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पत्रकार से IAS बने अलपन बंदोपाध्याय, जो ममता और मोदी सरकार में रस्साकशी की नई वजह बन गए हैं

अलपन बंदोपाध्याय (Alapan Bandopadhyay). ममता बनर्जी सरकार और केंद्र के बीच के मौजूदा विवाद की मुख्य वजह. अलपन बंदोपाध्याय को लेकर बंगाल सरकार ने सोमवार 31 मई को दो बड़े फैसले किए. पहला, उन्हें बंगाल के मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त कर दिया. दूसरा, उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का प्रमुख सलाहकार बना दिया गया.

सीएम ममता बनर्जी ने ट्वीट कर अलपन बंदोपाध्याय को अपना प्रमुख सलाहकार घोषित किया. उन्होंने लिखा,

‘मैं अलपन बंदोपाध्याय को नहीं जाने दूंगी. वो मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार होंगे.’

इस फैसले को अलग-अलग ऐंगल से देखा जा रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि बंगाल सरकार का ये फैसला केंद्र से चल रही तकरार में उसके बैकफुट पर होने का संकेत है. वहीं, कुछ का मानना है कि सेवा विस्तार से पहले ही अलपन बंदोपाध्याय को मुख्य सचिव से प्रमुख सलाहकार बनाकर ममता बनर्जी ने चतुराई भरा कदम उठाया है. राजनीति के जानकार इसमें शतरंज का ‘चेक मेट’ करार दे रहे हैं.

क्यों शुरू हुआ विवाद?

बीती 28 मई को पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम ममता बनर्जी की एक अहम बैठक होने वाली थी. साइक्लोन यास से हुए नुकसान के सिलसिले में. लेकिन इस बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिस्सा नहीं लिया. वो मीटिंग में पहुंचीं जरूर, लेकिन आधे घंटे की देरी से. चक्रवात से जुड़े दस्तावेज़ पकड़ा कर सीएम ममता किसी और मीटिंग का हवाला देकर चली गईं. उनके अलावा इस बैठक में अलपन बंदोपाध्याय भी मौजूद नहीं थे. तब से उन्हें लेकर राज्य और केंद्र सरकार के बीच तकरार बनी हुई है.

24 मई को केंद्रीय सचिवालय के नाम एक चिट्ठी लिखकर पश्चिम बंगाल सरकार ने अलपन बंदोपाध्याय की सेवाओं को 3 महीने और बढ़ाने का अनुरोध किया था. उधर, केंद्र ने पीएम मोदी की मीटिंग में नहीं आने को लेकर बंदोपाध्याय को 28 मई को ही आदेश जारी कर दिया. कहा कि 31 मई की सुबह 10 बजे तक दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक आकर जॉइन करें.

गौरतलब है कि 31 मई को ही अलपन रिटायर होने वाले थे. उससे पहले ही ममता बनर्जी ने साफ़ कह दिया था कि वो अपने राज्य में कोरोना वायरस से चल रही लड़ाई के बीच अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र भेजने के आदेश का पालन नहीं करेंगी. ममता ने 31 मई की सुबह एक चिट्ठी लिखकर केंद्र को इस बात की जानकारी दे दी. फिर उन्होंने अलपन को अपना प्रमुख सलाहकार बना दिया. उन्होंने केंद्र के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा,

‘उन्होंने (केंद्र सरकार) कोई कारण नहीं बताया. मैं हैरान हूं. मैंने फैसला किया है कि हमें कोविड महामारी के लिए उनकी (अलपन बंदोपाध्याय) सेवा की ज़रूरत है. कोविड के लिए और चक्रवात यास के कारण प्रभावित लोगों के लिए हमें उनकी सेवाओं की जरूरत है.’

इस पूरे प्रकरण के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भाजपा के बड़े नेताओं के निशाने पर रहीं. लेकिन इसका नुक़सान असल मायनों में अलपन बंदोपाध्याय को झेलना पड़ गया. पूरी लड़ाई के केंद्र में वो आ गए.

तबादले का क़ानून क्या कहता है?

आम तौर पर केंद्र सरकार हर साल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की इच्छा रखने वाले आईएएस, आईपीएस और इंडियन फ़ॉरेस्ट सर्विस के अधिकारियों की ‘प्रस्ताव सूची’ मांगती है. इसके बाद उस सूची से अधिकारियों का चयन किया जाता है.

आईएएस कैडर रूल्स के नियम 6(1) के मुताबिक़,

‘एक अधिकारी, संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की सहमति से, केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधीन काम के लिए प्रतिनियुक्त किया जा सकता है. लेकिन अगर किसी के मामले में असहमति होती है तो फिर मामले का निर्णय केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा मिलकर किया जाएगा और संबंधित राज्य सरकार का निर्णय केंद्र सरकार के निर्णय को प्रभावित करेगा.’

इससे एक बात साफ़ होती है कि ये नियम केंद्र के लिए अपनी इच्छा को उस राज्य पर लागू करने या थोपने को मुश्किल बना देता है. अलपन बंदोपाध्याय का मामला इसका उदाहरण है.

कौन हैं अलपन बंदोपाध्याय?

इस पूरे घटना के केंद्र में होने के बावजूद अलपन बंदोपाध्याय चुप्पी साधे रहे हैं. 1987 बैच के IAS अफ़सर अलपन पहले पत्रकार हुआ करते थे. CPM शासन में मुख्यमंत्री रहे बुद्धदेब भट्टाचार्य के ख़ास माने जाते थे. अब ममता बनर्जी के भी ख़ास हैं.

Alapan Bandyopadhyay Sixteen Nine
अलपन बंदोपाध्याय, पश्चिम बंगाल मुख्य मंत्री के मुख्य सलाहकार

जानकार अलपन बंदोपाध्याय को एक बेहद प्रतिभाशाली और काबिल अफ़सर मानते हैं. उन्होंने कई ज़िलों के DM की भी भूमिका निभाई है. वरिष्ठ पत्रकार जयंतो घोषाल कहते हैं,

‘इस घटना से पहले केंद्र सरकार और ममता सरकार के बीच का सम्पर्क सूत्र अलपन बंदोपाध्याय थे.’

कोलकाता के प्रेज़िडेन्सी कॉलेज से पढ़े अलपन ने पॉलिटिकल साइन्स में ग्रैजूएशन किया है. बाद में उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजूएशन किया. उनकी पत्नी सोनली चक्रबर्ती इसी यूनिवर्सिटी की वाइंस चांसलर हैं. अलपन के बड़े भाई अनजन बंदोपाध्याय बंगाल के एक टीवी चैनल के संपादक थे. दो हफ़्ते पहले ही कोरोना वायरस की वज़ह से उनका देहांत हो गया था.


साइक्लोन यास पर हुई मीटिंग के बाद ऐसा क्या हुआ कि बंगाल के मुख्य सचिव को दिल्ली बुला लिया गया?

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