेंट्स, सैनिकों के मूवमेंट की जानकारी और ट्रेनों की पूरी जानाकरी देश से बाहर जा सकती है. इसके लिए जरूरी था कि रेलवे के पास सिस्टम का पूरा कंट्रोल हो. अधिकारी ने बताया कि अब किसी भारतीय कंपनी को ये कॉन्ट्रैक्ट देकर काम पूरा किया जाएगा.


लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन की झड़प में शहीद हुए 20 भारतीय जवानों के नाम जानिए

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